टीकमगढ़ के सरकारी स्कूल में मना बीजेपी का स्थापना दिवस, शिक्षक और डीईओ के बयान से मचा बवाल
News In short
- टीकमगढ़ के शासकीय प्राथमिक पाठशाला दरियापुरा में BJP का स्थापना दिवस मनाया गया।
- शिक्षक कन्हैयालाल ने छात्रों की कक्षा में पार्टी का झंडा लेकर फोटो खिंचवाई।
- तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद शुरू हुआ।
- शिक्षक का दावा है कि यह काम जिला शिक्षा अधिकारी के मोबाइल आदेश पर किया गया था।
- कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह ने शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।
News In Detail
स्कूल की कक्षा में उठा झंडा
सोमवार 06 अप्रैल को टीकमगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक पाठशाला दरियापुरा में एक ऐसी घटना हुई, जिसने शिक्षा और राजनीति की सीमाओं पर बहस छेड़ दी है। स्कूल परिसर में दोपहर के समय भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस मनाया गया। शिक्षक कन्हैयालाल और कुछ ग्रामीणों ने मिलकर पार्टी का झंडा हाथ में लिया और फोटो भी खिंचवाईं।
ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। वायरल फोटो में साफ दिख रहा है कि प्राथमिक शिक्षक कन्हैयालाल कक्षा के भीतर झंडा थामे खड़े हैं। बस इतनी सी बात ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है।
शिक्षक बोले, ऊपर से आया था आदेश
शिक्षक कन्हैयालाल ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने यह कार्यक्रम अपनी मर्जी से नहीं किया है। उनका दावा है कि टीकमगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी यानी डीईओ (District Education Officer) ने उन्हें मोबाइल पर निर्देश दिए थे।
आदेश था कि स्कूल में BJP का स्थापना दिवस मनाया जाए। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने बस वही किया जो उनसे कहा गया। इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी।
अब सवाल यह है कि अगर सच में ऐसा कोई आदेश था, तो वह कहां से आया और किसने दिया।
DEO का जवाब और उनकी फिसली जुबान
जब इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी हिम्मत सिंह चौहान से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। लेकिन साथ ही उन्होंने एक ऐसी बात भी कह दी जिसने मामला और उलझा दिया है।
उन्होंने कहा कि जिसकी सत्ता होती है, उसी के अनुसार काम करना पड़ता है। इस बयान ने सवाल खड़े कर दिए कि क्या शिक्षा विभाग में राजनीतिक दबाव में काम होता है।
कांग्रेस विधायक ने की FIR की मांग
टीकमगढ़ से कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि शैक्षिक संस्थाओं का राजनीतिकरण बिल्कुल गलत है। उनकी मांग है कि प्रशासन शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज करे। साथ ही उन्होंने यह भी इशारा किया कि जो भी इस कार्यक्रम के पीछे है उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
नियम क्या कहते हैं
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि सरकारी नियमों के तहत शासकीय स्कूलों को राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रखा जाना जरूरी है। किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार, झंडा या आयोजन स्कूल परिसर में नहीं होना चाहिए।
इसका मकसद है कि बच्चों को निष्पक्ष और संतुलित माहौल मिले। इस मामले में वह सीमा साफ तौर पर पार होती दिखती है।अब प्रशासन के सामने सवाल यह है कि शिक्षक के दावे की जांच हो, DEO के बयान की जवाबदेही तय हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।
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