पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत पर सुनवाई टली, अब 10 जून को HC में सुनवाई
News in short
- शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका बुधवार को हाईकोर्ट में सूचीबद्ध हुई।
- मामला जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच के समक्ष लगा।
- जनप्रतिनिधि से जुड़ा मामला होने के कारण सुनवाई नहीं हुई।
- न्यायालय ने प्रकरण को उपयुक्त बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
- अब मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2026 को होगी।
आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका पर बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए उपयुक्त बेंच के समक्ष प्रकरण सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2026 को होगी।
हाईकोर्ट में नहीं हो सकी सुनवाई, बदली गई बेंच
विदिशा के चर्चित आत्महत्या प्रकरण में आरोपी बनाए गए पूर्व विधायक शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका बुधवार 3 जून को जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस देवनारायण मिश्रा की वेकेशनल सिंगल बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हुई। हालांकि मामले की मेरिट पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायालय ने पाया कि यह मामला एक जनप्रतिनिधि से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी सुनवाई नियमानुसार उपयुक्त बेंच के समक्ष होना आवश्यक है। इसके बाद प्रकरण को उचित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने के निर्देश जारी किए गए।
आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दर्ज है मामला
पूर्व विधायक शशांक भार्गव के खिलाफ विदिशा जिले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि आर्थिक लेन-देन और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर गोविन्द सिंह गुर्जर ने आत्महत्या कर ली थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने वायरल वीडियो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और परिजनों के बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना है। इसी आधार पर पुलिस ने भार्गव को आरोपी बनाया और जांच आगे बढ़ाई।
जिला अदालत से मिल चुका है झटका
इससे पहले विदिशा की द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत शशांक भार्गव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी की आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपराध की प्रकृति, जांच की स्थिति और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
अब 10 जून पर टिकी हैं निगाहें
ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा मामला जबलपुर हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में भेजे जाने के बाद यह पहली बार सूचीबद्ध हुआ था। हालांकि तकनीकी कारणों से सुनवाई आगे बढ़ गई। अब इस बहुचर्चित मामले में पूर्व विधायक शशांक भार्गव को राहत मिलती है या नहीं, इस पर कानूनी और राजनीतिक हलकों की नजरें 10 जून 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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