शिवराज सिंह चौहान ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ 35 वर्षों के अनुभवों पर लिखी किताब अपनापन
भोपाल. केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर किताब लिखी है। इसका शीर्षक है अपनापन। शिवराज ने इस किताब में नरेंद्र मोदी के साथ बिताए 35 वर्षों की दास्तां लिखी है। साथ ही अपने अनुभव साझा किए हैं।
शिवराज सिंह ने 14 मई को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी इस पुस्तक अपनापन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, था कि यह कृति पीएम मोदी के साथ तीन दशक से अधिक के निकट सहयोग, संगठनात्मक जीवन, जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रसमर्पण के उन जीवंत अनुभवों का सार है, जिन्हें उन्होंने बहुत करीब से जिया है।
पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हुआ। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा भी शामिल हुए।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कभी-कभी जीवन में आप ऐसे व्यक्ति के साथ काम करते हैं, जिसे दुनिया एक नेता के रूप में देखती है, लेकिन आप उसमें एक साधक, एक कर्मयोगी, एक असाधारण इंसान को देखते हैं। मेरे लिए 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, यह उन 33 वर्षों को शब्दों में उतारने का प्रयास है, जिनको मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत करीब से जिया है।
लोगों ने मंचों से उन्हें भाषण करते हुए देखा है, लेकिन मैंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन भर देर रात तक काम करने के बाद भी अगली सुबह उसी ऊर्जा के साथ देश के लिए खड़ा होता है। लोग उनके निर्णय को देखते हैं, लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उनका दिल हर गरीब, हर किसान, माँ, बहन-बेटी और हर कार्यकर्ता के लिए धड़कता है।
शिवराज ने बताए संस्मरण
शिवराज ने आगे कहा, मुझे आज भी 1991 की एकता यात्रा याद है। तब कई लोग उसे राजनीतिक यात्रा के रूप में देखते थे, लेकिन मोदी जी ने उसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया। उनकी सोच स्पष्ट थी...तिरंगा श्रीनगर के लाल चौक तक ही नहीं, देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए।
तब मैंने पहली बार महसूस किया कि नेतृत्व सिर्फ भाषण से नहीं आता, नेतृत्व तपस्या से आता है, नेतृत्व अनुशासन से आता है, नेतृत्व समर्पण से आता है और सबसे ज़्यादा नेतृत्व अपनेपन से आता है।
और इसलिए मुझे लगा कि उन अनुभवों को यादों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि एक पुस्तक के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहिए और इसी सोच ने मुझे लेखक बना दिया। 'अपनापन' यह पुस्तक आपके सामने है।
भाषण से पूरे नहीं होते बड़े लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा, इस पुस्तक में संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग यह देखेंगे कि बड़े लक्ष्य केवल भाषण से पूरे नहीं होते। बड़े लक्ष्य अनुशासन, समर्पण, तपस्या और सामूहिक प्रयासों से पूरे किए जा सकते हैं।
इस पुस्तक में युवा देखेंगे कि कैसे जनता से जुड़कर, उनकी समस्या जानकर और उनको साथ लेकर मेहनत करके बदलाव लाया जा सकता है। वे लोग, जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को देख रहे हैं, इस पुस्तक में एक ऐसी झलक देखेंगे कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय परिवर्तन का वातावरण बनाया जा सकता है।
दुनिया में वे लोग, जो नरेंद्र भाई के नेतृत्व को देख रहे हैं, उनको इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व को ज्यादा निकटता से समझने का अवसर मिलेगा। इस पुस्तक 'अपनापन' में आपको सिर्फ घटनाएं नहीं, वह सोच मिलेगी जिसने देश को बदलने का साहस किया। वह अनुशासन मिलेगा, जिसने सपनों को सिद्धि में बदल दिया और वह अनुभव मिलेंगे, जो नेतृत्व को देखने के आपके नजरिये को बदल देंगे।
इस पुस्तक को पढ़ते समय अगर आपने यह महसूस किया कि देश बदलने के लिए बड़े पद नहीं, बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो मैं मानूंगा कि मेरा प्रयास सार्थक हुआ।
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