टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद दहशत में इंदौर के बिल्डर्स, 4 को मिली है पुलिस सुरक्षा
दरअसल, रविवार, 18 अक्टूबर को मुंबई में फिल्म एक्टर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग (firing on Tiger Shroff) हुई थी। इस हमले में उनकी जान बच गई। हालांकि, बॉलीवुड में चिंता का माहौल है। हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली है। इसका असर अब मुंबई तक सीमित नहीं है। मिनी मुंबई यानी इंदौर में भी रसूखदारों, खासकर बिल्डर्स के बीच चिंता बढ़ गई है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की धमकियां
बता दें कि इंदौर में फरवरी-मार्च के दौरान कई बिल्डर्स और रसूखदारों को अवैध वसूली के लिए फोन आए थे। यह फोन लॉरेंस बिश्नोई गैंग और हैरी बॉक्सर के नाम से आए थे। इसमें क्राइम ब्रांच इंदौर ने स्पेशल टीम बनाकर जांच भी की थी। इसके बाद कई आरोपी पकड़े गए। इसमें नागदा, उज्जैन का राजपाल चंद्रावत और योगेश भाटी भी थे। ये सभी लॉरेंस गैंग के साथ जुड़े थे।
इंदौर में इन सभी को दी गई धमकी
इंदौर में बिल्डर विवेक दम्मानी को पांच करोड़ की वसूली की धमकी मिल चुकी है जिसकी शिकायत पर उन्होंने केस दर्ज कराया। जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा दी है। इसमें बेटे को भी गोली मारने की धमकी दी गई थी।
इसके अलावा प्रॉपर्टी कारोबारी चेतन पंवार व उनके पार्टनर कुंवर सिंह भूरिया को दस करोड़ की वसूली की धमकी दी गई थी। कॉलेज संचालक रंजन मित्तल को धमकी दी गई थी। इसके साथ ही कारोबारी संजय मोगरा (जैन) से 15 करोड़ मांगे थे। साथ ही मेवाड़ अस्पताल संचालक विक्रम मेवड़ा से पांच करोड़ मांगे थे।
पुलिस ने चार को दी हुई है सुरक्षा
वहीं लॉरेंस गैंग की सक्रियता के बाद इंदौर में क्राइम ब्रांच पुलिस ने चार को सुरक्षा दी हुई है। दो-दो सशस्त्र पुलिसकर्मी इनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। इसमें दम्मानी, संजय मोगरा, रंजन मित्तल शामिल हैं। ये सभी पुलिस सुरक्षा में ही निकलते हैं। वहीं निजी स्तर पर भी ये सतर्कता बरत रहे हैं।
जिला कोर्ट ने कहा था, लॉरेंस गैंग के साथ आरोपी
जिला कोर्ट ने पुलिस के प्रतिवेदन और शासन के पक्ष के आधार पर कहा कि गैंग से जुड़े चंद्रावत व भाटी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि गंभीर संगठित अपराधों में सिर्फ दूसरे आरोपियों को जमानत मिलने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
दोनों जब दिल्ली की जेल में बंद थे, तब उन्होंने लॉरेंस गैंग से संपर्क किया था। साथ ही गैंग के साथ काम करने की इच्छा भी जताई थी। कोर्ट के मुताबिक यह बात दूसरे आरोपियों से अलग है और मामला गंभीर है। ऐसे संगठित अपराधों को देखते हुए दोनों को जमानत देना उचित नहीं होगा।
कौन हैं चंद्रावत और भाटी
बता दें कि दोनों के खिलाफ पहले भी कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। साल 2023 में एनआईए ने भी दोनों के खिलाफ जांच की थी। दोनों संगठित अपराधों में शामिल रहे हैं। उन्होंने वसूली के लिए खरगोन के दिलीप सिंह राठौर को भी धमकाया था। उन पर गोलियां भी चलवाई थीं।
इस मामले में राजपाल जेल में बंद था। अप्रैल में इंदौर पुलिस उसे जेल से रिमांड पर लेकर आई थी। वहीं, भाटी भी राजपाल के साथ जुड़ा हुआ था।