इंदौर, देवास और राजगढ़ में IT का बड़ा एक्शन, 15 करोड़ की टैक्स चोरी का हुआ खुलासा
आयकर विभाग (IT) ने मध्य प्रदेश में एक नए तरह की टैक्स चोरी का पर्दाफाश किया है। इंदौर, देवास और राजगढ़ के जीरापुर में विभाग ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जो सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को टैक्स बचाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज इकट्ठा करते थे। इसके बाद, वे गलत टैक्स रिफंड क्लेम करवा रहे थे। अब तक 15 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी का खुलासा हो चुका है।
खबर यह भी-MP News | सागर में आयकर विभाग ने पकड़ी 150 करोड़ की टैक्स चोरी, ये पूर्व विधायक बुरी तरह फंसे
छोटे शहरों तक फैला फर्जी रिफंड रैकेट
खबर यह भी-Income Tax ने देर रात तक की गोयनका से पूछताछ | 52 जगहों पर पहले ही छापा मार चुका आयकर विभाग
मेडिकल बिल और एजुकेशन लोन के नाम पर हेरा-फेरी
इस फर्जीवाड़े में मेडिकल बिल, एजुकेशन लोन जैसी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर टीडीएस रिटर्न का फायदा उठाया गया। इंदौर के पास राऊ में स्थित एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां से 1 हजार 300 से ज्यादा फर्जी टीडीएस रिफंड के मामले पकड़े गए। पिछले दो सालों में इस तरीके से करीब 8 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की गई।
खबर यह भी-IAS और मंत्री सहित 50 लोगों को भेजे आयकर विभाग ने नोटिस
एक ही ईमेल और आईपी एड्रेस से फाइल हुए हजारों रिटर्न
जांच के दौरान सामने आया कि एक ही ईमेल आईडी और आईपी एड्रेस से सैकड़ों रिटर्न फाइल किए गए। देवास में अब तक की जांच में 5.84 करोड़ रुपएए की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है, जो और भी बढ़ सकता है। वहीं, राजगढ़ जिले के जीरापुर में एक व्यक्ति ने अकेले 230 फर्जी रिटर्न फाइल कर 60 लाख रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी की।
खबर यह भी- Bhopal में आयकर विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी | 52 किलो सोना जब्त
सरकारी और निजी कर्मचारियों को बनाया निशाना
इस रैकेट के निशाने पर फैक्ट्रियों, सरकारी उपक्रमों (government undertakings) और सुरक्षा एजेंसियों में काम करने वाले कर्मचारी थे। आरोपियों ने उनके नाम पर फर्जी टैक्स रिफंड क्लेम कर करोड़ों रुपए की हेराफेरी की।
ऐसे हुआ खुलासा
टीडीएस फाइल करने और रिफंड क्लेम करने वालों की संख्या अचानक बढ़ने से आयकर विभाग को शक हुआ। जब विभाग ने जांच की, तो पाया गया कि एक ही ईमेल और आईपी एड्रेस से भारी मात्रा में रिफंड क्लेम किए गए थे। इसके अलावा, एक मामले में एक व्यक्ति ने दिव्यांग कोटे से टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए खुद को एक साल दिव्यांग बताया, जबकि अगले साल वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
टैक्स सरलीकरण प्रणाली बनी गड़बड़ी का कारण
आयकर विभाग ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन प्रोसेस शुरू की थी, लेकिन अब इसका दुरुपयोग होने लगा है। वर्तमान में, टीडीएस रिटर्न के केवल 0.1% मामलों की स्क्रूटनी की जाती है। 25 हजार से 50 हजार रुपए तक के रिफंड मामलों में ज्यादा पूछताछ नहीं होती, जिससे फर्जीवाड़ा बढ़ा।
टैक्स प्रैक्टिशनर्स पर कसेगा शिकंजा
प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर, आयकर विभाग (मप्र और छग) पुरुषोत्तम त्रिपुरी ने यह जानकारी दी है कि IT विभाग ने गलत कटौती और छूट का हवाला देकर फर्जी रिफंड प्राप्त करने वाले कुछ टैक्स प्रैक्टिशनर्स और संस्थानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इन गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए विभाग ने ऐसे टैक्स प्रैक्टिशनर्स और संस्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें! विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनें