ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों को बहरेपन का खतरा, ड्राइवरों में बढ़ा डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन

Aman Vaishnav | Mar 11, 2026, 09:30 IST
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भोपाल के वैज्ञानिकों ने ट्रैक्टर ड्राइवरों पर एक चौंकाने वाली रिसर्च की है। 20 साल से ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों की सुनने की क्षमता घट रही है। इस समस्या के कारण किसानों को सामान्य बातचीत में भी दिक्कत आती है।

News in Short

  • 20 साल ट्रैक्टर चलाने पर सुनने की शक्ति (बहरापन) 7.1% कम हो जाती है।
  • ऑफिस में काम करने वालों में यह जोखिम सिर्फ 0.2% है।
  • ट्रैक्टर ड्राइवरों में बहरेपन का खतरा 35 गुना अधिक पाया गया।
  • रिसर्च में 55 ड्राइवरों के स्वास्थ्य की गहन जांच की गई।
  • बाएं कान पर धुएं और शोर का सबसे बुरा असर पड़ता है।

News In Detail

खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले किसानों की सेहत पर अब बड़ा संकट मंडरा रहा है। ट्रैक्टर की तेज आवाज सिर्फ कानों को ही सुन्न नहीं कर रही है। यह साइलेंट किलर की तरह उनके मानसिक सुकून को भी छीन रही है। वैज्ञानिकों ने इस गंभीर खतरे को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।



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20 साल से ज्यादा ट्रैक्टर चलाना समस्या

ताजा रिसर्च के मुताबिक, जिन किसानों ने 20 साल या उससे ज्यादा समय तक ट्रैक्टर चलाया है उनकी सुनने की क्षमता में काफी कमी आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार इन किसानों को सामान्य बातचीत करने में भी काफी दिक्कत होती है।



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सुनने की क्षमता में 7.1% तक की कमी

अब अगर ऑफिस के कामकाजी लोगों से तुलना की जाए तो यह जोखिम बहुत ज्यादा है। दफ्तरों में यह जोखिम महज 0.2% है। वहीं ट्रैक्टर चलाने वालों में यह बढ़कर 7.1% तक पहुंच जाता है। यानी 35 गुना ज्यादा।



मानसिक स्वास्थ्य पर भी डाल रही असर

इस रिसर्च को केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई) भोपाल के वैज्ञानिकों ने किया है। इसमें 55 ट्रैक्टर ड्राइवरों का अध्ययन किया गया है। इन ड्राइवरों ने 5 से 43 साल तक ट्रैक्टर चलाया है। इस जांच में यह भी सामने आया है कि यह समस्या सिर्फ सुनने तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। कई ड्राइवरों को डिप्रेशन, एंजाइटी और तनाव जैसी मानसिक बीमारियां हो रही हैं।



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चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायत

रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक 55 में से 45 ड्राइवरों के बाएं कान की सुनने की क्षमता दाएं कान के मुकाबले कम थी। इनमें से 15-20 ड्राइवरों को ट्रैक्टर चलाने का 20 साल से ज्यादा अनुभव है। इनकी स्थिति काफी गंभीर है। हर तीसरे ड्राइवर को चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायत भी है।



अब ट्रैक्टर की डिजाइन पर बात करें तो दायां कान कम प्रभावित हुआ लेकिन बायां कान ज्यादा असर में आया है। यह इसलिए क्योंकि कम हाइट वाले ड्राइवरों को धुआं निकलने वाले पाइप के पास बैठना पड़ता है। इससे बाएं कान पर ज्यादा असर होता है।



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