पापा दर्द से तड़पते रहे, डॉक्टर PUBG खेलते रहे: मौत के बाद बेटे ने रोते हुए बनाया वीडियो

Amresh Kushwaha | Aug 16, 2026, 10:26 IST
शिवपुरी में इलाज न मिलने से मरीज की मौत
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर करते समय एक मरीज की रास्ते में मौत हो गई। बेटे ने डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया। एंबुलेंस देर से मिलने का भी दावा किया। मेडिकल कॉलेज ने बेड फुल होने की बात कही है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर करते समय मरीज की मौत हो गई।
  • मृतक हरिराम प्रजापति की उम्र 50 वर्ष थी और वे खनियाधाना क्षेत्र के रहने वाले थे।
  • बेटे अरुण ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।
  • अरुण का दावा है कि एंबुलेंस देर से पहुंची और रफ्तार भी धीमी रही।
  • मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि उस समय सभी बेड फुल थे।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक मरीज की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मृतक का नाम हरिराम प्रजापति था। उनकी उम्र 50 साल थी। वे खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव के रहने वाले थे। उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर किया गया था। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मौत के बाद उनके बेटे अरुण प्रजापति ने पिता के शव के पास बैठकर एक वीडियो बनाया। इस वीडियो में उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए।



कैसे बिगड़ी थी तबीयत

अरुण के मुताबिक उनके पिता के पैरों में तेज दर्द था। उनका मुंह भी ठीक से नहीं खुल पा रहा था। दोपहर के समय अचानक उनकी हालत बिगड़ी। परिवार उन्हें तुरंत खनियाधाना के सरकारी अस्पताल ले गया। वहां कुछ घंटे इलाज चला। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। परिवार तुरंत उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा।



231223f7-902


बेटे का आरोप, स्टाफ मोबाइल में गेम खेलता रहा

अरुण का कहना है कि रात में मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद भी उनके पिता का सही इलाज नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीज पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल में PUBG गेम खेल रहे थे। जब परिवार ने बार बार इलाज के लिए कहा, तब जाकर उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया। यह आरोप फिलहाल सिर्फ बेटे के बयान पर आधारित है।



एंबुलेंस को लेकर भी उठे सवाल

अरुण ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार सुबह करीब साढ़े चार बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया गया था। लेकिन एंबुलेंस करीब 6 बजे पहुंची। यानी डेढ़ घंटे की देरी हुई। परिवार का कहना है कि इस देरी में मरीज की हालत और बिगड़ती गई। समय पर एंबुलेंस मिलती तो शायद स्थिति अलग होती।



रास्ते में भी नहीं बढ़ाई गई रफ्तार

अरुण के मुताबिक जब एंबुलेंस ग्वालियर के लिए रवाना हुई, तब उन्होंने चालक से गाड़ी तेज चलाने को कहा। लेकिन चालक ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार में गाड़ी चलाने से मना कर दिया। परिवार का कहना है कि इस वजह से भी कीमती समय बर्बाद हुआ। रास्ते में ही हरिराम की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।



ग्वालियर पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

सुबह करीब 7:30 बजे एंबुलेंस ग्वालियर पहुंचने वाली थी। लेकिन इससे पहले ही रास्ते में हरिराम प्रजापति की मौत हो गई। परिवार के लिए यह सफर आखिरी साबित हुआ। बेटे ने पिता को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन समय पर सही इलाज नहीं मिल सका। मौत के बाद पूरे परिवार में गम और गुस्सा दोनों देखा गया।



बेटे ने की जांच और कार्रवाई की मांग

वीडियो में अरुण ने साफ कहा कि उनके पिता की मौत के लिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और एंबुलेंस व्यवस्था जिम्मेदार है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की है। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।



मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

मामले में मेडिकल कॉलेज अधीक्षक आशुतोष चौरसी ने भी अपनी बात रखी है। उनके मुताबिक मरीज रात करीब 3 बजे रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उस वक्त अस्पताल के सभी बेड फुल थे। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद ही उसे ग्वालियर रेफर करने का फैसला लिया गया।



दोनों पक्षों की अलग अलग बातें

इस मामले में परिवार और अस्पताल प्रबंधन की बातें अलग अलग हैं। बेटे का आरोप है कि इलाज में लापरवाही हुई। स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया और एंबुलेंस भी देर से मिली। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बेड न होने के कारण मरीज को रेफर किया गया। प्राथमिक इलाज दिया जा चुका था। दोनों पक्षों के बयान अलग अलग होने से मामला उलझा हुआ है।



अब जांच से सामने आएगी सच्चाई

अब यह जांच का विषय है कि मरीज मेडिकल कॉलेज में ठीक किस समय पहुंचा था। यह भी देखना होगा कि उसे कौन सा प्राथमिक उपचार दिया गया। रेफर करने का सही चिकित्सकीय कारण भी सामने आना जरूरी है।



एंबुलेंस के लिए कॉल कब हुई और वह असल में कब पहुंची, यह भी जांच का हिस्सा होगा। इन सभी तथ्यों और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही लापरवाही के आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी। परिवार को उम्मीद है कि जांच में निष्पक्ष कार्रवाई होगी।



ये खबरें भी पढ़िए...



शिवपुरी में अदाणी डिफेंस प्लांट का शिलान्यास, मिसाइल और हाईटेक हथियार बनेंगे



शिवपुरी में माइनिंग इंस्पेक्टर ने युवक को जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल



बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल! SC की सख्ती, कार-बाइक के बीमा नियम भी बदले



शादी से पहले प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का नया ट्रेंड, आखिर क्यों हो रही ये सीक्रेट जांच



Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • मेडिकल कॉलेज
  • अस्पताल प्रबंधन
  • PUBG