फर्जी रसीदें थमा किसानों से वसूल लिया लाखों का लगान, अब EOW के शिकंजे में पटवारी

Sanjay Dhiman | Jul 07, 2026, 18:37 IST
Photograph: (the sootr)
सिवनी जिले में पटवारी अरुण सनोडिया ने किसानों से टैक्स और लगान के पैसे लेकर फर्जी चालान थमाए। EOW जबलपुर की जांच में करीब 6 लाख रुपए के गबन का खुलासा हुआ। आरोपी पर FIR दर्ज हुई।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • सिवनी में पटवारी अरुण सनोडिया ने किसानों से टैक्स के पैसे फोन-पे पर मंगाए।
  • आरोपी पटवारी ने सरकारी खजाने में राशि जमा न कर फर्जी चालान छापे।
  • जालसाज पटवारी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कुल 6 लाख का गबन किया।
  • शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम सिवनी ने आरोपी पटवारी को निलंबित कर दिया।
  • EOW जबलपुर ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न सख्त धाराओं में FIR दर्ज की।

सिवनी जिले में पटवारी अरुण सनोडिया का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उसने किसानों से टैक्स और लगान के पैसे लेकर जाली चालान थमाए। जांच में सरकार को करीब 6 लाख रुपये के नुकसान का पता चला।



EOW जबलपुर ने आरोपी पर सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एसडीएम सिवनी पहले ही पटवारी को निलंबित कर चुके हैं।आरोपी हल्का नंबर 11, तहसील सिवनी में तैनात था। अभी वह हल्का नंबर 25, तहसील घंसौर में पदस्थ है।



शिकायत से खुला मामला

मामले का खुलासा राजकुमार साहू की शिकायत से हुआ। वे एकता कॉलोनी, सिवनी के निवासी हैं। उन्हें 2007 से 2025 तक के मकान टैक्स के 5,400 रुपए जमा करने थे। पटवारी ने 31 अगस्त 2024 को यह राशि ऑनलाइन अपने पास मंगवा ली।



इसके बदले उसने पीड़ित को 30 अगस्त 2024 की तारीख का चालान दिया। जब पीड़ित ने पोर्टल पर चालान चेक किया तो कुछ नहीं मिला। पूरा चालान जाली निकला और पैसे पटवारी की जेब में गए। यह देखकर पीड़ित को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ।



एक और किसान भी ठगा गया

यह अकेला मामला नहीं था। रामकुमार कुशवाहा नाम के एक और किसान को भी ठगा गया। पटवारी ने उन्हें 89,550 रुपए का फर्जी चालान थमाया था। दोनों पीड़ितों ने अलग-अलग समय पर शिकायत दर्ज कराई।



लगातार शिकायतें मिलने पर तत्कालीन एसडीएम (SDM) सिवनी हरकत में आए। उन्होंने जिला कोषालय अधिकारी से दोनों चालानों की जांच कराई। दोनों चालान सरकारी पोर्टल से गायब मिले, यानी पूरी तरह फर्जी थे। मामला गंभीर देखते हुए एसडीएम ने पटवारी को तुरंत निलंबित कर दिया।



जांच में खुलीं और परतें

निलंबन के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, आरोपी के और भी कारनामे सामने आते गए। हर नया मामला पिछले से ज्यादा चौंकाने वाला निकला।



भू-स्वामी सुनील नाहर का मामला भी सामने आया। उन्होंने अपनी जमीन के लगान के लिए फोन-पे से 44,856 रुपए भेजे थे। उनकी जमीन के खसरा नंबर 412/1 और 413/1 हैं। पटवारी ने उन्हें 6,300 और 32,001 रुपए के दो अलग चालान दिए।



जांच में पता चला कि 32,001 रुपए का चालान दिया गया था। पोर्टल पर इसके बदले सिर्फ 21,300 रुपए ही दर्ज थे। यानी सीधे 17,256 रुपए का गबन हुआ। छोटी-छोटी रकम जोड़कर आरोपी बड़ी चोरी कर रहा था।



इसके बाद एक और बड़ा मामला सामने आया। शीतल चंद भूरा के नाम पर 5,04,000 रुपए का एक चालान जारी हुआ था। जब इसे ट्रेजरी और ऑनलाइन पोर्टल पर खोजा गया। यह भी पूरी तरह फर्जी निकला। इतनी बड़ी रकम का जाली चालान देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।



कुल 6 लाख का गबन उजागर

सभी मामलों को जोड़ने पर बड़ी तस्वीर सामने आई। आरोपी पटवारी ने योजनाबद्ध तरीके से सरकार को नुकसान पहुंचाया। जांच में यह रकम करीब 6 लाख रुपए आंकी गई है। पटवारी टैक्स और लगान के पैसे लेता था। फिर असली की जगह जाली चालान थमा देता था। पीड़ितों को लगता था कि पैसा सरकारी खजाने में जमा हो गया है।



कड़ी धाराओं में मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW (Economic Offences Wing) जबलपुर ने कदम उठाया। जांच एजेंसी ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 83/2026 दर्ज किया। यह मामला 1 मार्च 2024 से 31 अगस्त 2024 के बीच का बताया जा रहा है। घटना स्थल सिवनी जिला बताया गया है।



आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) 2023 की धाराएं लगाई गई हैं। ये हैं धारा 316(5), 337, 336(3) और 340(2)। इनमें धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज बनाना और गबन के आरोप शामिल हैं। इसके साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7(सी) भी जोड़ी गई है। ये धाराएं गंभीर मानी जाती हैं और सजा भी सख्त हो सकती है।



आगे की जांच जारी

ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से दूसरे कर्मचारियों को सबक मिलता है। EOW जबलपुर फिलहाल इस मामले की विवेचना कर रही है। जांच एजेंसी पीड़ितों और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। पीड़ित किसानों को अब न्याय मिलने की उम्मीद है।



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जबलपुर EOW की कार्रवाई



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