सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के कारोबारी राजेश शर्मा को दी क्लीन चिट, EOW की FIR रद्द

Sanjay Dhiman | Mar 11, 2026, 21:27 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल की ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कंपनी और उसके पार्टनर्स के खिलाफ FIR को खारिज करते हुए, अदालत ने आपराधिक कार्रवाई पर विराम लगा दिया।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स के खिलाफ FIR को खारिज किया।
  • हाईकोर्ट ने FIR को सिविल विवाद मानकर रद्द किया था।
  • राज्य एजेंसी और शिकायतकर्ता की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में खारिज।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्रवाई पर विराम लगाया।
  • कंपनी को बड़ी कानूनी राहत मिली, विवाद का अंत हुआ।

News in Detail

BHOPAL. भोपाल के कारोबारी राजेश शर्मा की कंपनी ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी और उसके पार्टनर्स के खिलाफ दायर FIR को खारिज करते हुए, जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू और शिकायतकर्ता की याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले से कंपनी को एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।



कंपनी के खिलाफ FIR और हाईकोर्ट का फैसला

मामला FIR नंबर 98/2025 से जुड़ा हुआ था, जिसमें राज्य एजेंसी ईओडब्ल्यू ने चिंता सिंह की शिकायत पर ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स और उसके पार्टनर्स के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस शिकायत में लगाए गए आरोपों के बारे में कंपनी का शुरू से ही कहना था कि यह एक व्यावसायिक और सिविल विवाद है, जिसे गलत तरीके से आपराधिक मामला बना दिया गया।



ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स ने इस FIR को चुनौती दी थी और हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने मामले की सामग्री की जांच के बाद पाया कि यह मामला मुख्य रूप से सिविल विवाद का था और इसे आपराधिक मामला बना दिया गया। इस आधार पर हाईकोर्ट ने FIR को रद्द कर दिया था।



सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जांच एजेंसी और शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन दायर की थी। 10 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई की। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि FIR में लगाए गए आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है। इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने FIR को निराधार मानते हुए राज्य एजेंसी और शिकायतकर्ता की याचिकाओं को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।



क्या था पूरा मामला? (FIR No. 98/2025 की कहानी)

इस पूरे विवाद की जड़ में थी एक FIR, जिसका नंबर 98/2025 था। यह शिकायत चिंता सिंह नाम के एक व्यक्ति ने दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स और उसके पार्टनर्स ने कुछ गड़बड़ी की है। मामले की जांच ईओडब्ल्यू (EOW) जैसी बड़ी एजेंसी को सौंपी गई थी।



राजेश शर्मा की टीम का शुरू से ही एक ही स्टैंड था। उनका कहना था कि यह दो पक्षों के बीच का व्यावसायिक लेन-देन है। इसमें पुलिस केस जैसा कुछ भी गलत या आपराधिक नहीं हुआ है।



कानूनी राहत और भविष्य की दिशा

इस फैसले के साथ ही ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स और उसके पार्टनर्स के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर पूरी तरह विराम लग गया है। यह निर्णय कंपनी के लिए एक बड़ी कानूनी राहत मानी जा रही है। इस फैसले ने लंबे समय से चल रही आपराधिक प्रक्रिया का अंत कर दिया और अब कंपनी बिना किसी कानूनी दबाव के अपने व्यावसायिक कार्यों को आगे बढ़ा सकेगी।



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