सीहोर के 'लोकल टाइटैनिक' पर खतरों भरा सफर : प्रशासन को जबलपुर जैसे बड़े हादसे का इंतजार?
नफीस खान@सीहोर. जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक हादसे से सबकी रूह कांप गई। तेज आंधी के कारण क्रूज डूबा और कई मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं। इस हादसे के बाद प्रदेशभर की नदियों-जलाशयों में चलने वाली नावों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे है।
सीहोर जिले के नर्मदा तटों पर चलने वाली नावों पर भी सवाल उठ रहे है। यहां लोकल टाइटैनिक नाम की बड़ी नावें चल रही है। जो अपने नाम के जैसे ही खतरनाक है। लेकिन प्रशासन इनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाह बना हुआ है। यहां नर्मदा नदी के सीलकंठ और बाबरी घाटों पर हर दिन मौत का खेल चल रहा है। लोग मजबूरी में अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती लहरों को पार कर रहे हैं।
सीहोर का 'लोकल टाइटैनिक' और जानलेवा लापरवाही
सीहोर जिले के इन घाटों पर चलने वाली विशाल नावों को लोग 'लोकल टाइटैनिक जहाज' कहते हैं। ये नावें दिखने में जितनी बड़ी हैं, सुरक्षा के मामले में उतनी ही खोखली हैं। इन नावों पर न तो लाइफ सेविंग जैकेट हैं और न ही कोई रैलिंग लगी है। सबसे डरावनी बात यह है कि इन नावों पर सिर्फ इंसान ही नहीं सवार होते। इन पर भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉली, कारें और दर्जनों मोटरसाइकिलें लाद दी जाती हैं।
प्रशासन की चुप्पी और ठेकेदारी का खेल
हैरानी तो इस बात पर होती है कि जिला प्रशासन इन्हें रोकने के बजाय बढ़ावा दे रहा है। हर साल इन असुरक्षित नावों के संचालन का बाकायदा सरकारी ठेका दिया जाता है। राजस्व वसूलने के चक्कर में अफसरों को लोगों की कीमती जान की कोई परवाह नहीं है। नियम कहते हैं कि पानी के सफर में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं, लेकिन यहां नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
पुल नहीं तो मजबूरी में मौत का सफर
नसरुल्लागंज क्षेत्र के ग्रामीणों के पास नदी पार करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। सालों से यहां के लोग सरकार से एक पक्के पुल की मांग कर रहे हैं। पुल न होने के कारण ग्रामीणों को व्यापार और खेती के लिए नदी पार करनी पड़ती है। नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु भी इन्हीं खतरनाक नावों के सहारे अपनी यात्रा पूरी करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे डरते तो हैं, पर रास्ता कोई और नहीं है।
राजनेताओं के वादे और खोखले आश्वासन
यह पूरा क्षेत्र हाई-प्रोफाइल नेताओं का गढ़ माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई दिग्गज मंत्रियों ने यहां आकर नर्मदा मैया की पूजा की। हर चुनाव में पुल बनाने का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। जनता पूछ रही है कि क्या पुल तब बनेगा जब बरगी जैसा कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?
सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ती सीहोर में
अगर बीच नदी में नाव का संतुलन बिगड़ा या मौसम खराब हुआ, तो बचाव का कोई रास्ता नहीं है। नावों की क्षमता से ज्यादा वजन उन पर लादा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की यह लापरवाही कभी भी मातम में बदल सकती है। वक्त रहते अगर पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो इतिहास खुद को दोहरा सकता है।
चलेगा जांच अभियान, निरस्त होगा ठेका
इस मामले में द सूत्र ने भैरूंदा एसडीएम सुधीर कुशवाहा से बात की। एसडीएम कुशवाहा ने बताया कि इन नाव संचालकों को सुरक्षा के सभी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए है। यदि कहीं लापरवाही हो रही है तो हम कल ही जांच करवाएंगे। नावों पर हर तरह की सेफ्टी की व्यवस्था होनी चाहिए। लापरवाही पाई जाने पर ठेका निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। बरगी डैम हादसा
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