कान्ह टनल परियोजना 70% पूरी, कान्ह का पानी अब सीधे गंभीर डैम में जाएगा

Jitendra Shrivastava | Jun 15, 2026, 16:19 IST
Photograph: (thesootr)
UJJAIN. उज्जैन में 919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन परियोजना का 70% काम पूरा। 100 मीटर गहरी 12 किमी टनल से कान्ह का पानी अब शिप्रा की जगह गंभीर डैम जाएगा। 2027 तक पूरा होगा काम।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • शिप्रा होगी साफ, कान्ह का पानी बदलेगा रास्ता।
  • 919 करोड़ की सुरंग, शिप्रा को मिलेगी नई जिंदगी।
  • 100 मीटर गहरी टनल से बचेगी मोक्षदायिनी शिप्रा।
  • 2028 सिंहस्थ से पहले भक्तों को मिलेगी शुद्ध शिप्रा।
  • कान्ह नदी की विदाई, शिप्रा की वापसी शुरू।

उज्जैन की शिप्रा नदी को साफ करने के लिए 919 करोड़ रुपए की एक बड़ी परियोजना चल रही है। इस योजना में जमीन के 100 मीटर नीचे 12 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है।



कान्ह नदी का गंदा पानी अब शिप्रा में नहीं मिलेगा, बल्कि सीधे गंभीर डैम पहुंचेगा। इस काम का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। 2027 तक यह परियोजना पूरी होने का लक्ष्य है।



शिप्रा क्यों हो रही थी गंदी

उज्जैन में शिप्रा नदी की बात होती है तो मन में श्रद्धा और आस्था का भाव आता है। यहां के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जितनी पूजनीय यह नदी भी है। लेकिन पिछले कई सालों से इसका पानी साफ नहीं रह पाया।



वजह थी कान्ह नदी। कान्ह का दूषित पानी सीधे शिप्रा में आकर मिल जाता था। इससे भक्त नदी की हालत देखकर दुखी होते थे। खासकर सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती थी।



क्या है यह परियोजना

इस समस्या का हल निकाला गया कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना से। इस योजना में कान्ह नदी का पानी शिप्रा में आने से पहले ही रोक लिया जाएगा। इसे जमीन के नीचे से एक लंबी सुरंग के रास्ते गंभीर डैम तक पहुंचाया जाएगा।



त्रिवेणी घाट के पास जमालपुरा गांव में एक स्टापडैम बनाया जाएगा। यहां से कान्ह का पानी रोका जाएगा। फिर यह पानी 30.15 किलोमीटर दूर सिंगवाड़ा में गंभीर नदी के डैम तक पहुंचाया जाएगा।



100 मीटर गहरी सुरंग का काम

इस पूरी परियोजना की सबसे खास बात है इसकी भूमिगत सुरंग। जमीन से 100 मीटर नीचे करीब 12 किलोमीटर लंबी यह सुरंग बनाई जा रही है। सुरंग का व्यास 5 मीटर से ज्यादा है।



यह काम हैदराबाद के विशेषज्ञों की टीम की देखरेख में हो रहा है। अभी तक इस सुरंग का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 2027 तक इसे पूरी तरह तैयार कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।



सीमेंट की पाइपलाइन भी बनेगी

सुरंग के अलावा इस परियोजना में 18.5 मीटर लंबी डी आकार की सीमेंट की बॉक्सनुमा पाइपलाइन भी बिछाई जा रही है। यह पाइपलाइन पानी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करेगी।



कान्ह नदी के दोनों छोर पर 140-140 मीटर की खुली नहर यानी ओपन चैनल भी बनाई जा रही है। यह पूरा ढांचा मिलकर कान्ह के पानी को शिप्रा से बिल्कुल अलग कर देगा।



शिप्रा में कहां मिलेगा यह पानी

कान्ह का पानी डायवर्ट होने के बाद एक लंबा सफर तय करेगा। यह पानी सिंगवाड़ा से शुरू होकर असलोदा, तुम्बावड़ा, सुर्जखेड़ी, गुधा, रूपाखेड़ी, कनार्वद, सर्वाना और उन्हेल से होकर गुजरेगा।



आखिर में यह बरखेड़ा मदन गांव में मेलेश्वर महादेव मंदिर के पास शिप्रा नदी में जाकर मिलेगा। यानी यह पानी अब शिप्रा के उस हिस्से में मिलेगा जहां उज्जैन शहर नहीं है। इससे शहर के अंदर शिप्रा का पानी साफ रहेगा।



2028 के सिंहस्थ से पहले मिलेगा लाभ

जानकारों के मुताबिक यह पूरी परियोजना इंदौर और सांवेर की 2052 तक की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यानी यह सिर्फ आज की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जरूरत का भी ख्याल रखती है।



सबसे बड़ी राहत यह है कि सिंहस्थ 2028 से पहले यह परियोजना चालू हो जाएगी। इससे करोड़ों श्रद्धालु शुद्ध शिप्रा में स्नान कर सकेंगे। उज्जैन आने वाले भक्तों की यह सबसे बड़ी चाहत पूरी होगी।



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