शिवपुरी में भाजपा नेताओं पर हमला: कुर्सियां टूटीं, बोतलें चलीं, पर FIR गायब!

Ramanand Tiwari | Feb 01, 2026, 22:36 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में भाजपा नेताओं पर रैली के दौरान हमला हुआ, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत मौजूद थे

NEWS IN SHORT

  • शिवपुरी के करैरा कस्बे में भाजपा नेताओं पर हमला हुआ, कुर्सियां तोड़ी गईं।
  • विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बोतलें फेंकी और नारेबाजी की, 'भाजपा मुर्दाबाद'।
  • भाजपा नेताओं ने एफआईआर दर्ज कराने में देर की, पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
  • पुलिस सहायता केंद्र के पास हुई घटना, बावजूद इसके कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
  • शिवपुरी एसपी ने कहा, अब तक शिकायत नहीं मिली, दोषियों पर कार्रवाई होगी।

NEWS IN DETAIL

मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में यूजीसी कानून के विरोध के बीच भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर खुलेआम हमला हुआ। कुर्सियां तोड़ी गईं, बोतलें फेंकी गईं, लाठी चली और नेता जान बचाकर भागे। हैरानी की बात यह रही कि सुबह से हुई इस घटना पर रात 8:30 बजे तक कोई भी भाजपा नेता थाने शिकायत दर्ज कराने नहीं पहुंचा।



अब सवाल उठ रहा है-क्या भाजपा वोट बैंक के डर से पीछे हट रही है? यह पूरा बवाल शिवपुरी जिले के करैरा कस्बे में हुआ। प्रदेश भाजपा के निर्देश पर एक स्थान पर बैठकर बजट भाषण का लाइव प्रसारण सुना जा रहा था। कार्यक्रम एसडीओपी कार्यालय से सटे पुलिस सहायता केंद्र पर चल रहा था। उसी वक्त निकली रैली और बिगड़ गया माहौल



इसी दौरान यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण समाज की रैली वहां से गुजरी। शुरुआत में रैली शांतिपूर्ण बताई जा रही थी, लेकिन अचानक स्थिति बदल गई। भीड़ में से पानी की बोतलें फेंकी गईं। कुर्सियां तोड़ी गईं। माइक छीनकर नारेबाजी हुई। ‘भाजपा मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए



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भाजपा के वरिष्ठ नेता भी नहीं बचे

कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत मौजूद थे। एक बोतल सीधे उन्हें भी लगी। हालात बिगड़ते देख उन्हें सुरक्षा कारणों से मंच छोड़ना पड़ा।



कुर्सियां टूटीं, भगदड़ मची

प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में लगभग आधा सैंकड़ा कुर्सियां तोड़ दीं। पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। नेता और कार्यकर्ता अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए।



पुलिस मौके पर थी, फिर भी बवाल क्यों?

सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर है। घटना स्थल-पुलिस सहायता केंद्र एसडीओपी कार्यालय से सटा हुआ। मौके पर टीआई खुद मौजूद इसके बावजूद इतना बड़ा उपद्रव हुआ और पुलिस उसे तुरंत नहीं रोक सकी।



भाजपा का आरोप: पुलिस देखती रही

भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने साफ आरोप लगाया-“पुलिस सब देखती रही। कुर्सियां तोड़ी जाती रहीं, डंडे फेंके जाते रहे, मारपीट होती रही। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”फिर भी FIR क्यों नहीं? यही सबसे चौंकाने वाली बात है। सुबह से हुई इस पूरी घटना पर- रात 8:30 बजे तक



कोई भाजपा नेता थाने शिकायत दर्ज कराने नहीं पहुंचा

जब जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव से सवाल पूछा गया तो जवाब मिला-“मैं पता करता हूं।” वोट बैंक की राजनीति या दबाव? अब बड़ा सवाल यही है-क्या भाजपा नेता वोट बैंक के डर से पीछे हट गए? क्या इसलिए FIR दर्ज नहीं कराई जा रही? और उसी के चलते पुलिस पर आरोप लगाकर मामला छोड़ा जा रहा है?



नरवर में भी उत्पात, दुकानें तोड़ी गईं

यूजीसी विरोध का असर सिर्फ करैरा तक सीमित नहीं रहा। नरवर कस्बे में-एक कुशवाह समाज की दुकान का सामान फेंका गया मारपीट की गई। जबरन बाजार बंद कराया गया। जबकि पहले से 1 तारीख को बंद की घोषणा हो चुकी थी।



पुलिस की तैयारी पर भी सवाल

जब प्रशासन को पहले से जानकारी थी-यूजीसी के विरोध में बंद रहेगा तनाव की आशंका थी। तो फिर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद क्यों नहीं रही?



SP का बयान: अभी तक कोई शिकायत नहीं शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने बताया-“अब तक कोई एफआईआर दर्ज कराने नहीं आया है। कुर्सी तोड़ने वालों की पहचान की जा रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”



भाजपा का दूसरा पक्ष: भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने यह भी कहा-ऊपरी क्षेत्र में विरोध की कोशिश नाकाम रही,पुलिस मुस्तैदी के चलते स्थिति संभली। यूजीसी विरोधियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा मामला शांतिपूर्ण तरीके से निपटाया गया।



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सवाल भाजपा और पुलिस दोनों पर

शिवपुरी की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं-नेता पिटे, कुर्सियां टूटीं, फिर भी FIR नहीं पुलिस मौजूद थी, फिर भी बवाल हुआ क्या वोट बैंक के कारण सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे? फिलहाल जवाब आने बाकी हैं, लेकिन खामोशी खुद बहुत कुछ कह रही है। इनका कहना जब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह जाटव को मोबाइल लगाया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्हें वॉट्सऐप भी किया गया लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया।



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