शाजापुर में एसडीएम कार्यालय का घटिया निर्माण, हाथ लगाते ही गिरने लगा प्लास्टर, टीम ने पकड़ी गड़बड़ी
News in Short
- शाजापुर के गुलाना में एसडीएम कार्यालय निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे।
- निरीक्षण में प्लास्टर गिरने और दीवारों में दरारें पाई गईं।
- घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे भविष्य में हादसा हो सकता है।
- ठेकेदार ने दरारें छुपाने के लिए हरी नेट लगवाकर जाल बिछाया।
- जांच टीम ने वीडियोग्राफी से ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत का सबूत जुटाया।
News in Detail
शाजापुर जिले के गुलाना में करोड़ों की लागत से बन रहे एसडीएम कार्यालय भवन में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया में चर्चा होने के बाद भोपाल से आई राजस्व आयुक्त की विशेष टीम ने भवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण में निर्माण में गंभीर खामियां सामने आईं। प्लास्टर हाथ लगाते ही गिरने लगा और दीवारों में बड़ी दरारें नजर आने लगीं।
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हाथ लगाते ही झड़ने लगे प्लास्टर
अधिकारियों ने नवनिर्मित दीवारों की जांच की तो पाया कि प्लास्टर हाथ लगाने से टूटकर गिरने लगा। यह दृश्य अधिकारियों के लिए हैरान करने वाला था। प्लास्टर में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता बेहद घटिया थी, जो भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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दीवारों में गहरी दरारें
न केवल प्लास्टर, बल्कि दीवारों में भी गहरी दरारें दिखाई देने लगी हैं। ये दरारें अनदेखी नहीं की जा सकतीं, क्योंकि यह भवन किसी दुर्घटना को न्योता दे सकता है। ऐसा लगता है कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री मजबूती से नहीं जुड़ी थी और निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई।
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ठेकेदार ने बनाई जाल
इस निर्माण कार्य में हुई लापरवाही को छिपाने के लिए ठेकेदार ने चाल चली। जैसे ही राजस्व आयुक्त के निरीक्षण की खबर लगी, ठेकेदार ने जल्दी से भवन और विवादित दीवारों पर हरी नेट लगवा दी। इसका मकसद मीडिया और अधिकारियों की नजरों से दरारों और घटिया प्लास्टर को छिपाना था। हालांकि प्रशासन की पैनी नजरों ने इस जाल को पकड़ लिया और घोटाले का पर्दाफाश कर दिया।
जुटाया गया सबूत
भोपाल की जांच टीम ने मौके पर वीडियोग्राफी कराई। इसमें प्लास्टर गिरते हुए और दीवारों में दरारें दिख रही हैं। यह वीडियोग्राफी सबूत के रूप में रिकॉर्ड की गई है। अब यह वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। यह वीडियो ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत का अहम सबूत बनेगा।
यह सरकारी कार्यालय जनता के टैक्स के पैसे से बन रहा है। यह लापरवाही भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। यह साबित करती है कि ठेकेदार और इंजीनियरों ने निजी लाभ के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया। इस घटिया निर्माण कार्य ने स्थानीय लोगों और अधिकारियों को चौंका दिया है।