श्योपुर नगर पालिका चुनाव विवाद : हाईकोर्ट ने कहा, सरकार कर रही बेंच हंटिंग

Sanjay Gupta | Apr 03, 2026, 17:07 IST
Photograph: (thesootr)
श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव विवाद में ग्वालियर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार पर बेंच हंटिंग का आरोप लगाया है। कोर्ट ने दो सप्ताह की स्थगन मांग को अनुचित बताया और कहा कि मुख्य सचिव डेढ़ माह में फैसला नहीं ले सके। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग के चुनाव को लेकर अदालत में मामला चल रहा है।
  • सरकार ने सुनवाई दो सप्ताह टालने की मांग की थी।
  • हाईकोर्ट ने इस मांग को बेंच हंटिंग का प्रयास बताया।
  • मुख्य सचिव डेढ़ माह में भी इस मामले में कोई फैसला नहीं ले सके।
  • अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, कोई अर्जेंट हियरिंग नहीं होगी।

सरकार की मांग पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव विवाद मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट (High Court) ने एक अप्रैल की सुनवाई के बाद लिखित आदेश जारी किया। इसमें कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार बेंच हंटिंग (Bench Hunting) का प्रयास कर रही है।



बता दें कि जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच में यह मामला सुना गया। सरकार की ओर से एएजी (Additional Advocate General) दीपेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि एजी (Advocate General) प्रशांत सिंह नहीं आ सके, इसलिए सुनवाई दो हफ्ते टाल दी जाए।



दूसरी ओर चुनी गई अध्यक्ष रेनु गर्ग के वकील आमीर खान ने बताया कि उनके दूसरे वकील आ रहे हैं। लेकिन 10.45 बज गए और कोई नहीं आया, जबकि सुनवाई 10.30 बजे तय थी।



इस पर बेंच ने कहा कि अगर एजी नहीं आ सकते थे तो एक-दो दिन बाद की तारीख ली जा सकती थी। दो हफ्ते का समय मांगना और वकील का न आना, यह सब मिलाकर बेंच हंटिंग का प्रयास लगता है।



कोर्ट ने यह भी कहा कि अब 13 जुलाई से पहले कोई भी अर्जेंट हियरिंग (Urgent Hearing) का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। बता दें कि यह मामला श्योपुर की नपाध्यक्ष रेणु गर्ग के चुनाव नोटिफिकेशन से जुड़ा है।



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समझें बेंच हंटिंग क्या होती है?

बेंच हंटिंग एक अनैतिक कानूनी तरीका है। इसमें वादी या वकील किसी खास जज की बेंच के सामने अपना केस लगवाने की कोशिश करते हैं। मकसद यह होता है कि मनचाहा फैसला मिले। इसे फोरम शॉपिंग (Forum Shopping) भी कहते हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाता है।





कौन-कौन उलझा इस मामले में?

इस विवाद में मुख्य सचिव अनुराग जैन, चंबल संभाग आयुक्त सुरेश कुमार, मौजूदा श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा और तत्कालीन श्योपुर कलेक्टर व रिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer) शिवम वर्मा भी फंसे हुए हैं। शिवम वर्मा अब इंदौर के कलेक्टर हैं। शासकीय अधिवक्ता और कई अन्य अफसर भी इस पेचीदा मामले में पार्टी बन चुके हैं।



मुख्य सचिव से भी नहीं हुई कार्रवाई

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि राज्य प्राधिकारी बार-बार छल करने की कोशिश करते नजर आए। समय गुजर रहा है, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार ने खुद कहा था कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा, लेकिन डेढ़ माह गुजर जाने के बाद भी मुख्य सचिव इस मामले में कोई फैसला नहीं ले सके।



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समझें पूरा मामला - क्या है इस विवाद की जड़?

बता दें कि वर्ष जुलाई-अगस्त 2022 में श्योपुर नपा के चुनाव में रेनु सुजीत गर्ग जीतकर अध्यक्ष बनी थी, लेकिन सरकार ने कभी उनके नाम का नोटिफिकेशन ही जारी नहीं किया। इस पर एक याचिका स्थानीय पार्षद सुमेर सिंह ने दायर की है। इसमें श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेनु सुजीत गर्ग के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। याचिका में कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर को भी पक्षकार बनाया गया है।



शुरुआत में मप्र सरकार और गर्ग दोनों ने एक जैसा तर्क दिया। दोनों ने कहा कि चुनाव का नोटिफिकेशन (Notification) ही नहीं हुआ, इसलिए याचिका नहीं चल सकती। इस पर हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2025 को पूछा कि जब नोटिफिकेशन नहीं हुआ तो गर्ग अध्यक्ष पद का उपयोग कैसे कर सकती हैं। कोर्ट ने उनके किसी भी फैसले पर रोक लगा दी।



इसके बाद गर्ग डबल बेंच (Double Bench) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक गईं, लेकिन दोनों जगह से राहत नहीं मिली। जब ऊपर से राहत नहीं मिली तो सरकार ने पलटी मार दी। अब कहा गया कि नोटिफिकेशन की जरूरत ही नहीं थी। साथ ही मांग की कि अध्यक्ष को काम करने दिया जाए और रोक हटाई जाए।



इस पर कोर्ट ने सीधे पूछा कि पहले यह तर्क क्यों दिया था कि नोटिफिकेशन जरूरी है? और उस तर्क पर सुप्रीम कोर्ट तक अपील क्यों की? अगर सरकार ने अधिकारियों या वकीलों को निर्देश नहीं दिए थे, तो वह किसके कहने पर अपना पक्ष रख रही थी?



यह खबर क्यों जरूरी है?

यह मामला सिर्फ एक नगर पालिका चुनाव तक सीमित नहीं है। यह सीधे तौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राज्य के जिम्मेदार व्यवहार से जुड़ा है। बेंच हंटिंग जैसी प्रवृत्ति अगर राज्य स्तर पर देखी जाए तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित न्याय की समानता के सिद्धांत पर सीधा प्रहार है।



जब मुख्य सचिव जैसे उच्च पदाधिकारी डेढ़ माह में फैसला नहीं ले सकते और अदालत में बार-बार समय मांगा जाता है, तो यह शासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। आम नागरिक के लिए यह समझना जरूरी है कि न्यायालय की प्रक्रिया से खिलवाड़ की कोशिश किसी भी स्तर पर हो, उसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।



अदालत की सख्ती के मायने

अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि न्याय प्रक्रिया को 'फुटबॉल' नहीं बनाया जा सकता। सरकार की टालमटोल की नीति को देखते हुए, न्यायमूर्ति ने एक ऐसा आदेश पारित किया जो भविष्य के लिए मिसाल बनेगा।



लंबी तारीख का दंड: सरकार ने दो सप्ताह मांगे थे, लेकिन अदालत ने मामले को सीधे 13 जुलाई 2026 के सप्ताह के लिए टाल दिया।


अध्यक्ष पद पर रोक जारी: 08.10.2025 का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा, यानी रेनू गर्ग जुलाई तक अध्यक्ष के रूप में कार्य नहीं कर पाएंगी।


मेंशन मेमो पर सख्त प्रतिबंध: अदालत ने किसी भी प्रकार की 'तत्काल सुनवाई' (Urgent Hearing) के रास्ते बंद कर दिए हैं।



3 वोटों से जीती थी अध्यक्ष का चुनाव

वर्ष 2022 में हुए श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार रेणु गर्ग ने निर्दलीय उम्मीदवार सुमेर सिंह को हराकर जीत हासिल की थी।



इस चुनाव के प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:

जीत का अंतर: रेणु गर्ग ने सुमेर सिंह को 3 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था।



किसे कितने वोट मिले:

रेणु गर्ग (BJP): उन्हें कुल 13 वोट मिले थे।



सुमेर सिंह (निर्दलीय): उन्हें 10 वोट प्राप्त हुए थे।



विवाद का कारण

चूंकि श्योपुर नगर पालिका में कुल 23 पार्षद हैं, इसलिए अध्यक्ष पद के लिए हुए मतदान में समीकरण काफी रोचक थे। इसी चुनाव के बाद सुमेर सिंह ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया में कानूनी नियमों (विशेषकर राजपत्र में प्रकाशन) की अनदेखी की गई है।



यही वह 3 वोटों की हार-जीत का मामला है जो अब हाईकोर्ट में "गजट नोटिफिकेशन" और "अधिकारियों की कार्यप्रणाली" को लेकर एक बड़े कानूनी संकट में बदल गया है।



FAQ

  1. श्योपुर नगर पालिका चुनाव विवाद क्या है?
    श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष रेनु सुजीत गर्ग के निर्वाचन को चुनौती देते हुए सुमेर सिंह ने ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव का नोटिफिकेशन ही नहीं हुआ था। हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2025 को गर्ग के किसी भी प्रशासनिक फैसले पर रोक लगा दी। यह मामला अब भी सिंगल बेंच में चल रहा है और अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय है।
  2. बेंच हंटिंग क्या होती है और यह गलत क्यों है?
    बेंच हंटिंग वह प्रक्रिया है जिसमें वादी या वकील किसी खास जज या पीठ के सामने अपना मामला सुनवाने की कोशिश करते हैं ताकि अनुकूल फैसला मिल सके। इसे फोरम शॉपिंग भी कहते हैं। यह न्यायिक नैतिकता के खिलाफ है और इससे न्याय की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने मप्र सरकार की दो हफ्ते की स्थगन मांग को इसी की श्रेणी में माना।
  3. इस मामले में कौन-कौन से बड़े अधिकारी फंसे हैं?
    इस विवाद में मप्र के मुख्य सचिव अनुराग जैन, चंबल संभाग आयुक्त सुरेश कुमार, मौजूदा श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा और तत्कालीन श्योपुर कलेक्टर व रिटर्निंग ऑफिसर शिवम वर्मा (अब इंदौर कलेक्टर) सहित कई शासकीय अधिवक्ता शामिल हैं। कोर्ट ने चंबल आयुक्त की व्यक्तिगत पेशी भी लगाई थी और श्योपुर कलेक्टर के व्यवहार की जांच का संकेत भी दिया है।


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