TET में आरक्षण का लाभ लेकर पास हुए उम्मीदवार नहीं हो सकेंगे जनरल सीट पर भर्ती

Neel Tiwari | May 23, 2026, 20:24 IST
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जबलपुर हाईकोर्ट ने MP शिक्षक भर्ती 2024 से जुड़ी 40 से अधिक याचिकाएं खारिज कीं। कोर्ट ने कहा कि TET में आरक्षण छूट लेकर पास होने वाले उम्मीदवार जनरल सीट पर माइग्रेशन नहीं मांग सकते, चाहे मुख्य परीक्षा में अंक ज्यादा ही हों।

News In Short

  • TET में 60% से कम अंक लेकर आरक्षित छूट से पास हुए उम्मीदवार जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकेंगे।
  • हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती 2024 की विवादित कंडिका 12.4 को पूरी तरह वैध माना
  • पात्रता स्तर पर ली गई छूट का असर चयन प्रक्रिया में भी रहेगा -HC
  • भर्ती विज्ञापन की शर्तें जानकर परीक्षा देने वाले उम्मीदवार बाद में नियम चुनौती नहीं दे सकते।
  • हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

News in detail

TET में आरक्षण का लाभ और भर्ती में जनरल सीट पर दावा

जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती 2024 से जुड़ी 40 से अधिक याचिकाओं को खारिज करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने TET परीक्षा में छूट का लाभ लेकर पात्रता हासिल की है, वे बाद में अनारक्षित वर्ग की सीटों पर माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते, भले ही मुख्य चयन परीक्षा में उनके अंक अधिक हों।



मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2024 में आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने यह मांग की कि उन्हें मुख्य चयन परीक्षा में अधिक अंक मिलने के आधार पर अनारक्षित वर्ग की सीटों पर चयन का लाभ दिया जाए। मामले में चीफ जस्टिस की डिविजनल बेंच ने पूरे विवाद पर विस्तृत फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और भर्ती एजेंसी की प्रक्रिया को सही ठहराया।



यह मामला केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं था, बल्कि अभिलाष जैन, दिनेश गर्ग, दीपक गर्ग, प्रदीप कुमार, प्रतीक जैन समेत 40 से अधिक याचिकाओं के जरिए हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ गया था। कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार, जिसने TET परीक्षा में न्यूनतम अंकों में छूट का लाभ लिया हो, बाद में सामान्य वर्ग की सीट पर चयन का अधिकार मांग सकता है?





क्या था भर्ती नियम और विवादित कंडिका 12.4

मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती नियम 2018 के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए थे, जबकि आरक्षित वर्ग को 50 प्रतिशत अंकों तक की छूट दी गई थी।



साल 2024 में जब माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ, तब उसमें कंडिका 12.4 जोड़ी गई। इसी कंडिका में साफ लिखा गया था कि जिन उम्मीदवारों ने TET में 150 में से 90 अंक यानी 60 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त किए हैं और आरक्षित वर्ग की छूट लेकर पात्रता हासिल की है, उन्हें केवल आरक्षित वर्ग में ही माना जाएगा। ऐसे उम्मीदवारों को अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा।



हालांकि विज्ञापन में यह भी स्पष्ट था कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार TET में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, तो वह चयन परीक्षा में पर्याप्त अंक लाने पर सामान्य वर्ग में माइग्रेट हो सकता है।



मुख्य परीक्षा में मेरिट ज्यादा तो जनरल सीट मिलनी चाहिए- याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि TET केवल एक पात्रता परीक्षा है और उसका उद्देश्य केवल उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने योग्य बनाना है। एक बार उम्मीदवार TET पास कर लेता है, तो उसके बाद चयन केवल मुख्य परीक्षा की मेरिट के आधार पर होना चाहिए।



अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि उन्होंने मुख्य चयन परीक्षा में सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इसलिए उन्हें केवल इस आधार पर जनरल सीट से वंचित करना कि उन्होंने TET में छूट ली थी, संविधान के समानता सिद्धांत के खिलाफ है।



याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों जैसे जितेंद्र कुमार सिंह, विकास शंखला और दीपा ई.वी. मामलों का हवाला देते हुए दावा किया कि आरक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी में चयन से रोका नहीं जा सकता।



छूट लेकर पात्रता पाने वाले सामान्य वर्ग के बराबर नहीं- सरकार

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में जोरदार तरीके से यह पक्ष रखा गया कि शिक्षक भर्ती की मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए TET पास करना अनिवार्य पात्रता है। यदि कोई उम्मीदवार उस पात्रता को हासिल करने के लिए आरक्षण छूट का लाभ लेता है, तो वह उन उम्मीदवारों के बराबर नहीं माना जा सकता जिन्होंने बिना किसी छूट के 60 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।



सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों प्रदीप कुमार, साजिब रॉय और जी. किरण जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि पात्रता स्तर पर ली गई छूट उम्मीदवार को केवल “selection level” तक पहुंचाती है, लेकिन उसे सामान्य वर्ग में स्वतः प्रवेश का अधिकार नहीं देती। सरकार की ओर से अधिवक्ता ने यह भी कहा था कि भर्ती विज्ञापन में इस माइग्रेशन को लेकर पहले से स्पष्ट रोक लगाई गई थी, इसलिए बाद में उम्मीदवार उस नियम को चुनौती नहीं दे सकते।



हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का किया विस्तृत विश्लेषण

डिविजनल बेंच ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले छाया बनाम महाराष्ट्र राज्य 2026 समेत कई फैसलों का विश्लेषण किया। कोर्ट ने कहा कि यदि भर्ती नियम या विज्ञापन में स्पष्ट प्रतिबंध मौजूद हो, तो आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अनारक्षित वर्ग में माइग्रेशन का अधिकार नहीं मिलता।



कोर्ट ने यह भी माना कि पात्रता परीक्षा में दी गई छूट केवल उम्मीदवार को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देती है। यदि उम्मीदवार सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित मूल पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता, तो वह जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकता।



सरकार को नियम बनाने का पूरा अधिकार - HC

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षक भर्ती नियम 2018 के उपनियम 8 और 9 राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया, चयन मानदंड और मेरिट सूची तैयार करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय करने का अधिकार देते हैं। इसलिए भर्ती विज्ञापन की कंडिका 12.4 नियमों के खिलाफ नहीं बल्कि उन्हीं के तहत जारी वैध प्रावधान है।



कोर्ट ने साफ कहा कि यह कहना गलत होगा कि विज्ञापन ने मूल नियमों को बदल दिया। बल्कि सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चयन प्रक्रिया को स्पष्ट किया है।



परीक्षा में शामिल होने के बाद नियम चुनौती नहीं दे सकते उम्मीदवार

हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन की सभी शर्तों को जानते हुए भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था। TET की पात्रता पहले ही आजीवन वैध घोषित की जा चुकी थी और उम्मीदवारों को यह जानकारी थी कि 60 प्रतिशत से कम अंक वालों को माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों को चुनौती देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।



सभी याचिकाएं खारिज, अंतरिम आदेश भी खत्म

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने सभी रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि भर्ती विज्ञापन 2024 की कंडिका 12.4 पूरी तरह वैध और लागू करने योग्य है।



कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन उम्मीदवारों ने TET परीक्षा में आरक्षित वर्ग की छूट का लाभ लेकर पात्रता हासिल की है और 60 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त किए हैं, वे अनारक्षित वर्ग की सीटों पर माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते, चाहे मुख्य चयन परीक्षा में उनके अंक अधिक ही क्यों न हों। इसके साथ ही कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए सभी अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिए गए।



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