सिस्टम से परेशान बुजुर्ग ने जन सुनवाई में खाया जहर, मौत से पहले कहा मैं तीन बार...

Aman Vaishnav | May 27, 2026, 11:53 IST
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मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। अपनी ही दुकान पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने के लिए बुजुर्ग 3 महीने से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। आखिर में सिस्टम से हारकर बुजुर्ग ने कलेक्टरेट में जहर खाकर जान दे दी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • श्योपुर के 50 वर्षीय देवेंद्र गोयल की पैतृक दुकान पर उनके भाई के बेटे ने जबरन कब्जा कर लिया था।
  • देवेंद्र ने अपनी दुकान वापस पाने के लिए पुलिस से लेकर कलेक्टर तक हर अधिकारी से शिकायतें की थीं।
  • सुनवाई न होने से तंग आकर देवेंद्र ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में ही सल्फास की गोली खा ली।
  • अस्पताल ले जाने के महज एक घंटे के भीतर ही बुजुर्ग देवेंद्र की दर्दनाक मौत हो गई।

जन सुनवाई के दौरान मची अफरा-तफरी

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक बहुत ही हैरान और दुखी कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां कलेक्ट्रेट परिसर में चल रही जन सुनवाई के दौरान अचानक हड़कंप मच गया।



जन सुनवाई में एक बुजुर्ग ने प्रशासन के सामने ही जहर खा लिया। अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की थी। शरीर में जहर पूरी तरह फैलने की वजह से करीब एक घंटे में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।



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भाई के परिवार ने दुकान पर किया कब्जा

दरअसल यह पूरा मामला श्योपुर के सब्जी मंडी इलाके का है। यहां रहने वाले 50 वर्षीय देवेंद्र गोयल पिछले कई दिनों से मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत परेशान चल रहे थे।



देवेंद्र की अपनी एक पैतृक दुकान थी। बीते 28 फरवरी को उनके छोटे भाई के बेटे प्रिंस और उसकी मां ने जबरन ताला तोड़कर उस दुकान पर अपना कब्जा जमा लिया था। देवेंद्र ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और कानूनी तरीके से अपनी दुकान वापस पाने की कोशिश शुरू की।



3 महीने तक काटे चक्कर, नहीं मिली मदद

देवेंद्र गोयल ने अपनी दुकान वापस पाने के लिए प्रशासन के हर छोटे-बड़े अधिकारी का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 2 मार्च से लेकर 26 मई तक लगातार लिखित शिकायतें सौंपी।



जानकारी के अनुसार वह कोतवाली पुलिस के पास भी गए लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने श्योपुर के पुलिस अधीक्षक को भी चिट्ठी लिखकर मामले की गंभीरता के बारे में बताया।



देवेंद्र का आरोप था कि कोतवाली पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह से ढीलापन दिखाया। इसी वजह से परेशान होकर उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।



पूरी घटना का घटनाक्रम

तारीख / दिनक्या हुआ?
28 फरवरीछोटे भाई के बेटे प्रिंस और उसकी मां ने जबरन दुकान का ताला तोड़कर कब्जा किया।
2 मार्च - 26 मईपीड़ित देवेंद्र गोयल ने पुलिस, एसपी और कलेक्टर को कई लिखित शिकायतें दीं।
मंगलवार (घटना का दिन)कलेक्ट्रेट में साप्ताहिक जन सुनवाई के दौरान डिप्टी कलेक्टर को आवेदन देने के बाद जहर खाया।
अस्पताल पहुंचने के 1 घंटे बादडॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी देवेंद्र गोयल की मौत हो गई।

कलेक्ट्रेट परिसर में खाई सल्फास

जानकारी के अनुसार घटना वाले दिन यानी मंगलवार, 27 मई को श्योपुर कलेक्ट्रेट में जन सुनवाई चल रही थी। देवेंद्र गोयल अपनी आखिरी उम्मीद लेकर वहां पहुंचे थे। उस समय कलेक्टर शीला दाहिमा वहां मौजूद नहीं थीं। इसलिए देवेंद्र ने डिप्टी कलेक्टर को अपना आवेदन सौंपा। आवेदन देने के बाद जब वह कलेक्ट्रेट बिल्डिंग से बाहर निकले तो वह सिस्टम की बेरुखी से पूरी तरह टूट चुके थे।



मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने परिसर में ही अपनी जेब से निकालकर गेहूं में रखने वाली सल्फास की दवा खा ली। कुछ ही देर में जब दवा ने अपना असर दिखाना शुरु कर दिया था। कुछ ही देर में देवेंद्र की तबीयत बिगड़ने लगी और वह दर्द से तड़पते हुए जमीन पर गिर पड़े।



कलेक्ट्रेट में बुजुर्ग को इस हाल में देखकर वहां मौजूद लोगों और अन्य आवेदकों की भीड़ जमा हो गई।



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कैमरे के सामने बयां किया दर्द

जमीन पर तड़पते हुए देवेंद्र गोयल का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में वह अपनी आखिरी सांसें गिनते हुए कैमरे पर रोते हुए कह रहे हैं कि मैं तीन महीने में तीन बार यहां जन सुनवाई में आ चुका हूं।



मेरी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। थाने से लेकर एसपी तक सब जगह गुहार लगा ली, पर कोई सुनने वाला नहीं है।



वहां मौजूद कुछ लोगों ने तुरंत स्थिति को संभाला। साथ ही तड़पते हुए बुजुर्ग को जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, देवेंद्र ने खुद उन्हें बताया था कि उन्होंने सल्फास खाई है।



सल्फास का असर शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। लगभग तीन घंटे में यह पूरे सिस्टम को फेल कर देता है। देवेंद्र के मामले में भी यही हुआ और अस्पताल पहुंचने के महज एक घंटे बाद उनकी मौत हो गई।



जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए अधिकारी

इस दर्दनाक घटना के बाद अब प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। कोतवाली थाना के टीआई सत्यम गुर्जर का कहना है कि शिकायत तो मृतक ने की थी।



वहीं दुकान से जुड़ा यह पूरा विवाद सिविल प्रकृति का था। कानूनी रूप से इस मामले में कार्रवाई करने का अधिकार राजस्व विभाग को था। इसीलिए पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद उन्हें राजस्व विभाग के पास भेज दिया था।



दूसरी तरफ श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा (आईएएस शीला दाहिमा) ने इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि दुकान का यह मामला पूरी तरह से पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ था।



प्रशासन के स्तर पर जो भी जरूरी और वैधानिक कार्रवाई होनी होती है, वह नियम के अनुसार की जाती है। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके सामने उसी दिन आया था।



अब बुजुर्ग के आवेदन की जांच कराई जाएगी कि उस पर पहले क्या-क्या कार्रवाई हुई थी और कहां कमी रह गई।



यह कदम क्यों उठाना पड़ा?



वहीं मृतक के बड़े बेटे कन्हैया गोयल ने बताया कि अभी मेरे पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा। जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी पिता की मृत्यु व्यर्थ रहेगी।



जीतू पटवारी ने की मुआवजा की मांग

इस मामले में एमपी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने अपने x अकाउंट पर पोस्ट किया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि श्योपुर कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान वृद्ध श्री देवेंद्र गोयल जी की मौत हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि आवेदन देने के बाद उन्होंने जहरीला पदार्थ पी लिया था।



घटना से स्तब्ध हुए परिजनों ने कहा कि अपनी दुकान पर हुआ कब्जा छुड़वाने के लिए वे पहले भी कई बार शिकायत कर चुके थे। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं मिला।



जीतू पटवारी ने आगे लिखा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी बेलगाम तंत्र की लापरवाही से हुई यह सरकारी हत्या बता रही है, जनसुनवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता हो रही है।



निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई का पता लगवाएं। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ, पीड़ित परिवार को मुआवजा भी दें।



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