छोटे शहरों में घर हुए महानगरों से भी महंगे, पांच साल में 63% बढ़ी दरें, जानें रेट
Real Estate Home Prices: कभी छोटे शहरों को सस्ते घरों का बड़ा विकल्प माना जाता था। अब इन शहरों में प्रॉपर्टी के दाम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया और CII की नई रिपोर्ट ने यह बात साफ की है। भोपाल, इंदौर, जयपुर और लखनऊ समेत देश के 11 छोटे शहरों में साल 2021 से 2026 के बीच घरों की कीमतें 63% बढ़ी हैं।
इसके मुकाबले मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर समेत आठ महानगरों में यह बढ़ोतरी केवल 42% रही। यह रुझान बीते दस साल में भी कमोबेश ऐसा ही देखा गया है। साल 2016 से 2026 के बीच गैर-मेट्रो शहरों में मकानों की औसत कीमत हर साल करीब 8% बढ़ी।
वहीं मेट्रो शहरों में यह बढ़त सिर्फ 4% रही। डेवलपर्स की नई परियोजनाओं और एनआरआई मांग ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास भी एक बड़ी वजह रही है।
किस शहर में कितना रेट
| शहर | औसत दाम (₹ प्रति वर्ग फीट) |
|---|---|
| गोवा | 11,500-13,500 |
| चंडीगढ़ | 7,500-10,500 |
| जयपुर | 7,000-9,000 |
| भुवनेश्वर | 6,550-8,550 |
| कोयंबटूर | 6,500-8,500 |
| इंदौर | 5,500-7,500 |
| भोपाल | 5,000-7,000 |
| विशाखापत्तनम | 4,500-6,500 |
इन आंकड़ों के मुताबिक गोवा में अपार्टमेंट सबसे महंगे हैं। मध्यप्रदेश केइंदौर और भोपाल की दरें अन्य शहरों के मुकाबले अभी भी कम हैं। लेकिन बढ़त की रफ्तार यहां भी तेज बनी हुई है।
रिटेल और मॉल स्पेस में बड़ा उछाल
छोटे शहरों में मॉल और नए रिटेल स्टोर्स का ट्रेंड काफी बदला है। दूसरी कैटेगरी के शहरों में मॉल जोड़ने की रफ्तार मेट्रो से 3.1 गुना है। साल 2020 के बाद इन शहरों में बेहतर शॉपिंग सेंटर तेजी से खुले हैं। इनमें खानपान, मनोरंजन और खरीदारी के साधन एक साथ दिए जा रहे हैं।
दूसरी कैटेगरी के 24 प्रमुख शहरों में बड़े-बड़े स्टोर्स की भरमार है। यहां 37 देशों के 255 इंटरनेशनल ब्रांड्स के 1,720 से ज्यादा स्टोर्स हैं। शॉपिंग सेंटर के कुल 13.4 करोड़ वर्ग फुट में से टियर-2 का हिस्सा बढ़ा है। अब इसमें टियर-2 शहरों की हिस्सेदारी 3.6 करोड़ वर्ग फुट हो चुकी है।
ऑफिस और आईटी हब का तेजी से विस्तार
इंदौर समेत चार प्रमुख शहरों में ऑफिस स्पेस की मांग काफी बढ़ी है। कोच्चि, चंडीगढ़, जयपुर और इंदौर में 10-10 लाख वर्ग फुट ऑफिस एरिया है। भुवनेश्वर, लखनऊ, गोवा और पटना के बाजार भी अब तेजी से विकसित हो रहे हैं। यहां काम करने की कम लागत कंपनियों को आकर्षित कर रही है।
लोकल टैलेंट की मौजूदगी के कारण नई कंपनियां यहां अपने ऑफिस खोल रही हैं। आईटी, इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज से जुड़ी कंपनियां जगह तलाश रही हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय कारोबारी दफ्तरों से भी कमर्शियल स्पेस की मांग काफी बढ़ी है। इससे शहरों का आर्थिक ढांचा पहले से ज्यादा मजबूत हो रहा है।
गोदाम और लॉजिस्टिक्स में रिकॉर्ड बढ़त
छोटे शहरों में सामान रखने वाले गोदामों की मांग में तेजी आई है। 2025 में टियर-2 शहरों में 1.12 करोड़ वर्ग फुट गोदाम लीज पर लिए गए। साल 2024 में यह आंकड़ा केवल 114 लाख वर्ग फुट के आसपास ही दर्ज था।
लखनऊ 19 लाख वर्ग फुट के साथ सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स बाजार बना। नागपुर शहर में गोदामों की मांग में सीधे 204% की उछाल आई है। नागपुर का लॉजिस्टिक्स एरिया बढ़कर सीधे नौ लाख वर्ग फुट पर पहुंच गया।
ई-कॉमर्स और रिटेल बिजनेस के कारण इन गोदामों की जरूरत बहुत बढ़ी है। इस वजह से इन शहरों की कमर्शियल जमीनों के दाम भी बढ़ रहे हैं।
दाम बढ़ने की क्या है असली वजह
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इंफ्रा में सरकारी हिस्सेदारी 2015 के 39% से बढ़कर 55% हो गई है। देशभर में 17 लाख करोड़ रुपए की 852 पीपीपी प्रोजेक्ट्स तैयार हो रहे हैं। नारडेको अध्यक्ष प्रवीण जैन के अनुसार यह आर्थिक प्रगति का संकेत है।
बेहतर सड़कें, एक्सप्रेसवे, एमएसएमई और मेट्रो सिटी मेंमेट्रो कनेक्टिविटी से दाम तेजी से बढ़े हैं। अब खरीदार सुरक्षित और सुविधा युक्त प्रोजेक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।मेट्रो की आबादी वृद्धि 8.7% रहने का अनुमान लगाया गया है। जबकि टियर-2 शहरों में यह आबादी 28.2% की दर से बढ़ सकती है।
बदलती सोच और सुरक्षित लाइफस्टाइल
छोटे शहरों में अब पेशेवर, कारोबारी और एनआरआई लोग निवेश कर रहे हैं। इन लोगों की पहली पसंद बड़े और सर्वसुविधायुक्त घर बन चुके हैं। लोग अब केवल मकान नहीं बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित परिसर चाहते हैं। क्लब हाउस, पार्क और सुरक्षा वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्टार्टअप्स और एमएसएमई का बड़ा हिस्सा अब छोटे शहरों में आ रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कमाई के साधन बेहतर हुए हैं। कमाई बढ़ने से लोग अब अपने रहने के स्तर को सुधार रहे हैं। यही वजह है कि टियर-2 शहरों का रियल एस्टेट लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
एक्सपर्ट की राय
रियल एस्टेट संस्था नारेडको के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन के मुताबिक टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। बेहतर सड़कें, एक्सप्रेसवे और मेट्रो कनेक्टिविटी इन शहरों में निवेश बढ़ा रही हैं।
इसका सीधा असर घरों की कीमतों पर दिख रहा है। कुल मिलाकर आंकड़े साफ इशारा करते हैं। छोटे शहर अब सिर्फ सस्ते विकल्प नहीं रहे। वहां भी घर खरीदना पहले से महंगा हो गया है। एमपी प्रॉपर्टी गाइडलाइन
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