मंडला में बनेगा टाइगर सफारी जू, सीएम मोहन यादव की घोषणा, तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिला 36 करोड़ का बोनस
सीएम मोहन यादव रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को मंडला पहुंचे। खैरी गांव के कार्यक्रम में उन्होंने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने मंडला में टाइगर सफारी जू बनाने की घोषणा की।
इस मौके पर मंच से तेंदूपत्ता बोनस भी बांटा गया। तेंदूपत्ता संग्राहक (जंगल से तेंदू पत्ते तोड़ने वाले लोग) इसके हकदार थे। ऐसे 9 लाख 4 हजार 126 लोगों को बोनस दिया गया। कुल रकम 36 करोड़ 17 लाख रुपए से ज्यादा की राशि बोनस के रूप में बांटी गई।
समझें क्या है पूरा मामला
सीएम मोहन यादव 4 अक्टूबर को मंडला पहुंचे थे। यहां 9 लाख से ज्यादा संग्राहकों को 36 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोनस मिला। वन समितियों को 26 करोड़ रुपए से ज्यादा का काष्ठ लाभांश मिला। जिले को 460 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात भी मिली। मंडला में टाइगर सफारी जू बनाने का एलान भी हुआ।
9 लाख से ज्यादा को एक साथ बोनस
बोनस मंड़ला जिले के 8 वन मंडलों (जंगल के प्रशासनिक इलाकों) के संग्राहकों को दिया गया। हर संग्राहक के हिस्से औसतन करीब 400 रुपए आए। 9 लाख से ज्यादा लोगों को एक साथ बोनस मिला।
काष्ठ लाभांश भी बंटा। यह रकम 84 वन समितियों के करीब 40 हजार सदस्यों को मिली। ये समितियां जंगल बचाने में वन विभाग की मदद करती हैं।
कुल राशि 26 करोड़ 56 लाख 53 हजार 929 रुपए रही। यानी हर सदस्य को औसतन करीब 6,600 रुपए मिले।
जनजातीय समुदाय पर क्या बोले सीएम?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति के पुजारी हैं, प्रदेश की धरोहर है। वन हम सबको प्राणवायु देते हैं। इनकी सुरक्षा, संवर्धन और प्रबंधन में जनजातियों का योगदान अतुलनीय है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय परिवारों को वाजिब हक दिलाना सरकार का संकल्प है। वनोपज (जंगल से मिलने वाली उपज) से जुड़ी आजीविका मजबूत की जाएगी। मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित हैं। सरकार जनजातीय नायकों के शौर्य को भी याद कर रही है। सांस्कृतिक विरासत बचाना भी उसकी जिम्मेदारी है।
460 करोड़ के कामों की सौगात
मुख्यमंत्री ने जिले को 74 विकास कार्यों की सौगात दी। इनकी कुल लागत करीब 460 करोड़ रुपए है। 47 कामों का भूमिपूजन हुआ। इनकी लागत 263 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
बाकी 27 कामों का लोकार्पण किया गया। इनकी लागत 197 करोड़ रुपए से ज्यादा है। सीएम ने साफ किया कि सरकार हर पहलू पर काम कर रही है। इसमें बुनियादी ढांचा, शिक्षा और रोजगार शामिल हैं।
नक्सलवाद और पढ़ाई पर क्या कहा?
ड्रॉपआउट दर (पढ़ाई छोड़ने वालों का अनुपात) पर भी सीएम बोले। उनके मुताबिक सांदीपनि विद्यालयों से इसे शून्य करने में सफलता मिली है। बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक पर लैपटॉप मिल रहा है। स्कूल में पहला स्थान पाने वालों को स्कूटी दी जा रही है।
मंडला मेडिकल कॉलेज की तैयारी
मंडला मेडिकल कॉलेज का निर्माण होने जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज के लिए रविवार को भूमिपूजन भी हुआ। सवाल उठता है, पढ़ाई के ये मौके जिले को क्या देंगे? जवाब सीधा है। जिले में ही इलाज और पढ़ाई की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है।
इन जगहों पर खुलेंगे नए कॉलेज?
मोहगांव और घुघरी में शासकीय महाविद्यालय खोले जाएंगे। यानी जिले में मेडिकल, नर्सिंग और सामान्य कॉलेज, तीनों की बात हुई है।
टाइगर सफारी जू क्यों बनेगा?
मंडला में टाइगर सफारी जू बनाया जाएगा। आखिर यह जू मंडला को क्या देगा? मकसद साफ है। पर्यटकों को जिले में ही वन्यजीव देखने की सुविधा मिलेगी।
लेकिन असली सवाल अभी बाकी है। जगह, लागत और समयसीमा की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पान और वनोपज से बढ़ेगी आय
मंडला में पान की खेती दोबारा शुरू की जाएगी। इसे स्थानीय लोगों की आय का अहम जरिया बनाया जाएगा। लघु वनोपज प्रोसेसिंग यूनिट भी मंडला में खुलेगी।
यह यूनिट सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अधीन होगी। जंगल की उपज पर टिके परिवारों के लिए यह नया रास्ता हो सकता है।
दूध उत्पादन का क्या है लक्ष्य?
मध्यप्रदेश में दूध उत्पादन की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करनी है। मंडला में जरूरत के हिसाब से दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जाएंगी। गौपालकों को दूध का उचित दाम दिलाने पर सरकार काम करेगी।
अब सबकी नजर इन एलानों के जमीन पर उतरने पर है।
- क्या सीएम मोहन यादव ने मंडला में किसी नए विकास कार्य की घोषणा की है?
हाँ, सीएम मोहन यादव ने मंडला में टाइगर सफारी जू बनाने की घोषणा की है और साथ ही 460 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात भी दी है। - मंडला में तेंदूपत्ता बोनस का लाभ किसे और कितनी राशि मिली?
मंडला में तेंदूपत्ता बोनस 9 लाख 4 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को वितरित किया गया, जिसमें कुल 36 करोड़ 17 लाख रुपए से अधिक की राशि शामिल है। - सीएम मोहन यादव ने जनजातीय समुदाय के बारे में क्या बयान दिया?
सीएम मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति के पुजारी हैं और उनकी सुरक्षा, संवर्धन और प्रबंधन में उनका योगदान अतुलनीय है, सरकार जनजातीय परिवारों को उनके वाजिब हक दिलाने के लिए कार्य कर रही है।