नशे का बहाना बना बीमा कंपनी ने किया क्लेम से इंकार, आयोग ने सुनाया फैसला

Sanjay Dhiman | Jun 22, 2025, 21:51 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को फटकार लगाई, जिन्होंने शराब और सिगरेट के सेवन का बहाना बनाकर एक उपभोक्ता का बीमा क्लेम निरस्त कर दिया। आयोग ने फरियादी को मय वाद व्यय के 2.41 लाख रुपये भुगतान करने के आदेश पारित किए है।

स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अक्सर दावा करती हैं कि मुश्किल घड़ी में वह ग्राहकों की मदद करेंगी। अस्पताल में भर्ती होने पर या गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान बीमा क्लेम उनका सहारा बनेगा। लेकिन कई बार बीमा कंपनियां बिना किसी ठोस कारण के क्लेम देने से मना कर देती हैं।



एक सामान्य बहाना जो बीमा कंपनियां इस्तेमाल करती हैं, वह है नशे की आदत का होना और इसके बारे में जानकारी न देना। हाल ही में, भोपाल में एक उपभोक्ता ने बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बीमा कंपनी ने क्लेम इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उपभोक्ता ने शराब और सिगरेट का सेवन किया था।



यह है पूरा मामला

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बीमा कंपनी का दावा

बीमा कंपनी का यह दावा था कि जन्मेश के इलाज के पर्चे में "सिगरेट और शराब सेवन" का उल्लेख था, जो कि बीमा पॉलिसी में सही जानकारी देने का उल्लंघन था। हालांकि, जन्मेश ने डॉक्टर से यह प्रमाण पत्र प्राप्त किया कि उन्होंने कभी भी शराब और सिगरेट का सेवन नहीं किया था। इसके बावजूद कंपनी ने उपभोक्ता की बातें खारिज कर क्लेम का भुगतान करने से इंकार कर दिया।



उपभोक्ता आयोग का फैसला देना होगा पूरा क्लेम

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बीमा पॉलिसी में नशे की जानकारी देना आवश्यक

बीमा पॉलिसी में शराब, सिगरेट या किसी अन्य नशे के बारे में जानकारी देना आवश्यक होता है। यदि कोई व्यक्ति नशे का सेवन करता है, तो बीमा कंपनी को इसके बारे में सूचित करना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर, भविष्य में जब कोई दावा किया जाएगा तो बीमा कंपनी इसका फायदा उठा सकती है।



इसके अलावा, बीमा कंपनियां इस जानकारी को आधार बनाकर प्रीमियम दर में बदलाव कर सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति नशे का सेवन करता है, तो बीमा प्रीमियम अधिक हो सकता है। हालांकि, बीमा पॉलिसी में दी गई जानकारी को गलत तरीके से प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।



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