टेंडर पाने की जिद में तड़पती सोम डिस्टिलरीज, कोर्ट से मिल रहे एक के बाद एक झटके, अब डिविजनल बेंच में टिकी नजर
News in short
- सोम डिस्टिलरीज जैसे तैसे टेंडर लेकर सरकार पर दबाव बनाना चाहती है।
- सोम डिस्टिलरीज ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डिविजनल बेंच में अपील की है।
- जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा है।
- सोम डिस्टिलरीज के 8 लाइसेंस निलंबन के बावजूद टेंडर में भाग लेने की कोशिश है।
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से पहले ही मिल चुका है बड़ा झटका।
- 31 मार्च को लाइसेंस खत्म होने के बावजूद राहत मांगने पर सवाल उठे।
News in detail
शराब सप्लाई के कई करोड़ के टेंडर के लिए सोम डिस्टिलरीज हर मुमकिन कानूनी दांव आजमा रही है। राहत अब तक दूर ही है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्टकी सिंगल बेंच तक झटके खाने के बाद अब कंपनी ने डिविजनल बेंच का दरवाजा खटखटाया है। फर्जीवाड़े के दाग के बीच टेंडर में घुसने की कोशिश को लेकर कोर्ट में भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
टेंडर के लिए हर दांव खेल रही सोम
मदिरा सप्लाई के टेंडर को हासिल करने की बेचैनी में सोम डिस्टिलरीज लगातार अदालतों के चक्कर काट रही है। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद कंपनी फिर हाईकोर्ट पहुंची, जहां सिंगल बेंच ने भी कड़ी टिप्पणियों के साथ राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद सोम हार नहीं मान रही और अब उसी आदेश के खिलाफ डिविजनल बेंच में अपील दायर कर दी है।
डिविजनल बेंच में सुनवाई, फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिविजनल बेंच ने लंबी सुनवाई के बाद मामले को हर्ड एंड रिजर्व कर लिया है। सोम की ओर से अधिवक्ताओं ने फिर वही पुराने तर्क दोहराए की सभी 8 लाइसेंसों का निलंबन गलत बताया गया।
वहीं सरकार और हस्तक्षेपकर्ताओं ने साफ कहा कि फर्जीवाड़ा कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनी को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलनी चाहिए।
टेंडर की डेडलाइन नजदीक, इसलिए बढ़ी छटपटाहट
दरअसल, मदिरा सप्लाई के टेंडर की डेट लगातार बढ़ती जा रही है। अब इस बड़े टेंडर की अंतिम तारीख अब 28 मार्च 2026 तय की गई है। सोम की पूरी कोशिश है कि किसी तरह अंतरिम राहत लेकर वह इस प्रक्रिया में शामिल हो जाए।
इसी हड़बड़ी में कंपनी ने सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी, ताकि टेंडर में एंट्री मिल सके। कोर्ट में यह सवाल भी उठा कि जब पहले ही गंभीर धोखाधड़ी के आरोप साबित हो चुके हैं तो कंपनी को राहत क्यों दी जाए।
31 मार्च को खत्म हो रहा लाइसेंस, फिर भी कोशिश जारी
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिस लाइसेंस को लेकर सोम कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है वह खुद 31 मार्च को समाप्त होने वाला है। यानी अगर कंपनी को 2-3 दिन की राहत भी मिल जाए और वह टेंडर में भाग ले ले तब भी बिना वैध लाइसेंस के वह शराब सप्लाई नहीं कर पाएगी। ऐसे में कोर्ट में यह सवाल उठा कि आखिर इस कानूनी लड़ाई का मकसद क्या है।
टेंडर हासिल कर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
बहस के दौरान यह भी संकेत मिले कि सोम की असली रणनीति टेंडर हासिल कर सरकार पर दबाव बनाने की हो सकती है। यदि कंपनी को टेंडर मिल जाता है तो राजस्व के दबाव में सरकार खुद उसके लाइसेंस को रिन्यू करने के लिए मजबूर हो सकती है।
हालांकि कोर्ट में इस चाल को लेकर भी तीखी बहस हुई। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि कंपनी की यह रणनीति सफल होगी।
फर्जीवाड़े का दाग बना सबसे बड़ा रोड़ा
गौरतलब है कि 2011 के फर्जी परमिट कांड में कंपनी के अधिकारियों और निदेशकों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। इसी आधार पर 8 लाइसेंसों का निलंबन हुआ। इसे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने भी सही ठहराया था। कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि धोखाधड़ी हर चीज को दूषित कर देती है। ऐसे में सोम के लिए राहत की राह लगातार मुश्किल होती जा रही है।
अब फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल डिविजनल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब देखना होगा कि क्या सोम डिस्टिलरीज को कोई अंतरिम राहत मिलती है या फिर एक बार फिर उसे कोर्ट से खाली हाथ लौटना पड़ता है। अब तक की कानूनी स्थिति को देखते हुए कंपनी के लिए रास्ता बेहद कठिन नजर आ रहा है।
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