111 करोड़ की सीवरेज योजना फेल, हाईकोर्ट सख्त; पूर्व ईडी को बनाया पक्षकार
समझें क्या है पूरा मामला...
- 111 करोड़ की सीवरेज योजना फेल, हाईकोर्ट सख्त हुआ।
- पूर्व अफसर को बनाया पक्षकार, मांगा जवाब कोर्ट ने।
- गंदा पानी झीलों में, वन्यजीवों पर मंडराया खतरा।
- सात दिन में कार्रवाई करो, कोर्ट का अल्टीमेटम।
- करोड़ों खर्च फिर भी सीवरेज लाइन पूरी तरह फेल।
शिवपुरी की सीवरेज योजना पर 111 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसके बावजूद यह योजना पूरी तरह विफल साबित हुई। गंदा पानी सीधे झीलों में जा रहा है। हाईकोर्ट ने पूर्व ईपीसीओ अधिकारी अलका उपाध्याय को पक्षकार बनाया है। दोषी अफसरों पर कार्रवाई के लिए सात दिन की मोहलत दी गई है।
झीलों में पहुंच रहा गंदा पानी
शिवपुरी शहर का सीवरेज नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा। इसकी वजह से गंदा पानी सीधे झीलों में जा रहा है। यह पानी जाधव सागर और साख्या सागर झील में पहुंच रहा है। दोनों झीलें माधव नेशनल पार्क के अंदर हैं। इससे जलीय जीवों और वन्यजीवों पर खतरा बढ़ गया है।
हाईकोर्ट ने की तीखी टिप्पणी
जस्टिस जीएस अहलुवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने यह मामला सुना। कोर्ट ने कहा कि यह खराब प्लानिंग का साफ उदाहरण है। घटिया निर्माण और सरकारी धन की बर्बादी भी सामने आई। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया।
पूर्व अधिकारी को बनाया पक्षकार
हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ कीसुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी। बताया गया कि तत्कालीन ईपीसीओ (EPCO – Environmental Planning and Coordination Organisation) की कार्यपालन निदेशक अलका उपाध्याय अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। वे 31 मई 2026 को रिटायर हुई थीं। इसके बावजूद कोर्ट ने उन्हें प्रतिवादी क्रमांक आठ बनाया है।
मांगा गया हलफनामा
कोर्ट ने अलका उपाध्याय से जवाब मांगा है। उनसे पूछा गया है कि अधूरी परियोजना को मंजूरी किस आधार पर दी गई। इसके लिए उन्हें हलफनामा देना होगा। यह पूरी प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में होगी।
अफसरों को बचाने की आशंका
सुनवाई के दौरान माधव टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर हरिओम भी मौजूद थे। उन्होंने कोर्ट के सामने अहम बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अब तक किसी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।
सात दिन की अंतिम मोहलत
कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच में अधिकारियों को बचाने की कोशिश दिख रही है। इसके बाद कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सात दिन का समय दिया गया है। यह मोहलत माधव टाइगर रिजर्व प्रशासन को दी गई है।
यह मामला शिवपुरी में जनहित याचिका के जरिए कोर्ट पहुंचा था। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि सात दिन में क्या कार्रवाई होती है।
FAQ
- शिवपुरी सीवरेज योजना पर कितना खर्च हुआ था?
इस परियोजना पर 111 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसके बावजूद योजना पूरी तरह फेल साबित हुई है। - हाईकोर्ट ने किसे पक्षकार बनाया है?
कोर्ट ने पूर्व ईपीसीओ अधिकारी अलका उपाध्याय को पक्षकार बनाया है। उनसे परियोजना की मंजूरी पर जवाब मांगा गया है। - कोर्ट ने कितने दिन की मोहलत दी है?
कोर्ट ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए सात दिन की मोहलत दी है। यह समय माधव टाइगर रिजर्व प्रशासन को दिया गया है।
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