लाइक्स और व्यूज बढ़ाने का जुनून, घर में सजा ली फर्जी अदालत, अब पहुंचा जेल
जबलपुर। सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज बढ़ाने का जुनून एक युवक को भारी पड़ गया। सिंगरौली में अमित तिवारी नाम के युवक ने अपने कमरे को ही फर्जी अदालत में बदल दिया। कभी वह जज की भूमिका में नजर आया तो कभी वकील बनकर बहस करता दिखाई दिया। इतना ही नहीं, वीडियो को इस तरह एडिट किया गया कि देखने वालों को यह हाईकोर्ट की कार्रवाई जैसा लगे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस तक मामला पहुंचा। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
कमरे में बनाया अदालत जैसा सेटअप
जबलपुर ASP सूर्यकांत शर्मा के मुताबिक आरोपी अमित तिवारी बैढ़न थाना क्षेत्र के पिपरा झांपी गांव का रहने वाला है। उसने अपने निजी कमरे में अदालत जैसा माहौल तैयार किया और अलग-अलग दृश्यों की रिकॉर्डिंग की। एक वीडियो में वह जज की भूमिका निभाता दिखाई दिया, जबकि दूसरे दृश्य में खुद ही वकील बनकर बहस करता नजर आया। इसके बाद इन क्लिप्स को जोड़कर ऐसा वीडियो तैयार किया गया, जिससे पूरी कार्रवाई किसी वास्तविक अदालत की सुनवाई जैसी दिखाई दे।
एडिटिंग से वीडियो को दिया हाईकोर्ट की कार्रवाई का रूप
मामला सिर्फ मजाकिया वीडियो बनाने तक सीमित नहीं था। आरोप है कि वीडियो की एडिटिंग इस तरह की गई कि उसे देखने वाले भ्रमित हो सकते थे। वीडियो में अदालत की कार्रवाई जैसा माहौल बनाया गया और इसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि इस पूरी कवायद का मकसद सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक लोगों का ध्यान खींचना था। वीडियो के जरिए लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने की कोशिश की गई।
वायरल वीडियो ने खोली पोल, पुलिस ने किया गिरफ्तार
फर्जी अदालत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी जानकारी सिविल लाइन थाना पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने वीडियो की पड़ताल शुरू की और उसमें दिखाई गई गतिविधियों की जानकारी जुटाई। जांच में वीडियो के फर्जी होने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने अमित तिवारी के खिलाफ जीरो पर एफआईआर दर्ज की और इसके बाद प्रकरण को बैढ़न थाना भेज दिया गया। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जिला सिंगरौली पुलिस कर रही है। युवक को वीडियो वायरल होने के 1 महीने बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।
लोकप्रियता के लिए कानून और संस्थाओं से खिलवाड़ पड़ा भारी
इस घटना ने सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ मिनट की लोकप्रियता के लिए बनाई गई फर्जी अदालत अब आरोपी को कानूनी कार्रवाई तक ले आई है। पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो को बिना पुष्टि के सच नहीं मानने की सलाह दी है। साथ ही न्यायपालिका जैसी संवेदनशील संस्था से जुड़ी भ्रामक सामग्री तैयार करने या प्रसारित करने के मामले में कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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