सिंगरौली कोयला परिवहन मामले में छह कंपनियों पर FIR के निर्देश
समझें क्या है पूरा मामला...
- सिंगरौली कलेक्टर 23 मई की सुबह से कोयला परिवहन पर रोक लगाई थी।
- इस प्रतिबंध के बावजूद कई गाड़ियां सड़कों पर कोयला और फ्लाई ऐश ढोती हुई पकड़ी गईं।
- ये वाहन सरई और बरगवां इलाके में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर चल रहे थे।
- प्रशासन ने इन कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
- कलेक्टर ने छह कंपनियों पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।
आदेश था साफ, फिर भी चलते रहे ट्रक
सिंगरौली कलेक्टर आईएएस गौरव बेनल ने 23 मई को एक सख्त आदेश जारी किया था। इसमें सड़क से कोयले की ढुलाई पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। यह आदेश 23 मई से सुबह छह बजे से 24 मई की दोपहर 12 बजे तक लागू होना था।
वहीं तय समय के बाद भी कोयले से लदे ट्रक सड़कों पर दौड़ते रहे। तहसीलदार बरगवां ने मौके पर जाकर यह देखा। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन हरकत में आया।
कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश
नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इनमें एमडीओ, टीएचडीसी (THDC), अडानी लॉजिस्टिक्स, अडानी एंटरप्राइजेज, एसीसी लिमिटेड और एमपी मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन शामिल हैं।
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स पर भी FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी कुल छह संस्थाओं को नोटिस मिले हैं। यह कार्रवाई सिंगरौली के बैन पैनल के तहत हुई है।
जांच में क्या सामने आया
दरअसल तहसीलदार बरगवां को ही कोयला परिवहन संबंधित परियोजनाओं के नोटिस देखने का काम सौंपा गया था। इसके बाद उन्होंने रिपोर्ट जमा की। इस रिपोर्ट में साफ था कि प्रतिबंध का पालन नहीं हुआ है। कलेक्टर ने इस पर तुरंत एमडीओ को जवाब मांगा, लेकिन जवाब नहीं मिला। इसके बाद FIR के निर्देश दिए गए।
FAQ
- सिंगरौली में कोयला परिवहन पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?
कलेक्टर गौरव बैनल ने 23 मई को यह आदेश जारी किया था। इसके पीछे प्रदूषण और सड़क क्षति की शिकायतें मानी जा रही हैं। आदेश 24 मई दोपहर से लागू था।
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