News Strike : शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के मुनाफे पर क्या कहा, कांग्रेस ने क्यों साधा निशाना?
News Strike. मध्यप्रदेश के किसान पुत्र और देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की इनकम पर झूठ बोल रहे हैं। ये मेरा दावा नहीं है ये एक सवाल है। जब किसी सेंटेंस को लिखा जाता है तो क्वश्चनमार्क या फुल स्टॉप जैसे पंचुएशन्स देखकर उस वाक्य का भाव समझा जा सकता है, पर बोलते हुए अक्सर भाव समझने में गलती हो जाती है। इसलिए मैं ये क्लियर कर रहा हूं कि ये एक सवाल है, जो पूछना बेहद जरूरी है क्योंकि मामला किसानों से... हमारे देश के अन्नदाता से जुड़ा है। ये सवाल भी इसलिए उठा क्योंकि कांग्रेस ने एक पोल किया, जो शिवराज के किसानों पर दिए एक बयान से जुड़ा है। इस पोल में सोशल मीडिया यूजर्स ने शिवराज के खिलाफ जमकर वोट किया है और उनके बयान को झूठा भी बताया है।
किसान पुत्र शिवराज के पास कृषि मंत्रालय
शिवराज सिंह चौहान जब तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब तक किसान पुत्र बनकर खूब लाइमलाइट बटोरते रहे। कलफदार कुर्ता और उस पर अक्सर नेहरू जैकेट पहनकर शिवराज ने जमीन से जुड़े नेता की इमेज को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके पुराने भाषण आपको याद हों तो ये जुमला जरूर जानते होंगे कि मैं किसान का बेटा हूं। 18 साल प्रदेश के मुखिया रहते हुए शिवराज ने कई बार खुद को किसान का बेटा या किसान पुत्र कहकर संबोधित किया।
ये भी क्या इत्तेफाक है कि केंद्र सरकार में भी उनको कृषि मंत्रालय का ही जिम्मा मिला. रक्षा मंत्रालय, एक्सटरनल अफेयर्स जैसे मंत्रालयों के नाम के आगे कृषि मंत्रालय सुनकर भले ही ऐसा लगे कि ये कोई मामूली मंत्रालय होगा, लेकिन ऐसा समझना एक बड़ी गलती है। जिस देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत ईंट अन्नदाता है और जिस देश का नारा ही जय जवान जय किसान है। वहां कृषि मंत्रालय की अहमियत समझी जा सकती है। इसे यूं भी समझा जा सकता है कि केंद्र सरकार ने कृषि का इस साल का बजट एक लाख 32 हजार 561 करोड़ रु. खर्च कर दिया है। इसी मंत्रालय के मुखिया हैं शिवराज सिंह चौहान।
जिनका सदन में दिया एक भाषण पिछले दिनों भी खूब वायरल हुआ था। उस भाषण का भी भरपूर एनालिसिस हमने न्यूज स्ट्राइक में आपके सामने रखा था। अगर आप मिस कर गए हों तो डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी गई लिंक पर जाकर देख सकते हैं। अब उनका एक और भाषण सोशल मीडिया पर वायरल है। इस भाषण में शिवराज सिंह चौहान किसानों की आय बता रहे हैं।
इस भाषण के बाद कांग्रेस ने एक बार शिवराज सिंह चौहान को आड़े हाथों लिया है।
शिवराज ने किया किसानों की आय बढ़ने का दावा..
आपने सुना होगा कि शिवराज बड़े जोशोखरोश के साथ ये दावा कर रहे हैं कि देश में किसानों की आय दुगनी और तिगुनी तक हो गई है। उनका ये दावा भी है कि बहुत से किसानों की आय तो आठ गुनी हो गई है। बस इसी पर कांग्रेस ने शिवराज को घेरा है। और सवालों की बौछार कर दी है। इन्हीं में से एक सवाल वो है जो मैंने आपसे शुरुआत में ही पूछा था कि क्या शिवराज किसानों की आय पर गलत बयानी कर रहे हैं। इस सवाल पर कांग्रेस ने ट्विटर पर ही एक पोल भी चलाया।
एमपी कांग्रेस ने ट्विटर हैंडल से दागे सवाल..
एमपी कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से सवाल हुआ कि क्या आप कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस बयान से सहमत हैं कि किसानों की आय 8 गुना बढ़ गई है।
जिसके तीन ऑप्शन भी दिए कि मामा झूठ बोल रहे हैं। दूसरा ऑप्शन कि मोदी चालीसा पढ़ रहे हैं और तीसरा ऑप्शन की जमीनी हकीकत अलग है। इस पोल के नतीजे हैरान करने वाले हैं। 50 फीसदी से ज्यादा लोगों ने मामा झूठ बोल रहे हैं वाले ऑप्शन को चुना है। 35 फीसदी से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो मानते हैं कि शिवराज मोदी चालीसा पढ़ रहे हैं और 13 फीसदी से ज्यादा ऐसे हैं, जिनका मानना है कि जमीनी हकीकत अलग है।
हमारी ये स्क्रिप्ट तैयार होने तक पोल का नतीजा यही था, जिस पर लोगों ने कई कमेंट भी किए। हम ये भी मान सकते हैं कि कांग्रेस का ट्विटर हैंडल है तो कांग्रेस या विपक्षी मानसिकता से जुड़े लोग ही ज्यादा रिएक्ट करेंगे। फिर भी कमेंट्स पर एक नजर डाल सकते हैं।
एक यूजर ने रिप्लाई किया कि शिवराज सिंह चौहान जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए मध्यप्रदेश कि जनता को छला है और आज केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए देश के किसानों को छल रहे हैं. भाजपा अपने नेताओं की जेब भरने में मगन हैं, जनता-किसानों से कोई सरोकार नहीं।
एक यूजर ने लिखा कि शिवराज किन किसानों की बात कर रहे हैं देश विदेश के। इस तरह के मैसेज की झड़ी लगी हुई है। शिवराज के इस बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी उन्हें घेरा है।
किसानों की सक्सेस स्टोरी सुनाएं शिवराज..
कांग्रेस को विपक्ष मानकर शिवराज भले ही अनदेखा कर दें, लेकिन क्या जनता के सवालों के जवाब नहीं दिए जाने चाहिए। जब शिवराज सिंह चौहान ने सदन में दावा किया है कि किसानों को आठ गुना तक मुनाफा हुआ है, तो क्या उन्हें ऐसे किसानों से नहीं मिलवाना चाहिए, जिन्हें वाकई कई गुना मुनाफा हुआ है। चलिए मान लिया कि आठ गुना मुनाफे वाले किसान कम हों, लेकिन तीन गुना, चार गुना या पांच गुना मुनाफा भी कुछ कम नहीं होता है। ऐसे किसानों को लोगों के सामने लाकर उनकी सक्सेस स्टोरी दिखाकर दूसरे किसानों को भी तो मोटिवेट ही किया जा सकता है। इसलिए सिर्फ आंकड़े दिखाकर या बड़ी संख्या बता कर सदन में वाहवाही बटोरने से अच्छा है कि जमकर मुनाफा कमाने वाले किसानों को सामने लाएं और विपक्ष का मुंह भी बंद कर दें।
फिलहाल शिवराज ने ये भी नहीं बताया है कि वो जिन किसानों की बात कर रहे हैं वो किस प्रदेश के किसान हैं। कौन सी फसल उगाने वाले किसान हैं, क्या कोई उनकी लोकसभा सीट का भी किसान है। क्या सारे किसान डबल इंजन सरकार वाले प्रदेशों में ही हैं। सवाल तो बहुत सारे हैं और पूछे भी जा रहे हैं। शिवराज जवाब कब तक देंगे ये तो कहा नहीं जा सकता। लेकिन मैं आपके चंद मिनट और लेकर मध्यप्रदेश के किसानों का हाल भी बताना चाहूंगा।
फरवरी में ही ये खबर आई थी कि बेमौसम बारिश, आंधी और ओलों से किसानों की फसल बुरी तरह चौपट हुई है, जिसके बाद खुद सीएम मोहन यादव ने कलेक्टरों को ये निर्देश दिए कि किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए। यानी प्रदेश सरकार तो अपने स्तर पर सारे प्रयास कर रही है।
कांग्रेस का दावा : किसानों की हालात लगातार हो रही खराब
लेकिन कांग्रेस का दावा यही है कि प्रदेश के किसानों की हालात दिन पर दिन खराब हो रहे हैं। कांग्रेस नेता सचिन यादव ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में एक न्यूज कटिंग शेयर की, जिसकी हैडिंग थी कि देश में 23 वें स्थान पर मप्र के किसान। इस न्यूज कटिंग को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि प्रदेश में किसानों के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। कमाई के मामले में वो तेईसवें स्थान पर हैं। ये बीजेपी सरकार की नाकामी का आईना है।
किसानों के धरने प्रदर्शन की खबरें भी मप्र में आम होती जा रही हैं। धार, बड़वानी, नीमच से लेकर सागर तक के किसान अलग अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। एमएसपी की मांग को लेकर जनहित पार्टी ने भी चंद घंटे पहले ही धरना शुरू किया है। खाद की किल्लत को लेकर भी किसानों की परेशानी और घंटो कतार में लगे रहने की खबरें किसी से छुपी नहीं है। आठ गुना मुनाफे का दावा करने से पहले शिवराज को ये भी बताना चाहिए कि किसानों की परेशानी और मांगों पर सरकार क्या कदम उठा रही है ताकि अन्नदाता सिर्फ आंकड़ों में उलझने की जगह राहत के तरीके हासिल कर सके।
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