शाहपुरा टोल पर वसूली बंद, PIL पर फैसला आने से पहले नितिन गडकरी का आदेश
जबलपुर-भोपाल मार्ग के शाहपुरा टोल पर बड़ा फैसला हुआ है। ब्रिज टूटने के बाद टोल वसूली का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। 22 सितंबर को हाईकोर्ट में PIL पर सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा। इसी दिन PWD मंत्री राकेश सिंह ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को टोल बंद करने पत्र लिखा। टोल वसूली पर रोक लग गई है।
22 सितंबर को कोर्ट में मामला और मंत्री की पहल
इस पूरे मामले में 22 सितंबर की तारीख अहम रही। इसी दिन हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा। इसी दिन PWD मंत्री राकेश सिंह ने पत्र लिखा। उन्होंने नितिन गडकरी से टोल रोकने का आग्रह किया।
इसके बाद केंद्र स्तर पर इस मांग पर फैसला हुआ। अब शाहपुरा टोल पर वसूली बंद करने की प्रक्रिया चल रही है। राकेश सिंह ने X अकाउंट पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है।
MP हाईकोर्ट में टोल वसूली को लेकर PIL
शाहपुरा निवासी राजेश सिंह राजपूत ने PIL दाखिल की थी। याचिका संख्या 16051/2026 है। याचिका की सुनवाई 22 सितंबर को हुई थी। इसमें शाहपुरा टोल पर वसूली रोकने की मांग हुई। ब्रिज टूटने से जनता की परेशानी भी बताई गई। पौड़ी रेलवे फाटक खोलने की मांग भी रखी गई।
22 सितंबर को चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अभी हाईकोर्ट का फैसला सामने नहीं आया है। इसी बीच टोल रोकने का फैसला हो गया है। जबलपुर से भोपाल रोड पर यात्रा करने वालों को राहत मिली है।
शाहपुरा ब्रिज टूटने से बिगड़ी यातायात व्यवस्था
शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज जबलपुर-भोपाल मार्ग का अहम हिस्सा है। यह मार्ग जबलपुर और भोपाल को जोड़ता है। ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात डायवर्ट किया गया। भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला जा रहा है। इससे स्थानीय सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ा है।
याचिका में रोजाना लंबे जाम की बात कही गई थी। कई जगह चार से आठ घंटे तक जाम लग रहा है। स्कूली बच्चों और मरीजों को भी परेशानी हो रही है। किसानों की उपज समय पर मंडी पहुंचने में अटकी। व्यापारियों को भी यातायात प्रभावित होने से नुकसान हुआ।
23 फरवरी को ढह गया था ब्रिज
शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 2023 में हुआ था। याचिका में इसकी लागत करीब 628 करोड़ बताई गई है। अगस्त और सितंबर 2025 में दरारें दिखने की बात है। इसके बाद यातायात को एक तरफ सीमित किया गया। 23 फरवरी 2026 को ब्रिज का बचा हिस्सा ढह गया। हादसा रखरखाव कार्य के दौरान हुआ था।
इस हादसे में किसी की जान नहीं गई थी, लेकिन ब्रिज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे। निर्माण में लापरवाही के आरोप भी लगाए गए। याचिका में पूरे मामले की जांच की मांग की गई। जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई मांगी गई है।
ब्रिज बंद, फिर भी टोल वसूली जारी थी
ब्रिज बंद होने के बाद भी टोल लिया जा रहा था। यही मुद्दा PIL का बड़ा आधार बना। याचिकाकर्ता ने टोल वसूली रोकने की मांग की। उनका कहना था कि यातायात सामान्य नहीं चल रहा। इसके बावजूद वाहन चालकों से पूरा टोल लिया जा रहा था।
याचिका में वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था मांगी गई। पौड़ी रेलवे फाटक खोलने का सुझाव भी दिया गया। एसडीओ और कलेक्टर ने भी इसके लिए पत्र लिखे। रेलवे ने फाटक खोलने की मांग स्वीकार नहीं की। इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस रेलवे फाटक सहित अन्य मांगों पर PIL में फैसला आना बाकी है।
राकेश सिंह ने 22 सितंबर को गडकरी को पत्र लिखा
PWD मंत्री राकेश सिंह ने 22 सितंबर को पत्र भेजा। यह वही दिन था, जब PIL पर सुनवाई हुई। पत्र में शाहपुरा टोल रोकने की मांग रखी गई। उन्होंने नितिन गडकरी से तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया।
पत्र में ब्रिज से यातायात प्रभावित होने की बात कही। वैकल्पिक रास्ते से अतिरिक्त दूरी तय हो रही है। यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। इसी वजह से टोल रोकने की मांग की गई। मंत्री ने ब्रिज जल्द दोबारा बनाने की बात कही। तब तक टोल नहीं लेने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे लोगों को राहत मिलेगी।
गडकरी ने अनुरोध पर टोल रोकने की मंजूरी दी
PWD मंत्री राकेश सिंह ने सोशल अकाउंट X पर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने गडकरी के फैसले के लिए आभार जताया। उनके अनुसार टोल रोकने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। ब्रिज बनने तक टोल नहीं लेने की बात कही गई।
PIL के फैसले से पहले मिली बड़ी राहत
एक तरफ हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।।दूसरी तरफ केंद्र ने टोल रोकने की मंजूरी दी। इससे वाहन चालकों को तत्काल आर्थिक राहत मिलेगी।
हालांकि PIL के बाकी मुद्दे अभी बाकी हैं। पौड़ी रेलवे फाटक खोलने का सवाल भी लंबित है। ब्रिज की जांच और पुनर्निर्माण भी अहम मुद्दा है। हाईकोर्ट का फैसला इन पहलुओं पर दिशा तय करेगा।
अब नजर हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर
शाहपुरा टोल पर वसूली रोकने की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसकी जमीन पर पूरी तरह लागू होने की प्रतीक्षा है। ब्रिज बनने तक टोल नहीं लेने की बात कही गई है। इससे वैकल्पिक रास्ते से गुजरने वालों को राहत मिलेगी।
वहीं हाईकोर्ट की PIL पर फैसला अभी बाकी है। कोर्ट के आदेश से दूसरे मुद्दों की दिशा तय होगी। ब्रिज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी भी बड़ा सवाल है। स्थायी राहत ब्रिज के दोबारा तैयार होने से मिलेगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी में सुगम बस सेवा शुरू, गडकरी बोले, एयर पॉल्यूशन के 40% के लिए मैं जिम्मेदार
OBC क्रीमी लेयर विवाद: केंद्र की 2 साल की मांग पर SC का फैसला सुरक्षित
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: कोर्ट ने कहा 27 मृत बच्चों के अभिभावकों को जोड़ें, डॉक्टर ने वापस ली याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट का अनोखा आदेश, वकील को बांटने होंगे चाय-समोसे, जानें पूरा मामला