पार्वती डैम डूब क्षेत्र में पुराना स्कूल, 20 फीट दूर ही बन रही नई बिल्डिंग, HC ने उठाए सवाल
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- सीहोर के चांदबढ़ गांव में पार्वती डैम का निर्माण हो रहा है।
- डैम के कारण गांव की बड़ी जमीन बाढ़ क्षेत्र में आ गई।
- पुरानी सरकारी स्कूल बिल्डिंग भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में है।
- नई बिल्डिंग पुरानी बिल्डिंग से सिर्फ 20 फीट दूर बन रही है।
- हाई कोर्ट ने सरकार से सुरक्षा और निर्माण की पूरी जानकारी मांगी है।
मामला सीहोर जिले की ग्राम पंचायत चांदबढ़ का है। यहां पार्वती डैम का निर्माण चल रहा है। डैम बनने के कारण गांव की बड़ी जमीन डूब क्षेत्र में आ गई है। इसी जमीन पर सरकारी स्कूल की पुरानी बिल्डिंग बनी है। बाढ़ क्षेत्र में आने के कारण स्कूल को दूसरी जगह ले जाने का फैसला हुआ। इसके बाद नई स्कूल बिल्डिंग बनाने का काम शुरू किया गया।
नई बिल्डिंग की जगह ने खड़े किए सवाल
विवाद नई बिल्डिंग की जगह को लेकर है। नई बिल्डिंग पुरानी स्कूल बिल्डिंग से केवल 20 फीट दूर बनाई जा रही है। सरकारी पक्ष के अनुसार यह जमीन बाढ़ क्षेत्र में नहीं आती। इसी आधार पर यहां नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। याचिका में इसी फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकार्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने पैरवी की। याचिकाकर्ता ने इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है।
12 एकड़ में 10.5 एकड़ जमीन प्रभावित
यह पूरा मामला खसरा नंबर 23/2 से जुड़ा है। इसी खसरे पर सरकारी स्कूल की पुरानी बिल्डिंग बनी है। बताई गई जानकारी के अनुसार जमीन करीब 12 एकड़ है। इसमें करीब 10.5 एकड़ जमीन बाढ़ क्षेत्र में आ गई है। करीब 1.5 एकड़ जमीन बाढ़ क्षेत्र से बाहर बताई गई है। सरकार इसी बची जमीन पर नई स्कूल बिल्डिंग बना रही है।
पानी बढ़ा तो बच्चों की सुरक्षा का क्या होगा
याचिका में नई जगह को अव्यवहारिक बताया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार पानी तय सीमा देखकर नहीं रुकता। पानी कुछ फीट आगे बढ़ने पर नई बिल्डिंग प्रभावित हो सकती है। स्कूल में प्राथमिक और मिडिल कक्षा के बच्चे पढ़ेंगे। याचिका में बच्चों के पानी की ओर जाने का खतरा भी बताया गया है। बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजामों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा पूरा हिसाब
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की डिविजनल बेंच में हुई। बेंच में चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस प्रदीप रूसिया शामिल रहे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकारी पक्ष से नई बिल्डिंग पर सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि पुरानी बिल्डिंग से इतनी कम दूरी क्यों रखी गई। कोर्ट ने निर्माण के कानूनी आधार की जानकारी भी मांगी है।
शपथ पत्र में बतानी होगी निर्माण की पूरी वजह
हाई कोर्ट ने सरकार को शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है। सरकार को बताना होगा कि बिल्डिंग किस कानून के तहत बन रही है। बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा को लेकर कोई सर्वे हुआ है या नहीं। स्कूल की जगह तय करने की क्या योजना बनाई गई। नई बिल्डिंग की अनुमति से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।
सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर भी कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर भी सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि नई बिल्डिंग इतनी पास क्यों बनाई जा रही है। पुरानी बिल्डिंग के ठीक पास नई बिल्डिंग बनाने का कारण पूछा गया। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया गया कि कहीं सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा। हालांकि अदालत ने अभी किसी गड़बड़ी का निष्कर्ष नहीं दिया है। सरकार के जवाब के बाद स्थिति और साफ होगी।
चार सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
हाई कोर्ट ने सरकार से सभी जरूरी जानकारी मांगी है। यह जानकारी शपथ पत्र के जरिए अदालत में पेश करनी होगी। इसमें निर्माण, अनुमति और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तथ्य होंगे। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। अब अगली सुनवाई में सरकार के जवाब पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
अब नजर सरकार के जवाब पर
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल नई बिल्डिंग की जगह को लेकर है। पुरानी बिल्डिंग बाढ़ क्षेत्र में आने के कारण हटाई जा रही है। दूसरी तरफ नई बिल्डिंग उसी जगह से करीब 20 फीट दूर बन रही है। इसी दूरी ने बच्चों की सुरक्षा का सवाल खड़ा किया है। हाई कोर्ट अब प्रदेश सरकार के जवाब के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगा।
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