दोबारा जांच के घेरे में आई वीआईटी यूनिवर्सिटी, छात्रों में फैला टाइफाइड का खतरा, 250 से ज्यादा बीमार
सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। बता दें कि नवंबर 2025 में भी यहां जबरदस्त बवाल हुआ था। तब छात्रों ने गंदे पानी को लेकर कैंपस में तोड़फोड़ की थी।
हालात इतने बिगड़े थे कि पुलिस और STF बुलानी पड़ी थी। अब यूनिवर्सिटी में दोबारा उसी तरह की लापरवाही सामने आई है।
यूनिवर्सिटी में 250 से ज्यादा स्टूडेंट्स बीमार
सीहोर की वीआईटी यूनिवर्सिटी से इन दिनों टाइफाइड जैसे लक्षणों का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पिछले 10 दिनों में 250 से ज्यादा स्टूडेंट्स को बुखार की शिकायत के बाद इलाज दिया गया है।
इनमें से 57 स्टूडेंट्स के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 23 में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया पाया गया है। बाकी 34 सैंपल की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
चिरायु मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और पैथोलॉजी रिपोर्ट के आधार पर जांच की गई है। बुखार के साथ अस्पताल पहुंचे चार स्टूडेंट्स में से तीन को छुट्टी दे दी गई है। वहीं एक स्टूडेंट की हालत गंभीर है। उसका इलाज आईसीयू में चल रहा है।
दो करोड़ की पानी की मशीन
VITके रजिस्ट्रार केके नायर ने किसी भी छात्र की टाइफाइड रिपोर्ट पॉजिटिव होने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि 80 स्टूडेंट्स को वायरल फीवर और हाई टेंपरेचर की शिकायत थी।
इनमें से 20 को चिरायु मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। दो स्टूडेंट्स को भर्ती किया गया था, लेकिन अब उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
2025 बैच के छात्रों को एहतियात के तौर पर छुट्टी दी गई है। इसके अलावा पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए दो करोड़ रुपए की नई मशीन लगाई गई है।
23 स्टूडेंट्स की रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव
वहीं चिरायु मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अजय गोयनका का कहना है कि वीआईटी के 23 स्टूडेंट्स की ब्लड कल्चर रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आई है, और 34 सैंपल की जांच अभी भी जारी है।
नवंबर में भी हुआ था कांड
बता दें कि नवंबर 2025 में भी छात्रों ने हॉस्टल में गंदा पानी मिलने की शिकायत की थी। जब विवाद बढ़ा तो तोड़फोड़ और आगजनी की घटना भी हुई थी। मामला इतना बढ़ गया था कि पुलिस और एसटीएफ को तैनात करना पड़ा था।
एनएचएम के रिटायर डायरेक्टर डॉ. पंकज शुक्ला का कहना है कि, एक ही संस्थान में 23 टाइफाइड केस मिलना यह दिखाता है कि पानी या खाने में गंभीर संक्रमण हो सकता है। उन्होंने पानी, फूड मटेरियल और मेस स्टाफ की जांच कराने की जरूरत जताई है।
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