पुलिस से बचने शुभ्रा रंजन का अपहरण करने के बाद सुंदरकांड करने लगे थे आरोपी
दिल्ली की जानी-मानी आईएएस एकेडमी की डायरेक्टर शुभ्रा रंजन के साथ जो हुआ, उसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यह मामला किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसा लगता है, जहां एक छात्र ही अपने शिक्षक का दुश्मन बन बैठा।
इस पूरी वारदात का मुख्य आरोपी प्रियांक शर्मा नाम का एक युवक है। प्रियांक ने महीनों की मेहनत के बाद इस किडनैपिंग को अंजाम दिया।
यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे असफलता और लालच किसी इंसान को गलत रास्ते पर धकेल सकता है। आइए इस पूरी घटना को विस्तार से जानते हैं
पांच लाख का लालच देकर गिरोह बनाया
हैरानी की बात है कि प्रियांक ने पांच-पांच लाख रुपए का लालच देकर ऐसे लोगों को अपने गिरोह में शामिल किया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
इन लोगों को बंधक बनाने और धमकाने की ट्रेनिंग दी गई थी। फिरौती की रकम प्रियांक और उसके पिता के संयुक्त खाते में आई, लेकिन बैंक की छुट्टी के कारण आरोपियों को वह रकम नहीं मिल पाई थी। इसके पहले ही पुलिस ने प्रियांक और उसके पांच साथियों को पकड़ लिया।
छात्र से अपराधी बनने तक का सफर
जानकारी के अनुसार प्रियांक का आईएएस के छात्र से अपराधी बनने का सफर कोरोना के दौरान शुरू हुआ था। पुलिस कमिश्नर के अनुसार प्रियांक ने शुभ्रा रंजन की कोचिंग से यूपीएससी की तैयारी की थी। तीन बार प्रयास करने के बाद भी वह सफल नहीं हो पाया था।
प्रियांक ने अपनी जान-पहचान का फायदा उठाकर भोपाल में फ्रेंचाइजी खोलने की बात कही थी। साथ ही एमपीनगर में जगह किराए पर ली थी। 2019 में उनका सेंटर भी तैयार हो गया था।
लॉकडाउन के कारण सेंटर बंद हो गया था। इससे प्रियांक को नुकसान हुआ जानकारी के अनुसार वो इस नुकसान की भरपाई के लिए शुभ्रा पर दबाव बना रहा था।
बंधक बनाने की प्लानिंग
प्रियांक ने शुभ्रा को भोपाल आने के लिए राजी किया। साथ ही कोचिंग सेंटर के विस्तार और सेमिनार का बहाना बनाया। प्रियांक ने दिल्ली से भोपाल का टिकट और एक लग्जरी होटल में कमरा भी बुक करवाया था।
बीते बुधवार को शुभ्रा का स्वागत अच्छे से किया। साथ ही अपहरण से पहले उन्हें होटल से लेकर साइट विजिट के बहाने किराए पर लिए गए फ्लैट पर ले गया, जहां उसने उन्हें बंधक बना लिया।
ध्यान भटकाने के लिए सुंदरकांड का पाठ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गिरोह के सदस्य दीपक को साजिश के तहत मरने का नाटक करने के लिए तैयार किया गया था। उसे एक बड़े बॉक्स में मृत व्यक्ति की तरह रखा गया था।
प्रियांक ने उसे दिखाकर शुभ्रा को धमकाया और कहा कि अगर रकम नहीं दी तो उसे मार देंगे। आसपास के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए गिरोह के दूसरे सदस्य सुंदरकांड का पाठ करते रहे। आखिरकार रकम मिलने के बाद शुभ्रा को छोड़ दिया गया।
दो खातों में ट्रांसफर हुआ पैसा
पुलिस के अनुसार रकम जनकशिला सोसायटी और आरएस इंटरप्राइजेज के खातों में ट्रांसफर की गई थी। जनकशिला का खाता प्रियांक और उसके पिता के नाम पर है। वहीं, आरएस का खाता भी प्रियांक के नाम पर है।
पुलिस अब इन खातों की जांच कर रही है। साथ ही बैंक की भूमिका की भी जांच हो रही है, क्योंकि इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले शुभ्रा की फर्म से क्यों संपर्क नहीं किया गया। हालांकि बताया जा रहा है कि शुभ्रा रंजन की फर्म के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजे गए थे।
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