सिवनी में 46 नवजातों की मौत का दावा: भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल, सीएम से जांच की मांग

Atul Dwivedi | Oct 13, 2026, 20:07 IST
मध्यप्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल में नवजातों की मौत के मामले में भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जांच कराने की मांग की है।
मध्यप्रदेश के सिवनी में नवजात बच्चों की मौत को लेकर भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विधायक दिनेश राय मुनमुन का दावा है कि जिला अस्पताल में पिछले तीन महीने में 46 नवजातों की मौत हुई है। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और इलाज के नाम पर पैसे लेने के आरोप भी लगाए हैं।
BJP MLA Dinesh Rai Munmun has urged Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav to investigate newborn deaths at Seoni District Hospital. He has raised questions about the hospital’s arrangements and healthcare facilities.

विधायक ने 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मामला उठाया। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री ने जांच की बात कही है।



अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर भाजपा विधायक के सवाल

सिवनी से भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने द सूत्र से बातचीत में जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीने में अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी SNCU वार्ड में 46 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है।



विधायक का कहना है कि यह आंकड़ा बढ़कर 58 तक पहुंच सकता है। हालांकि, अभी तक मौतों के आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं। नवजातों की मौत के इन दावों के बीच अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।



मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिले भाजपा विधायक

विधायक दिनेश राय मुनमुन ने 13 अक्टूबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। उन्होंने नवजात बच्चों की मौत और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का मामला मुख्यमंत्री के सामने उठाया।



विधायक के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। हालांकि, जांच को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।



डॉक्टरों की कमी और पैसे लेने के आरोप

भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने द सूत्र से कहा कि बच्चों की मौत कुपोषण के कारण हुई है।



विधायक ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर मरीजों से पैसे लेने का आरोप भी लगाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिला अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज की व्यवस्था कैसी है।



अस्पताल प्रबंधन ने क्या बताई मौत की वजह?

विधायक के आरोपों के बीच जिला अस्पताल प्रबंधन ने नवजात बच्चों की मौत के पीछे उनकी गंभीर हालत और कम वजन को वजह बताया है।



अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से गंभीर हालत में नवजात बच्चों को भर्ती कराने लाया जाता है। कई बार छह या सात महीने में जन्म लेने वाले बच्चों को भी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।



प्रबंधन के मुताबिक, ऐसे नवजात बच्चों में एस्फिक्सिया इंजरी की समस्या सामने आती है।



एस्फिक्सिया इंजरी क्या है?

एस्फिक्सिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। जन्म के आसपास शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने की स्थिति को बर्थ एस्फिक्सिया (Birth Asphyxia) कहा जाता है।



इस स्थिति में मस्तिष्क और शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। समय से पहले जन्म लेने वाले और गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।



कलेक्टर से संपर्क किया, नहीं मिला जवाब

मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए द सूत्र ने सिवनी कलेक्टर नेहा मीना से संपर्क करने की कोशिश की। द सूत्र ने उनके दो मोबाइल नंबरों पर फोन किया। पहला नंबर 62699 23** बंद मिला, जबकि दूसरे नंबर 97555 56** पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। कलेक्टर का जवाब आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।



SNCU वार्ड क्या होता है?

स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी SNCU जिला अस्पतालों और बड़े सरकारी अस्पतालों में बनाई जाती है। यह सामान्य शिशु वार्ड से अलग होती है।



यहां जन्म से 28 दिन तक के उन नवजात बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। कम वजन, समय से पहले जन्म और सांस लेने में परेशानी जैसी स्थितियों में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।



कांग्रेस ने भी उठाए सवाल, 29 आदिवासी बच्चों की मौत का दावा

सिवनी में नवजात बच्चों की मौत के दावों के बीच कांग्रेस भी सरकार पर हमलावर है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।



सिंघार का दावा है कि मरने वाले बच्चों में 29 आदिवासी बच्चे शामिल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि ज्यादातर बच्चों की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई है।



फिलहाल नवजात बच्चों की मौत के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है। विधायक दिनेश राय मुनमुन ने 46 मौतों का दावा किया है। उनका कहना है कि यह संख्या बढ़कर 58 तक जा सकती है।

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