TNCP के ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज आनंद लिखार को हाईकोर्ट से राहत, जाति प्रमाण पत्र विवाद में भाई की अपील से जुड़ा मामला
सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किए। साथ ही आदेश दिया कि फिलहाल नीरज लिखार के खिलाफ कोई कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
1956 में अमरावती से भोपाल आया था परिवार
सुनवाई के दौरान लिखार की ओर से उनके पारिवारिक इतिहास और जातिगत पृष्ठभूमि को लेकर भी दलीलें दी गईं। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नीरज लिखार के पिता वर्ष 1956 के आसपास महाराष्ट्र के अमरावती से भोपाल आए थे और यहीं बस गए थे। नीरज आनंद लिखार का जन्म भी मध्यप्रदेश में हुआ है। उनकी ओर से यह तर्क भी दिया गया कि हलबा जाति महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश, दोनों राज्यों में अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल है। इसलिए उनके जाति प्रमाण पत्र पर उठाए जा रहे सवालों की जांच में इन तथ्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
भाई का मामला भी हाईकोर्ट में लंबित
लिखार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनके भाई अजय लिखार के जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है। इस मामले में रिट अपील क्रमांक WA 509/2021 दायर की गई है और उनके भाई को अंतरिम राहत भी मिली हुई है। अधिवक्ता ने इसी आधार पर दलील दी कि परिवार के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवादों को अलग-अलग देखने के बजाय दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए।
कोर्ट ने दोनों मामलों को जोड़ने का दिया आदेश
डिविजन बेंच के सामने यह दलील भी रखी गई कि याचिकाकर्ता आदित्य ठाकुर इस विवाद से सीधे प्रभावित व्यक्ति नहीं हैं और उन्होंने बिना पर्याप्त आधार के कानूनी कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने इस पहलू के साथ इस तथ्य पर भी गौर किया कि नीरज लिखार के भाई की अपील में भी हलबा जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा विवाद शामिल है। दोनों मामलों में समान मुद्दे होने के कारण कोर्ट ने इन्हें आपस में जोड़ने का आदेश दिया।
फिलहाल कठोर कार्रवाई पर रोक
कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। साथ ही निर्देश दिया है कि इस बीच नीरज लिखार के खिलाफ कोई कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। इस आदेश से उन्हें फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अब दोनों मामलों को जोड़कर आगे की सुनवाई की जाएगी।
भाई का प्रमाण पत्र रद्द होने से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, नीरज लिखार के सगे भाई अजय लिखार का जाति प्रमाण पत्र हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी ने जांच के बाद रद्द कर दिया था। इस फैसले को हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2021 को बरकरार रखा था। इसी आधार पर याचिकाकर्ता आदित्य ठाकुर ने नीरज लिखार के जाति प्रमाण पत्र की भी जांच कराने की मांग की थी। उनका तर्क था कि दोनों भाई एक ही परिवार, वंश और मूल स्थान से आते हैं। ऐसे में एक भाई का प्रमाण पत्र गलत पाए जाने के बाद दूसरे भाई के जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन भी जरूरी है।
जस्टिस विशाल मिश्रा ने दिए थे 90 दिन में जांच के आदेश
इस मामले में जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने 29 जून 2026 को दोबारा सुनवाई के बाद नीरज लिखार के जाति प्रमाण पत्र की जांच हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी से कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कुमारी माधुरी पाटिल मामले में तय प्रक्रिया के अनुसार 90 दिनों के भीतर सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए थे।
इससे पहले लिखार को सुनवाई का अवसर नहीं मिलने के कारण डिविजन बेंच ने 20 मार्च को पूर्व आदेश रद्द कर दिया था और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सिंगल बेंच के पास भेज दिया था। अब सिंगल बेंच के आदेश को फिर चुनौती दिए जाने के बाद मामला दोबारा डिविजन बेंच के सामने पहुंचा है।
राहत मिली, लेकिन जाति प्रमाण पत्र पर फैसला बाकी
हाईकोर्ट के ताजा आदेश से नीरज आनंद लिखार को फिलहाल कठोर कार्रवाई से राहत मिली है। हालांकि, कोर्ट ने न तो उनके जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित किया है और न ही जांच की मांग खारिज की है। दोनों मामलों को जोड़ने के आदेश के बाद अब नीरज लिखार और उनके भाई के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवादों की सुनवाई एक साथ हो सकेगी। ऐसे में अगली सुनवाई और हाईकोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा।