एक कचौड़ी दो समोसा नारे पर बोले शिवराज सिंह चौहान, बेटियों को ऐसा नारा लगाने की नौबत क्यों आई

Sandeep Kumar | Oct 03, 2026, 23:26 IST
महिला सुरक्षा पर चर्चा: बेटियों के सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है: शिवराज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला सुरक्षा पर समाज से आत्ममंथन की अपील की है। भोपाल में नवगति कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक कचौड़ी दो समोसा नारे का जिक्र किया। शिवराज का बयान इसी सवाल पर रहा कि बेटियों को ऐसा नारा लगाने की नौबत क्यों आई। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

शिवराज की समाज से अपील

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समाज से आत्ममंथन की अपील की। यह अपील महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आई है। भोपाल में नवगति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने एक नारे का जिक्र किया। नारा है: एक कचौड़ी, दो समोसा... इन मर्दों का क्या भरोसा। शिवराज का बयान इसी सवाल पर टिका है। आखिर बेटियों को ऐसा नारा लगाने की नौबत क्यों आई? उनका कहना है कि इस पर पूरे समाज को सोचना होगा।



एक कचौड़ी दो समोसा नारा क्या है?

एक कचौड़ी दो समोसा नारा महिलाओं के बीच चर्चा में आया है। Ek Kachori Do Samosa slogan सोशल मीडिया और महिला प्रदर्शनों में भी चर्चित हुआ।



दिल्ली समेत कई जगहों पर महिला सुरक्षा से जुड़े प्रदर्शन हुए हैं। women protest Delhi की इन खबरों के बीच यह नारा चर्चा में है। नारे का सीधा सवाल पुरुषों पर भरोसे को लेकर है।



नारे की दूसरी लाइन सीधे भरोसे पर सवाल उठाती है। इन मर्दों का क्या भरोसा, यानी पुरुषों पर यकीन का सवाल। शिवराज ने इसी सवाल को पकड़ा। उन्होंने इसे केवल बेटियों का नहीं, पूरे समाज के विचार का विषय बताया।



महिला सुरक्षा पर शिवराज का बयान

Shivraj Singh Chouhan केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। वे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं। women safety पर उन्होंने समाज से गंभीरता से सोचने की अपील की। उन्होंने पूछा कि बेटियों को ऐसे नारे लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।



बेटियों का नहीं, पूरे समाज का सवाल

"यह केवल बेटियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए विचार करने का विषय है।"



– शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री



शिवराज ने कहा कि समाज को यह सोचना होगा कि ऐसी स्थिति क्यों बनी। आज बेटियों को भरोसे पर सवाल उठाने वाला नारा लिखना और बोलना पड़ रहा है।



समाज किस दिशा में जा रहा है?

शिवराज ने समाज की स्थिति पर बात रखी। कई बार जान-पहचान के लोग ही बेटियों को गलत नजर से देखते हैं। ऐसी घटनाओं से सवाल उठता है कि समाज को आखिर क्या हो गया है। यह बात उन्होंने नवगति कार्यक्रम में कही। वहां मौजूद लोगों के सामने उन्होंने समाज को सोचने का संदेश दिया।



बेटियों की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?

उन्होंने कहा कि बहन-बेटियों का मान-सम्मान केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। उनकी सुरक्षा भी पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यानी बेटियों की सुरक्षा में समाज के हर हिस्से की भूमिका है।



पुरुष, माता-पिता और युवाओं से अपील

शिवराज ने पुरुषों, माता-पिता और युवाओं से भी इस विषय पर सोचने को कहा। उनका कहना था कि बेटियां ही पुरुषों पर अविश्वास करने लगेंगी। तब सामाजिक रिश्तों और विश्वास की बुनियाद पर सवाल खड़े होंगे। सोचिए एक बार।क्या बेटियों का भरोसा लौटाना सबकी जिम्मेदारी नहीं है?



बेटियों का सम्मान नैतिक जिम्मेदारी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समाज को संकल्प लेना चाहिए। यह संकल्प बेटियों और माताओं के सम्मान का होना चाहिए। समाज महिलाओं के अधिकारों की रक्षा भी करे।



उन्होंने बेटियों को देवी के समान सम्मान देने की बात कही। महिलाओं को मां के समान सम्मान देने की सामाजिक भावना पर भी जोर दिया। उनके संबोधन के दौरान सभाकक्ष तालियों से गूंज उठा।



मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई

कार्यक्रम में शिवराज ने खेलों में देश का नाम रोशन करने वालों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक देश के बेटे-बेटियां पदक जीत रहे हैं। इससे भारत का मान बढ़ रहा है। उन्होंने सभी पदक विजेताओं को बधाई दी।



समाज को जागने की जरूरत क्यों?

शिवराज ने कहा कि समाज को अब जागना होगा। उन्होंने बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की जिम्मेदारी निभाने की बात कही। ये तीन शब्द उनके संबोधन का सार रहे: सम्मान, सुरक्षा और अधिकार।



शिवराज का बयान ऐसे समय आया है। यह नारा दिल्ली समेत कई जगहों पर चर्चा में है। इस पूरे मामले में तीन बातें साफ हैं। पहली, नारा चर्चा में है। दूसरी, केंद्रीय मंत्री ने उस पर सवाल उठाया। तीसरी, उन्होंने समाज से जिम्मेदारी निभाने को कहा।



कैसे आया ये नारा ?

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर दिल्ली में कई जगह प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के नारों ने इंटरनेट पर भी लोगों का ध्यान खींचा था। खासकर ‘एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा’ खूब वायरल हुआ था। महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर महिलाओं ने अपनी आवाज उठाई थी। असहमति और प्रदर्शन की लोकतांत्रिक परंपरा के बीच यह आक्रोश सामने आया था। बिहार से लेकर दिल्ली तक उस दौरान सामने आई घटनाओं ने महिलाओं को आक्रोशित किया था। दिल्ली के प्रदर्शनों में लगे नारों के बाद इंटरनेट पर भी स्लोगन बैटल शुरू हो गई थी।

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