MP में खास होगी जन्माष्टमी, 55 जिलों में 1500 कलाकार देंगे कृष्ण लीला की प्रस्तुति
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण पर्व का राज्य स्तरीय आयोजन होगा।
- प्रदेश के 55 जिलों में 111 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
- 7500 से ज्यादा श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट की जाएगी।
- 1500 से अधिक कलाकार कृष्ण लीलाओं और भक्ति की प्रस्तुति देंगे।
- मुख्यमंत्री निवास में बच्चों के साथ जन्मोत्सव और मटकी फोड़ होगा।
55 जिलों में होगा आयोजन
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मध्यप्रदेश में बड़ा आयोजन होगा। 4 सितंबर को प्रदेशभर में श्रीकृष्ण पर्व मनाया जाएगा। इस आयोजन को जन-जन का पर्व बनाने की तैयारी है। इस बार आयोजन का दायरा पहले से ज्यादा रखा गया है।
संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास ने तैयारी की है। आयोजन की थीम ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ रखी गई है।
इसके तहत प्रदेश के 55 जिलों को जोड़ा गया है। 111 स्थानों पर अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास विभाग इसकी निगरानी करेगा। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने जानकारी दी। उन्होंने आयोजन को संस्कृति और आस्था से जोड़कर बताया। कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों की बड़ी भागीदारी होगी।
7500 मंदिरों में खास सजावट
श्रीकृष्ण पर्व के दौरान मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। प्रदेश के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिर शामिल होंगे।
इन मंदिरों में जन्मोत्सव का विशेष माहौल बनाया जाएगा। साज-सज्जा के साथ धार्मिक कार्यक्रम भी होंगे।
इस पहल का उद्देश्य पर्व को घरों तक पहुंचाना है। मंदिरों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम होंगे। भजन, लोकगायन और नृत्य की प्रस्तुतियां भी होंगी। कई जगह कृष्ण की बाल लीलाओं को मंच पर दिखाया जाएगा।
1500 कलाकार देंगे प्रस्तुति
श्रीकृष्ण पर्व की खास बात कलाकारों की भागीदारी है। प्रदेश के 1500 से ज्यादा कलाकार इसमें शामिल होंगे। ये कलाकार अलग-अलग जिलों से कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। कृष्ण जीवन से जुड़े प्रसंग मंच पर दिखाए जाएंगे।
नृत्य-नाटिका, रासलीला और भजन प्रमुख आकर्षण होंगे। लोकगायन के जरिए भी कृष्ण भक्ति को प्रस्तुत किया जाएगा। कई जगह शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां भी होंगी। इन कार्यक्रमों में स्थानीय सांस्कृतिक परंपराएं भी दिखेंगी।
खरगौन से लेकर मंडला तक कलाकार कार्यक्रम करेंगे। रीवा, सतना और सिंगरौली में भी प्रस्तुतियां होंगी। उज्जैन, धार और रायसेन में विशेष आयोजन होंगे। झाबुआ, नीमच और मंदसौर भी आयोजन से जुड़ेंगे।
मुख्यमंत्री निवास में खास कार्यक्रम
प्रदेशव्यापी आयोजन का प्रमुख कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास में होगा। यहां श्रीकृष्ण की कलाओं और परंपराओं पर कार्यक्रम होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम भी होगा। यह कृष्ण की बाल लीलाओं की झलक पेश करेगा।
मुख्यमंत्री निवास पर 101 से ज्यादा बच्चे शामिल होंगे। बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में नजर आएंगे। इससे आयोजन में बच्चों की भी भागीदारी सुनिश्चित होगी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को उपहार देंगे। बच्चों को माखन मिश्री और लड्डू गोपाल की मूर्ति मिलेगी। उन्हें कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित पुस्तक भी मिलेगी। यह पहल बच्चों को कृष्ण की कथाओं से जोड़ने वाली है।
नारायणा धाम में पांच दिन
उज्जैन के नारायणा धाम में विशेष आयोजन होगा। यह कार्यक्रम 2 से 6 सितंबर तक चलेगा। हर दिन शाम सात बजे कार्यक्रम शुरू होगा। यहां पांच दिनों तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। नारायणा धाम का संबंध कृष्ण और सुदामा की मित्रता से है। पांच दिनों रासलीला भी प्रस्तुत की जाएगी।
सांदीपनि आश्रम में कृष्ण कथा
उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भी आयोजन होगा। यहां कार्यक्रम 2 से 4 सितंबर तक चलेंगे। हर दिन शाम चार बजे प्रस्तुतियां शुरू होंगी। कार्यक्रम में ‘कर्षति इति कृष्ण’ की प्रस्तुति होगी। इसके साथ भजन और बघेली लोकगायन होगा। तीसरे दिन कृष्ण की शिक्षा पर नृत्य-नाटिका होगी। यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा की झलक देगा।
पन्ना और अमझेरा में आयोजन
पन्ना में बलदेवजी मंदिर परिसर में कार्यक्रम होगा। 2 सितंबर को बलदेव और कृष्ण प्रसंग दिखाया जाएगा। इसके साथ भजन गायन भी होगा। धार के अमझेरा में भी खास कार्यक्रम होंगे। यहां 3 और 4 सितंबर को आयोजन होगा। अमझेरा को कृष्ण और रुक्मिणी प्रसंग से जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे आयोजन में विशेष स्थान मिला है।
जानापाव में दिखेगा खास प्रसंग
महू के जानापाव में 4 सितंबर को कार्यक्रम होगा। यहां शाम चार बजे सांस्कृतिक प्रस्तुति शुरू होगी। कार्यक्रम भगवान परशुराम और कृष्ण से जुड़ा होगा। इसमें सुदर्शन चक्र देने का प्रसंग दिखाया जाएगा। जानापाव में परशुराम श्रीकृष्ण लोक का भूमि-पूजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भूमिपूजन करेंगे।
मंत्री ने आयोजन का उद्देश्य बताया
राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने आयोजन पर बात रखी। उन्होंने कृष्ण को भारतीय जीवन दर्शन का प्रतीक बताया।
उनके अनुसार कृष्ण आस्था और भक्ति से जुड़े हैं। उन्होंने कृष्ण को मानवीय मूल्यों से भी जोड़ा। मंत्री ने मित्रता और करुणा से सीख लेने की बात कही। उन्होंने धैर्य और कर्तव्य को भी जरूरी बताया।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने मध्यप्रदेश को कृष्ण संदर्भों से जुड़ी धरती बताया। उनके अनुसार यहां पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भ मौजूद हैं। उन्होंने कृष्ण की लीलाओं को लोगों तक पहुंचाने की बात कही।
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