वीरेंद्र गोयल बने सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, आखिरकार सरकार ने जारी किया आदेश
News in Short
- वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- पूर्व अध्यक्ष को हटाने के बाद सरकार ने गोयल की नियुक्ति का आदेश जारी किया।
- फर्जी नियुक्ति पत्र वायरल होने से विवाद मचा था, द सूत्र ने मामला उठाया।
- मुख्यमंत्री और बीजेपी नेताओं ने गोयल को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी।
- प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे, लेकिन सरकार ने तुरंत कदम उठाए।
News in Detail
12 मई 2026 को मध्यप्रदेश सरकार ने वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नया अध्यक्ष नियुक्त करने का औपचारिक आदेश जारी किया। यह निर्णय पूर्व अध्यक्ष को हटाने के बाद लिया गया। सरकार इस नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर नियुक्ति पर चला आ रहा सस्पेंस भी खत्म कर दिया है।
इससे पहले 8 मई को सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष पद पर वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति का फर्जी आदेश सोशल मीडिया सहित कई जगह वायरल हुआ था। मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने बधाई भी दे दी थी। इस पत्र को लेकर द सूत्र ने पड़ताल कर सच्चाई सामने रखी थी।
यह है आधिकारिक आदेश
फर्जी नियुक्ति पत्र ने मचाया था विवाद
इससे पहले सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर एक फर्जी नियुक्ति पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे काफी भ्रम और विवाद पैदा हुआ था। 'द सूत्र' ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद यह मामला सियासी गलियारों में गरमा गया। इस फर्जी नियुक्ति पत्र की घटना ने प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
सरकार की प्रतिक्रिया और बधाई
सरकार ने इस पूरे विवाद को शांत करने के लिए तुरंत कदम उठाए। पहले तो पुराने अध्यक्ष को हटाने के आदेश जारी किए गए, इसके बाद 12 मई को नए अध्यक्ष की नियुक्ति का आधिकारिक आदेश जारी किए गए। अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव समेत बीजेपी के बड़े नेताओं ने वीरेंद्र गोयल को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी है। यह उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में सिंगरौली क्षेत्र में विकास कार्य तेज़ी से होंगे। इस नियुक्ति को सिंगरौली विकास प्राधिकरण के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है।
यह फर्जी आदेश निकला था 12 मई को
Thesootr की पड़ताल में फर्जी निकली थी चिट्ठी
Thesootr ने सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद आपको बताया था कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के लिए वीरेंद्र गोयल के नाम का पत्र अभी तक निकला ही नहीं है। बस एक पत्र वायरल हुआ और प्रदेश में लगातार हुई नियुक्तियों के बीच किसी ने इसकी सच्चाई जांचने तक की जहमत नहीं उठाई। जबकि इस चिट्ठी में ही कई झोल साफ दिख रहे थे। द सूत्र ने बताया था कि -
- आदेश को जिस डिजाइन में तैयार करवाया गया था, वह बेहद कैजुअल था।
- सबसे ऊपर आदेश के साथ फॉन्ट हिला हुआ था, जो साफ तौर पर AI या Canva जैसे टूल का कमाल था।
- सबसे बड़ी बात यह कि जिन अवर सचिव अजय कुमार सिंह के नाम से पत्र जारी हुआ है, इस नाम का कोई अधिकारी पूरे मंत्रालय में ही नहीं था।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
फर्जी नियुक्ति पत्र के वायरल होने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे थे। हालांकि, सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले को सुलझाया और गोयल की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया। अब यह मामला सुलझने के बाद विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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