जौरा की ‘भाजपा नेत्री’ निकली हनी ट्रैप गैंग की मास्टरमाइंड, कई कारोबारी बने शिकार; FIR के बाद फरार
@रतन मिश्रा. ग्वालियर
समझें क्या है पूरा मामला
- मुरैना जिले के जौरा की सोनम कुशवाह हनी ट्रैप गिरोह की सरगना निकली।
- उसने भाजपा कार्यकर्ता की छवि को ढाल बनाया।
- कम से कम तीन लोगों को उसने शिकार बनाया।
- फर्नीचर व्यापारी रमेश शिवहरे के भंडाफोड़ से राज खुला।
- पुलिस आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
एक साधारण लड़की, एक बड़ा खेल
मध्य प्रदेश काजौरा एक छोटा-सा कस्बा है। मुरैना जिले का हिस्सा। यहां की गलियों में सोनम कुशवाह को कोई खास नहीं जानता था। एक साधारण घर, सीमित साधन। लेकिन सोनम के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
उसने एक रास्ता चुना। कुशवाहा समाज के कार्यक्रम। पहले वहां दिखना शुरू किया। फिर चर्चित होने लगी। समाज के नेता पहचानने लगे। और धीरे-धीरे वह दरवाजा खुला, जिसे वह खोलना चाहती थी।
भाजपा में एंट्री और नई पहचान
समाज की पहचान से सोनम ने अगला कदम उठाया। उसने भाजपा (Bharatiya Janata Party) की सदस्यता ले ली। पूर्व विधायक अजब सिंह कुशवाहा और जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाहा से नजदीकी बनाई। जब कमलेश कुशवाहा मुरैना के जिला अध्यक्ष बने, तब सोनम की सक्रियता जौरा के बाहर पूरे जिले में फैल गई।
पार्टी के हर कार्यक्रम में वह सबसे आगे की पंक्ति में बैठती। साथी महिलाओं के साथ। आत्मविश्वास से भरी। धीरे-धीरे उसने ग्वालियर के भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाहा और मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर तक से मुलाकातें कीं।
सोशल मीडिया पर मंत्रियों और नेताओं के साथ तस्वीरें थीं। लोगों को लगा यह महिला किसी बड़े पद की तलाश में है। कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था कि यह चमकदार छवि दरअसल एक काले खेल का परदा है।
पहला शिकार: 60 साल के बुजुर्ग
माता बसैया क्षेत्र के शंकर पुत्र सुमेर सिंह कुशवाहा की उम्र थी 60 साल। उन्हें क्या पता था कि एक वीडियो कॉल उनकी जमीन छीन लेगी।
सोनम ने वीडियो कॉलिंग के जरिए उनसे आपत्तिजनक बातें कीं। वीडियो बना लिया। फिर धमकी आई। 30 लाख रुपए दो वरना वीडियो वायरल होगा। इस काम में उसके साथ थे खेड़ा मेवदा गांव के जितेंद्र पुत्र रोशन कुशवाहा और पप्पू पुत्र बदन सिंह कुशवाहा।
दबाव इतना बढ़ा कि बुजुर्ग ने 1,000 रुपए के स्टांप पर 30 लाख रुपए के कर्ज का अनुबंध कर लिया। और फिर डेढ़ बीघा जमीन भी लिखवा दी। आखिरकार शंकर कुशवाहा ने माता बसैया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा।
दूसरा शिकार: जो डर गया
जौरा कस्बे में एक और व्यापारी था। लगेज की बड़ी दुकान थी उसकी। सोनम ने उसे भी नहीं छोड़ा। उसे भी हनी ट्रैप (Honey Trap यानी जाल बिछाकर ब्लैकमेलिंग) में फंसाया। व्यापारी ने 27 नवंबर 2025 को थाने में आवेदन दिया। लेकिन फिर धमकी मिली। डर इतना था कि उसने मामला आगे नहीं बढ़ाया। चुप रहा। मुंह बंद रखा।
तीसरा शिकार: जिसने हार नहीं मानी
यह कहानी का वह मोड़ है, जहां सब कुछ बदल गया। जौरा के फर्नीचर कारोबारी रमेश शिवहरे के पास एक दिन फोन आया। एक महिला की आवाज थी। मनीष पेट्रोल पंप के पास फर्नीचर लगाने का काम है। ऑर्डर देना है। रमेश घर से निकले और परिवार को बता गए कि फर्नीचर का ऑर्डर देखने जा रहे हैं। वे बताई गई जगह पर पहुंचे। वहां महिला पहले से मौजूद थी। साथी भी थे। और देखते-देखते रमेश को कमरे में बंद कर लिया गया।
उसके बाद जो हुआ कोई भी टूट जाता। कपड़े उतरवाए गए। मारपीट हुई। अश्लील वीडियो बनाया गया। 10 लाख रुपए की मांग रखी गई। सोने की अंगूठी और जेब की नकदी भी छीन ली गई। और साथ में धमकी। पुलिस को बताया तो वीडियो वायरल होगा। झूठे मामलों में फंसा देंगे।
उधर, घर पर बेचैनी बढ़ रही थी। रमेश का फोन बंद था। परिजन, दोस्त, समाज के लोग सब निकल पड़े। रातभर तलाश होती रही। अलग-अलग ठिकानों पर खोजबीन हुई। आखिरकार पर्दा उठा। रमेश मिले और उनकी आपबीती ने इस पूरे गिरोह को उजागर कर दिया।
भाजपा ने सोनम से पल्ला झाड़ा
मामला सामने आते ही भाजपा के मुरैना जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाहा का बयान आया। उन्होंने साफ कहा कि महिला का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। वह पार्टी की कार्यकर्ता नहीं है।
पुलिस को आरोपियों की तलाश
वहीं जौरा के एसडीओपी (SDOP यानी Sub Divisional Officer of Police) नितिन बघेल ने कहा कि पुलिस महिला और उसके साथियों की तलाश कर रही है और जल्द ही आरोपी पकड़े जाएंगे। अब देखना यह है कि जो तस्वीरें नेताओं के साथ सोशल मीडिया पर थीं, वे कहानी क्या बताती हैं। और जो सवाल उठ रहे हैं, उनके जवाब कब मिलेंगे।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है। यह उस खतरनाक सच को उजागर करती है जहां राजनीतिक पहुंच को अपराध की ढाल बनाया जाता है। भारतीय संविधान हर नागरिक की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। हनी ट्रैप जैसे अपराध इसी मूल अधिकार पर प्रहार हैं। डिजिटल नैतिकता के नजरिए से वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग IT Act (Information Technology Act) के तहत गंभीर साइबर अपराध है। एक बुजुर्ग की जमीन जाना और एक व्यापारी का डर के मारे चुप रहना यह दिखाता है कि ऐसे गिरोह समाज के सबसे कमजोर पलों का फायदा उठाते हैं। रमेश शिवहरे का साहस इस पूरी कहानी का सबसे जरूरी हिस्सा है। उनकी हिम्मत के बिना शायद यह गिरोह और आगे बढ़ता रहता।
जरूरी FAQ
हनी ट्रैप में फंसने पर क्या करें और क्या न करें?
हनी ट्रैप का शिकार होने पर सबसे पहली गलती यह होती है कि लोग पैसे दे देते हैं। यह गलती कभी न करें क्योंकि एक बार पैसे देने पर मांग और बढ़ती है। तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत दे सकते हैं। पुलिस को सभी सबूत जैसे फोन नंबर, चैट और वीडियो की जानकारी दें। कानून पीड़ित की पहचान गोपनीय रखता है इसलिए डर या शर्म के कारण चुप बिल्कुल न रहें।
क्या राजनीतिक पहुंच रखने वाले आरोपियों को पकड़ना मुश्किल होता है?
कानून की नजर में हर अपराधी बराबर है। राजनीतिक पहचान या नेताओं के साथ तस्वीरें किसी को कानून से नहीं बचा सकतीं। इस मामले में पुलिस ने पहले मामले में आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। एसडीओपी नितिन बघेल ने साफ कहा है कि तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी होगी। हालांकि जब आरोपी के पास राजनीतिक संपर्क हों तब पीड़ित का साहस और गवाह का बयान सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।
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