स्पार्टा कॉलेज का केस हाईकोर्ट में खारिज, 9.70 करोड़ की वसूली का रास्ता साफ
News in Short
- स्पार्टा कॉलेज का लोन केस: हाईकोर्ट ने पुलिस की एफआईआर को खारिज किया।
- बैंक ने खोला वसूली का रास्ता, स्पार्टा कॉलेज का 9.7 करोड़ का लोन मामला हल।
- हाईकोर्ट ने बैंक कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज केस को 'दुरुपयोग' करार दिया।
- पुलिस की मिलीभगत के बाद, स्पार्टा कॉलेज का केस हाईकोर्ट ने खारिज किया।
- स्पार्टा इंस्टीट्यूट की कानूनी लड़ाई: हाईकोर्ट में बैंक की जीत और वसूली का आदेश।
News in Detail
9.70 करोड़ की लोन की वसूली से बचने भोपाल के स्पार्टा कॉलेज द्वारा बैंक पर दर्ज कराए केस को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दर्ज केस को बैंककर्मियों को परेशान करने और वसूली को विफल करने वाला माना है। केस खारिज होने से स्पार्टा कॉलेज और उसकी संचालक गुरुकुल शिक्षा समिति से वसूली का रास्ता खुल गया है।
किश्त जमा नहीं की तो बैंक नोटिस
भोपाल के भानपुर स्थित स्पार्टा कॉलेज की स्थापना के लिए इलाहाबाद बैंक से साल 2010 में 9.70 करोड़ रुपए का लोन लिया था। इसके लिए समिति और कॉलेज प्रबंधन ने पहले ग्वालियर स्थित प्रॉपर्टी गिरवी रखी।
प्रबंधन ने बाद में इसे विदिशा स्थित प्रॉपर्टी से बदलवाया था। लोन एग्रीमेंट के कुछ समय बाद स्पार्टा इंस्टीट्यूट ने किश्त जमा करना बंद कर दिया। जिस पर बैंक द्वारा नोटिस जारी किए गए।
बैंक ने जब गिरवी रखी संपत्ति को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की तो स्पार्टा इंस्टीट्यूट प्रबंधन ने साठगांठ कर हबीबगंज थाने में केस दर्ज करा दिया था। इसके खिलाफ बैंक अधिकारियों ने हाईकोर्ट में अपील पेश की थी।
दस साल चली हाईकोर्ट में सुनवाई
इलाहाबाद बैंक के अधिकारियों ने स्पार्टा इंस्टीट्यूट की संचालक गुरुकुल शिक्षा समिति और पुलिस के खिलाफ 2015 में याचिका पेश की थी। जिस पर 10 साल से लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बैंक के पक्ष में निर्णय आया है।
इस दौरान बैंक के वकील कोर्ट को एफआईआर अवैधानिक होने से सहमत कराने में सफल रहे। बैंक के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि केस में लगाए गए आरोप मान लिए जाएं तब भी पुलिस ने जो धाराएं लगाई हैं वे केस से संबंधित नहीं हैं। मामला बैंक लेनदेन से संबंधित हैं और बकायादार ने अपनी सहमति से संपत्ति को बंधक रखा था।
एफआईआर पर उठाए गए सवाल
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बैंक के वकीलों ने पुलिस की एफआईआर पर सवाल उठाए। कोर्ट में बकायादार गुरुकुल शिक्षा समिति द्वारा स्वेच्छा से संपत्ति बंधक रखने की पुष्टि हुई।
इस पुष्टि के आधार पर कोर्ट ने भी पुलिस की एफआईआर की वैधता को अस्वीकार कर दिया। सुनवाई में बैंक के वकील नीलामी की प्रक्रिया को वैध और प्रक्रियासंगत साबित करने में कामयाब रहे। कोर्ट ने आरोपों को दुरुपयोग बताते हुए शिक्षा समिति द्वारा दर्ज पुलिस केस को खारिज कर दिया।
पुलिस की मिलीभगत आई सामने
इलाहाबाद बैंक द्वारा जब 9.70 करोड़ रुपए के लोन की वसूली के नोटिस जारी किए तो शिक्षा समिति ने टालमटोल शुरू कर दी थी। बैंक ने जब विदिशा स्थित बंधक संपत्ति की नीलामी की तैयारी की तो शिक्षा समिति ने हबीबगंज थाने में शिकायत की।
बैंक की नीलामी की जानकारी के बाद भी पुलिस ने शिकायतकर्ता के इशारे पर केस दर्ज कर लिया। यह केस गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित था। जो धाराएं लगाई गईं वे जमीन घोटालों, जाली दस्तावेज बनाने और सरकारी धन के गबन के मामलों में लगाई जाती हैं।
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