19 साल पुराने पारदी दंपती हत्याकांड में सुखदेव पांसे बरी: MP-MLA कोर्ट का बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। बैतूल जिले के मुलताई में 2007 में हुए पारदी दंपती हत्याकांड (Pardhi Couple Murder Case) में अदालत ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए मध्यप्रदेश के पूर्व पीएचई मंत्री और कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे (Sukhdev Panse) सहित 14 ग्रामीणों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
करीब 19 साल तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद MP-MLA कोर्ट (MP-MLA Court) ने कहा कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले की चर्चा फिर तेज हो गई है।
क्या था पूरा मामला? (Pardhi Couple Murder Case)
यह मामला सितंबर 2007 का है। उस समय बैतूल जिले की मुलताई तहसील के ग्राम चौथिया में पारधी समुदाय के डेरे में अचानक हिंसा भड़क उठी थी। घटना के दौरान डेरे में आगजनी और तोड़फोड़ की गई। कई झोपड़ियों को नुकसान पहुंचा। बाद में बोंदरु पारधी और उनकी पत्नी के शव एक कुएं में मिले। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया था। पुलिस ने इसे हत्या और सामूहिक हिंसा का मामला मानते हुए तत्काल जांच शुरू की।
कैसे जुड़ा सुखदेव पांसे का नाम?
घटना के बाद पुलिस ने तत्कालीन विधायक सुखदेव पांसे पर आरोप लगाया कि उन्होंने भीड़ को उकसाने और हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई।
जांच के बद पुलिस ने सुखदेव पांसे, बैतूल जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार और कई ग्रामीणों के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और आगजनी जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रूप से हाई-प्रोफाइल केस बन गया।
19 साल चली कानूनी लड़ाई
यह मुकदमा लगभग 19 साल तक अदालत में चलता रहा। इस दौरान कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। बाकी आरोपियों पर सुनवाई जारी रही। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।
अदालत का फैसला: साक्ष्यों के अभाव में सभी बरी
21वें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (MP-MLA) स्वयं प्रकाश दुबे की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि
इसी आधार पर अदालत ने सुखदेव पांसे, राजा पवार व अन्य 14 ग्रामीणों को सभी आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया।
बचाव पक्ष की दलीलें
कोर्ट में इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी.के. सक्सेना और संजय रावत ने पैरवी की। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोप राजनीतिक दुर्भावना से लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष के पास पुख्ता सबूत नहीं थे। गवाहों के बयान भी स्पष्ट और सुसंगत नहीं थे। फैसले के बाद अधिवक्ताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताया।
फैसले के बाद समर्थकों में खुशी
जैसे ही अदालत का फैसला आया, सुखदेव पांसे के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ था अदालत के फैसले ने स्थिति साफ कर दी है। हालांकि इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
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