आबकारी आयुक्त तय करेंगे सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस का फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- सोम डिस्टिलरीज ने अपने लाइसेंस को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को यह अपील निपटा दी।
- कंपनी के आठों लाइसेंस 31 मार्च 2026 को खत्म हो गए थे।
- लाइसेंस नवीनीकरण का फैसला अब आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना लेंगे।
मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कहा है कि लाइसेंस नवीनीकरण का निर्णय सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार और बिना किसी पक्षपात के करेगा। इस फैसले के बाद पूरा मामला अब आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) दीपक सक्सेना की कोर्ट में आ गया है। न्यायालय ने न लाइसेंस जारी करने का आदेश दिया और न ही उसे रद्द किया।
अपील क्यों हुई निष्प्रभावी?
सुनवाई के दौरान एक बड़ा तथ्य सामने आया। कंपनी के सभी आठ लाइसेंस 31 मार्च 2026 को ही समाप्त हो चुके थे। राज्य सरकार ने इसी बात को अपना मुख्य तर्क बनाया। अदालत ने इस तर्क को सही माना और अपील को निष्प्रभावी घोषित कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अब अधिकतम यही निर्देश दिया जा सकता है कि नवीनीकरण आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर फैसला लिया जाए। अदालत ने लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर कंपनी की संदेह को भी निराधार बताया।
शेष स्टॉक पर क्या नियम लागू होंगे?
हाईकोर्ट ने शेष शराब स्टॉक के बारे में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। लाइसेंस समाप्त होने के बाद यह स्टॉक डिस्टिलरी अधिकारी के नियंत्रण में रहता है। आबकारी आयुक्त की अनुमति मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर इस स्टॉक को अन्य लाइसेंसधारियों को बेचा जा सकता है। इसके अलावा राज्य सरकार निर्धारित दर पर इसे खुद भी खरीद सकती है। यह पूरी प्रक्रिया मध्य प्रदेश डिस्टिलरी नियमों के तहत होगी।
आयुक्त के फैसले पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सारा ध्यान आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के निर्णय पर केंद्रित हो गया है। नवीनीकरण आवेदन पर नियमों, पात्रता और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फैसला होगा।
क्योंकि लाइसेंस की अवधि खत्म हो चुकी है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए सिरे से सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। यह देखना अहम होगा कि प्राधिकरण किस प्रकार तथ्यों और नियमों के आधार पर अंतिम निर्णय लेता है।
पारदर्शिता पर उठते सवाल
सोम डिस्टिलरीज (Som Distilleries) का नाम पहले भी कई जांचों और विवादों में आता रहा है। हालांकि, इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियां ही तय करती हैं। ऐसे में लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना और भी जरूरी हो जाता है। प्रशासनिक और कानूनी हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा है कि आगे क्या होगा।
FAQ
- सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस मामला क्या है और हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने अपने लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में रिट अपील संख्या 942/2026 दायर की थी। कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को इस अपील का अंतिम निपटारा कर दिया। कंपनी के आठों लाइसेंस 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुके थे, इसलिए अदालत ने अपील को निष्प्रभावी मान लिया। कोर्ट ने न लाइसेंस जारी करने का आदेश दिया और न ही उसे रद्द किया। अब नवीनीकरण का फैसला आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना को कानून के अनुसार और बिना किसी पूर्वाग्रह के लेना है।
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