टीकमगढ़ में स्वास्थ्य सिस्टम फेल: ऑक्सीजन की कमी से पिता की मौत, बेटे ने श्मशान में खाई कसम
News in Short
- टीकमगढ़ के जतारा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बुजुर्ग लंपू सिंह की दर्दनाक मौत हो गई।
- बेटे काशीराम ने पिता के अंतिम संस्कार के बाद श्मशान में भावुक वीडियो रिकॉर्ड किया।
- राख हाथ में लेकर बेटे ने सिस्टम को "खोखला" बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
- काशीराम ने कसम खाई कि अब किसी का पिता सुविधाओं के अभाव में नहीं मरेगा।
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े हुए।
News in Detail
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया। यहां एक बेटे ने अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी चिता की राख को हाथ में लिया। उसने कैमरे के सामने खड़े होकर जो कहा, वो आज हर उस इंसान का सवाल है जो सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटता है। मामला जतारा क्षेत्र के उदयपुरा गांव का है, जहां काशीराम नाम के युवक के पिता लंपू सिंह की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि सरकारी अस्पताल में वक्त पर ऑक्सीजन नहीं मिल सकी।
वीडियो में गुस्सा और दर्द
वीडियो में काशीराम ने अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि "यह मेरे पिता की राख नहीं, बल्कि सिस्टम की राख है।" उनका आरोप है कि सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है और व्यवस्था के खिलाफ उनका गुस्सा साफ दिख रहा है। काशीराम ने वीडियो में कहा कि "आज मेरे पिता गए हैं, कल किसी और का पिता मरेगा, किसी की मां विधवा होगी।" यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।
सरकारी सिस्टम पर सवाल
वीडियो में काशीराम ने तंज करते हुए कहा कि यह सरकारी सिस्टम की नाकामी है और वह खुद अपने पिता की राख लेकर कसम खा रहे हैं कि अब किसी का भी पिता ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं मरेगा। उन्होंने कहा कि "मैं कसम खा रहा हूं, किसी का भाई मजबूरी में नहीं मरेगा।" उनके इस बयान ने सिस्टम की खामियों को उजागर किया है।
सिस्टम की नाकामी पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया
काशीराम का यह वीडियो सख्त आलोचना कर रहा है, और यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं? क्या सरकार अपनी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करेगी, ताकि और किसी को ऑक्सीजन की कमी के कारण अपने प्रियजन को खोने का दर्द न सहना पड़े?
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी और जनता का बढ़ता गुस्सा
हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा वीडियो वायरल होने और गंभीर आरोप लगने के बाद भी जतारा अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पुख्ता जवाब नहीं आया है। गांव वालों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि करोड़ों के स्वास्थ्य बजट के बाद भी एक छोटे से गांव के आदमी को ऑक्सीजन के लिए क्यों तड़पना पड़ता है? यह घटना सीधे तौर पर हमारे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है।
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