सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी का बोलबाला! लोकायुक्त का खुलासा, देखें कहां कितना भ्रष्टाचार

Aman Vaishnav | Mar 01, 2026, 12:56 IST
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मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई में आधे से ज्यादा विभागों के कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।

मध्यप्रदेश सरकार के लगभग 56 मुख्य विभाग हैं जहां आम जनता के रोजमर्रा के काम होते हैं। पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड देखें, तो तस्वीर थोड़ी परेशान करने वाली है।



लोकायुक्त संगठन ने इन 56 में से 30 विभागों में ऐसे कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ा है, जो छोटे-छोटे कामों के बदले लोगों से रिश्वत मांग रहे थे। आसान शब्दों में कहें तो आधे से ज्यादा विभागों में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है।



रिश्वतखोरी में ये विभाग सबसे आगे

आजकल सरकारी दफ्तरों में रिश्वत का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे ज्यादा भ्रष्ट विभागों की बात करें, तो राजस्व, गृह, नगर निगम और पंचायत विभाग के नाम सबसे ऊपर हैं।



इन विभागों में भ्रष्टाचार का तरीका कुछ ऐसा है-

  • राजस्व विभाग: यहां सबसे ज्यादा मार गरीब किसानों पर पड़ रही है। पटवारी जैसे कर्मचारी जमीन का नामांतरण करने के बदले पैसे मांगते पकड़े गए हैं। साथ ही बंटवारा करने या ऋण पुस्तिका देने में भी पकड़े गए हैं।
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  • पुलिस विभाग: खाकी भी इसमें पीछे नहीं है। एफआईआर होने के बाद कोर्ट से जमानत दिलाने में पुलिसकर्मी घूस लेते पकड़े गए हैं। इसके आलावा केस की फाइल (चालान) को कमजोर बनाने के मामले भी सामने आए हैं।
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  • नगर निगम और नगरपालिका: शहरों के विकास का जिम्मा संभालने वाले इंजीनियर, दरोगा और अकाउंटेंट भी घूसखोरी के मामले में पकड़े गए हैं।
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रंगे हाथ पकड़ रही लोकायुक्त टीम

लोकायुक्त टीम अब भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ रही है। साथ ही उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट (चालान) भी बहुत जल्दी पेश कर रही है। सजा मिलने के बाद उनकी अवैध संपत्ति को सरकारी खजाने में जमा करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।



फिलहाल ऐसे 8 मामलों में कोर्ट में अर्जी दी गई है, ताकि भ्रष्टाचार से कमाई गई 30 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में ले सके।



सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी के हालिया मामले

  • इंदौर कीखुड़ैल तहसील में एक किसान अपनी जमीन का नामांतरण के लिए चक्कर काट रहा था। वहां तैनात एक सरकारी बाबू ने इस काम के बदले किसान से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
  • धार की बदनावर तहसील में भी एक पटवारी साहब पकड़ाए थे। उन्होंने जमीन का नक्शा सुधारने और फाइल को आगे बढ़ाने के नाम पर 20 हजार रुपए की घूस ली थी।
  • नगर निगम के सुपरवाइजर और दरोगा भी पीछे नहीं हैं। इन्हें कहीं 3 हजार तो कहीं 10 से 20 हजार रुपए तक की रिश्वत लेते हुए इन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया है। फाइल पास करना फीस में छूट दिलाना या नए कनेक्शन इसका कारण हैं।
  • जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग के एक बड़े अधिकारीने तो हद ही कर दी। एक स्कूल को मान्यता दिलाने और नियमों में ढील देने के बदले उन्होंने सीधे 1 लाख रुपए की मांग रख दी थी।
  • इंदौर नगर निगम के जोनल ऑफिस में बैठे एक सुप्रीटेंडेंट साहब भी रिश्वत के मामले में नप गए। उन्हें 20 हजार रुपए लेते हुए पकड़ा गया था।
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