11 नवंबर को स्वच्छता के पुरस्कार, दिवाली से पहले इंदौर-भोपाल की हवा खराब, रैंकिंग पर उठे सवाल
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्वच्छता रैंकिंग से शहर की पूरी स्थिति सामने आती है या नहीं।
11 नवंबर को मिलेंगे 57 श्रेणियों में पुरस्कार
दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छता पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में देशभर के शहरों को 57 श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। इंदौर लगातार आठ बार स्वच्छता में अपनी पहचान बना चुका है। अब उसकी नजर नौवीं बार भी यह उपलब्धि हासिल करने पर है।
इंदौर में AQI 233, भोपाल में 261
पुरस्कार समारोह से पहले सात नवंबर की वायु गुणवत्ता रिपोर्ट सामने आई है। इसके मुताबिक, इंदौर की छोटी ग्वालटोली में AQI 233 दर्ज किया गया। वहीं भोपाल के पर्यावरण परिसर में AQI 261 रहा। दोनों जगह हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज हुई। ग्वालियर के दीनदयाल नगर में स्थिति और खराब रही। यहां AQI 348 तक पहुंच गया। हालांकि, अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर अलग रहा।
इंदौर के रीजनल पार्क में AQI सिर्फ 48
इंदौर में प्रदूषण की स्थिति हर इलाके में एक जैसी नहीं रही। छोटी ग्वालटोली में AQI 233 दर्ज हुआ, जबकि रीजनल पार्क में यह 48 था। इस अंतर से पता चलता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता बदल रही है। कुछ इलाकों में प्रदूषण नियंत्रित है, जबकि अन्य जगहों पर समस्या बनी हुई है।
स्वच्छता रैंकिंग में किन बातों को मिलते हैं अंक?
स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों की सफाई और कचरा प्रबंधन का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें सार्वजनिक स्थानों की सफाई, शौचालयों की व्यवस्था और नागरिकों की राय शामिल होती है। हालांकि, स्वच्छता रैंकिंग पूरे शहर की हवा साफ होने की गारंटी नहीं देती। बेहतर रैंकिंग मिलने के बावजूद कुछ इलाकों में धूल और धुएं की समस्या हो सकती है। इसलिए सफाई के साथ प्रदूषण नियंत्रण और कचरे का सही निपटान भी जरूरी है।
दिवाली पर प्रदूषण बढ़ने की आशंका
आठ नवंबर की दिवाली पर पटाखों के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका जताई गई है। पहले से खराब हवा वाले इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर धूल, धुएं और प्रदूषण की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
इंदौर के सामने सूरत और नवी मुंबई की चुनौती
इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण का मूल्यांकन कुल 12,500 अंकों के आधार पर हुआ है। इसमें देशभर के 4,909 शहरों ने हिस्सा लिया है। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की सुपर लीग में इंदौर भी शामिल है। इस श्रेणी में सूरत, नवी मुंबई और विजयवाड़ा जैसे शहर भी हैं। इन सभी शहरों का प्रदर्शन 11 नवंबर को घोषित नतीजों में सामने आएगा।
देपालपुर की सफाई सुधारने की जिम्मेदारी भी
इस बार स्वच्छ शहर जोड़ी श्रेणी में भी इंदौर की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस पहल के तहत इंदौर को देपालपुर में सफाई सुधारने के प्रयास दिखाने होंगे। देशभर में 72 मेंटर शहर इस योजना का हिस्सा हैं। ये शहर दूसरे शहरों की सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
भोपाल की रैंकिंग पर भी रहेगी नजर
स्वच्छता पुरस्कारों में राजधानी भोपाल के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। यहां नियमित सफाई और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान महत्वपूर्ण होगा। सर्वेक्षण में लोगों की राय यानी Citizen Feedback का भी असर रहेगा। इसके अलावा नियमित कचरा संग्रहण और Waste Management की व्यवस्था भी मायने रखेगी।
पिछले सर्वे में इंदौर को मिले थे 99.75 अंक
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को 99.75 अंक मिलने का उल्लेख था। हालांकि, इस बार मूल्यांकन के मानक अलग हैं। अब 11 नवंबर को घोषित परिणामों से शहरों की नई स्थिति सामने आएगी। इससे पता चलेगा कि किन शहरों ने स्वच्छता के मानकों पर बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन स्वच्छता पुरस्कार और साफ हवा दो अलग विषय हैं। इसलिए शहरों की सफाई के साथ प्रदूषण की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।