एसटीए गठन पर HC की रोक, सरकार ने मानी चूक, परिवहन विभाग ने दिया शपथ पत्र
रतन मिश्रा@ग्वालियर. मध्यप्रदेश सरकार ने स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के गठन में नियमों की अनदेखी की। जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई और सुनवाई शुरू हुई। परिवहन विभाग ने शपथ पत्र देकर गठन में गलती खुद स्वीकार की। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एसटीए के गठन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब एसटीए नए बस परमिट जारी नहीं कर सकेगी।
सरकार के एसटीए गठन पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश सरकार ने 9 फरवरी 2026 को एसटीए के गठन की नई अधिसूचना जारी की थी। इस पर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई। याचिकाकर्ता हरीशंकर सिंह पटेल और अन्य ने इस अधिसूचना को कानून के खिलाफ बताया।
उनके वकील एमपीएस रघुवंशी ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 68(2) साफ कहती है। किसी परिवहन उपक्रम में वित्तीय या प्रबंधकीय हित रखने वाला व्यक्ति एसटीए का अध्यक्ष या सदस्य नहीं बन सकता।
मनीष सिंह का नाम क्यों है विवाद में
याचिका में आरोप लगाया गया कि सरकार ने एमपीएसआरटीसी के एमडी मनीष सिंह को फायदा पहुंचाने के लिए एसटीए की संरचना बदली। मनीष सिंह पहले से हाईकोर्ट में एक अलग विवाद में हैं। उनकी नियुक्ति को लेकर क्वो वारंटो याचिका पहले से लंबित है।
पहले 28 मार्च 2025 की अधिसूचना में उन्हें सीधे सदस्य बनाने की कोशिश हुई थी। विवाद बढ़ा तो सरकार ने वह अधिसूचना रद्द कर दी। फिर 9 फरवरी 2026 की नई अधिसूचना में उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव भी कानून की भावना के खिलाफ है। उनका तर्क है कि इस तरह मनीष सिंह अप्रत्यक्ष रूप से एसटीए के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
परिवहन विभाग ने माना, हुई चूक
सुनवाई के दौरान परिवहन विभाग ने कोर्ट में शपथ पत्र पेश किया। विभाग ने माना कि गठन में गलती हुई है। विभाग ने अधिसूचना में संशोधन के लिए तीन महीने का समय मांगा।
कोर्ट ने यह जवाब रिकॉर्ड पर लिया। इसके बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एसटीए गठन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
अभी नहीं मिलेगा बस परमिट
रोक लगने के बाद अब एसटीए नए बस परमिट जारी नहीं कर सकेगी। बस ऑपरेटरों को इससे सीधा असर पड़ेगा। जो लोग नए परमिट का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अभी और रुकना होगा।
मामले की अगली सुनवाई इस बात पर निर्भर होगी कि सरकार तीन महीने में संशोधित अधिसूचना पेश करती है या नहीं। यह मामला परिवहन कारोबार से जुड़े हजारों लोगों को प्रभावित कर सकता है।
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