सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट से एक और झटका, अब लाइसेंस पर फैसला करेगा आबकारी विभाग
News in short
- हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच से भी सोम डिस्टिलरीज को नहीं मिली राहत
- सिंगल बेंच से राहत न मिलने के बाद डिविजनल बेंच पहुंची थी कंपनी
- लाइसेंस नवीनीकरण पर फैसला अब आबकारी विभाग करेगा
- 31 मार्च को लाइसेंस अवधि खत्म होने से अपील हुई निष्प्रभावी
- स्टॉक निपटान को लेकर भी कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए
Intro
लगातार राहत की तलाश में अदालतों के चक्कर काट रही सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। डिविजनल बेंच ने कंपनी की रिट अपील को खत्म करते हुए साफ कर दिया कि अब फैसला आबकारी विभाग के हाथ में है।
फर्जी परमिट कांड और लाइसेंस निलंबन के साए में कंपनी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। जिस विभाग के खिलाफ सोम हाईकोर्ट पहुंचा था, अब वही आबकारी विभाग उसके लाइसेंस का फैसला करेगा।
हाईकोर्ट से फिर झटका, अपील हुई खत्म
सोम डिस्टिलरीज की कानूनी लड़ाई को एक और बड़ा झटका लगा है। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिविजनल बेंच ने कंपनी की रिट अपील को अंतिम रूप से निराकृत कर दिया।
यह अपील उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें सिंगल बेंच ने पहले ही कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था। लगातार दूसरी बार कोर्ट से राहत न मिलना कंपनी की कमजोर होती कानूनी स्थिति को साफ दिखाता है।
फर्जी परमिट कांड ने बिगाड़ा खेल
पूरा मामला 2011 के फर्जी परमिट कांड से जुड़ा है, जिसमें कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों को धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया जा चुका है।
इसी आधार पर आबकारी आयुक्त ने 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी किया और फरवरी 2026 में कंपनी के 8 लाइसेंस निलंबित कर दिए। इस कार्रवाई को पहले ही हाईकोर्ट की सिंगल बेंच सही ठहरा चुकी थी, जिससे सोम की स्थिति और कमजोर हो गई।
कोर्ट ने साफ किया - अब विभाग करेगा फैसला
डिविजनल बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अब लाइसेंस नवीनीकरण या नए लाइसेंस देने का निर्णय पूरी तरह आबकारी विभाग के अधिकार क्षेत्र में है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि विभाग बिना किसी पूर्वाग्रह के कानून और नियमों के तहत निर्णय ले। यानी अब कंपनी की किस्मत अदालत नहीं, बल्कि आबकारी विभाग का प्रशासनिक फैसला तय करेगा।
लाइसेंस खत्म, अपील भी बेअसर
सुनवाई के दौरान यह अहम तथ्य सामने आया कि सोम के लाइसेंस की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि अपील अब लगभग निष्प्रभावी हो चुकी है।
कोर्ट ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपील को खत्म कर दिया, जिससे यह साफ हो गया कि कंपनी की कानूनी रणनीति समय के साथ कमजोर पड़ती जा रही है।
स्टॉक निपटान पर भी कोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस समाप्त होने के बाद कंपनी को नियमों के तहत 30 दिनों के भीतर अपना बचा हुआ स्टॉक किसी अन्य लाइसेंसधारी को बेचने या ट्रांसफर करने का अधिकार है, बशर्ते आबकारी आयुक्त से अनुमति ली जाए। राज्य सरकार भी इस स्टॉक को निर्धारित दर पर खरीद सकती है, जिससे राजस्व का नुकसान रोका जा सके।
टेंडर की जिद और रणनीति पर सवाल
गौरतलब है कि सोम डिस्टिलरीज लगातार मदिरा सप्लाई के टेंडर में शामिल होने के लिए अदालतों में प्रयास कर रही है, लेकिन फर्जीवाड़े के दाग और लाइसेंस निलंबन ने उसकी राह मुश्किल बना दी है।
पहले अंतरिम राहत और फिर अपील, हर स्तर पर कंपनी की कोशिशें जारी हैं, लेकिन कोर्ट के ताजा रुख से साफ है कि अब बिना साफ रिकॉर्ड के आगे बढ़ना आसान नहीं होगा।
अब ‘गेंद’ आबकारी विभाग के पाले में
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरा मामला आबकारी विभाग और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के हाथ में चला गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग कानून के अनुसार क्या निर्णय लेता है, लेकिन फिलहाल के हालात सोम डिस्टिलरीज के लिए किसी भी तरह से राहत भरे नहीं दिख रहे हैं।
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