TNCP ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज आनंद लिखार एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचे, बोले-अलग-अलग याचिकाओं से किया जा रहा टारगेट
नीरज लिखार ने फिर चुनौती दी
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (TNCP) के ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज आनंद लिखार हैं। वे भोपाल के चीफ सिटी प्लानर भी हैं। उन्होंने कास्ट सर्टिफिकेट की जांच के आदेश को फिर चुनौती दी है। इस बार मामला डिविजन बेंच के सामने पहुंचा है। बेंच में चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन हैं। लिखार की ओर से उनके वकील कोर्ट में पेश हुए। वकील ने कोर्ट के सामने अपनी दलील रखी।
उन्होंने कहा कि लिखार के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं लगाई जा रही हैं। इन याचिकाओं में एक ही अधिवक्ता वकील के रूप में सामने आ रहे हैं। लिखार की ओर से इसे उन्हें टारगेट किए जाने का आधार बताया गया।
जांच कमेटी तक मामला पहुंचने से पहले ही अपील
लिखार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सिंगल बेंच ने आदेश दिया है। इसके बाद उनका मामला हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को भेजा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो उन्हें फिर जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। उनका कहना है कि इससे उन्हें बार-बार यही प्रक्रिया दोहरानी पड़ेगी। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि मामला अभी नहीं भेजा गया है। सिंगल बेंच के आदेश के बावजूद मामला कमेटी तक नहीं पहुंचा है।
डिविजन बेंच ने अपील सुनवाई योग्य मानी
डिविजन बेंच ने फिलहाल अपील पर सुनवाई करने का फैसला लिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद तय की है। अभी कोर्ट ने लिखार को कोई राहत नहीं दी है। यानी कास्ट सर्टिफिकेट की जांच से राहत मिलेगी या नहीं, तय नहीं है। अगली सुनवाई में लिखार की आपत्तियों पर चर्चा होगी। सिंगल बेंच के आदेश के असर पर भी सुनवाई होगी।
पहले भी मिली थी फौरी राहत
यह पहली बार नहीं है, जब लिखार इस मामले में हाईकोर्ट पहुंचे हैं। इससे पहले सिंगल बेंच ने 12 मार्च 2026 को आदेश दिया था। कोर्ट ने उनके कास्ट सर्टिफिकेट की जांच के निर्देश दिए थे। यह जांच हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी से होनी थी। उस समय लिखार को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने डिविजन बेंच में अपील की थी। डिविजन बेंच ने नेचुरल जस्टिस के आधार पर फैसला लिया है। मामला दोबारा सिंगल बेंच के पास भेज दिया गया था।
दोबारा सुनवाई में भी जांच का आदेश
डिविजन बेंच के निर्देश पर जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई की। इस बार नीरज आनंद लिखार को पूरा पक्ष रखने का मौका मिला। वहीं, 29 जून 2026 को कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कास्ट सर्टिफिकेट की जांच के निर्देश दिए। यह जांच हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को करनी है। कमेटी को 90 दिनों में जांच पूरी करने को कहा गया। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के कुमारी माधुरी पाटिल फैसले का पालन होगा।
भाई के कास्ट सर्टिफिकेट से विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद की शुरुआत अजय लिखार के प्रमाण पत्र से हुई। अजय, नीरज आनंद लिखार के सगे भाई हैं। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, अजय के प्रमाण पत्र की जांच हुई थी। हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी ने यह जांच की थी। कमेटी ने जांच के बाद उनका प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। लेकिन 8 अप्रैल 2021 को हाईकोर्ट ने फैसला बरकरार रखा। इसके बाद याचिकाकर्ता आदित्य ठाकुर ने भी मांग रखी। उन्होंने नीरज लिखार के कास्ट सर्टिफिकेट की जांच मांगी।
एक ही परिवार और समान पृष्ठभूमि का तर्क
याचिकाकर्ता ने दोनों भाइयों को लेकर तर्क दिया है। दोनों भाई एक ही परिवार और वंश से आते हैं। दोनों का मूल स्थान भी एक ही है। दोनों के कास्ट सर्टिफिकेट भी लगभग एक समय जारी हुए थे। दोनों प्रमाण पत्र समान तथ्यों के आधार पर जारी हुए थे। ऐसे में एक भाई का प्रमाण पत्र जांच में रद्द हुआ। दूसरे भाई के प्रमाण पत्र की जांच नहीं हुई। इसी बात को लेकर सवाल उठाया गया है। इसी आधार पर नीरज लिखार के प्रमाण पत्र की जांच की मांग की गई। यह जांच हाई लेवल स्क्रूटनी कमेटी से कराने की मांग हुई है।
सिंगल बेंच ने क्या कहा था
जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि जांच से लिखार को नुकसान नहीं होगा। जांच से उनके खिलाफ कोई पूर्वाग्रह भी नहीं होगा। कोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। वे जांच के दौरान जरूरी दस्तावेज भी पेश कर सकेंगे। कोर्ट ने इसी आधार पर जांच के निर्देश दिए थे। प्रमाण पत्र का सत्यापन 90 दिनों में पूरा करना था।
अब असली लड़ाई जांच से बचने की
अब नीरज आनंद लिखार की अपील इसी मुद्दे पर टिकी है। सवाल है कि मामला कमेटी तक पहुंचेगा या नहीं। फिलहाल केस हाई लेवल स्क्रूटनी कमेटी को नहीं भेजा गया है। डिविजन बेंच ने अपील पर सुनवाई तय की है। अब अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी। इस सुनवाई में आगे की स्थिति साफ हो सकती है। लिखार को फिलहाल जांच से राहत मिलेगी या नहीं, यह तय होगा।
अगर राहत नहीं मिली, तो उन्हें कमेटी के सामने जाना होगा। उन्हें अपनी जाति संबंधी दावे के दस्तावेज भी देने होंगे।
FAQs
- नीरज आनंद लिखार ने कास्ट सर्टिफिकेट के जांच आदेश को क्यों चुनौती दी है?
नीरज आनंद लिखार का कहना है कि उनके खिलाफ विभिन्न याचिकाएं एक ही अधिवक्ता द्वारा लगाई जा रही हैं, जो उन्हें टारगेट करने का गंभीर संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि मामला हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के पास चला गया, तो उन्हें बार-बार जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। - डिविजन बेंच ने नीरज लिखार की अपील पर क्या निर्णय लिया है?
डिविजन बेंच ने नीरज लिखार की अपील को सुनवाई योग्य मानते हुए एक सप्ताह बाद सुनवाई तय की है। फिलहाल उन्हें कास्ट सर्टिफिकेट की जांच से कोई राहत नहीं दी गई है। - अगली सुनवाई में क्या मुद्दे उठाए जाएंगे?
अगली सुनवाई में नीरज लिखार की आपत्तियों पर चर्चा होगी और यह स्पष्ट किया जाएगा कि सिंगल बेंच का आदेश किस प्रकार लागू होगा। इसके साथ ही यह भी तय होगा कि लिखार को हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के समक्ष अपनी जाति संबंधी दावे का पूरी तरह से रिकॉर्ड पेश करना होगा या नहीं।