रद्द करने के बाद रेलवे ने चला दी वही ट्रेन, कोर्ट ने कहा-यात्री को ब्याज सहित लौटाओ पैसे

Aman Vaishnav | Sept 06, 2026, 12:00 IST
रद्द करने के बाद रेलवे ने चला दी वही ट्रेन
रेलवे ने ट्रेन कैंसिल करने के बाद उसी ट्रेन को दोबारा चला दिया, तो कंज्यूमर कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रेलवे को यात्री का पूरा टिकट किराया 7% ब्याज के साथ देने को कहा। इसके अलावा हर्जाना और मुकदमे का खर्च भी देने का आदेश दिया।

यदि रेलवे पहले आपकी ट्रेन कैंसिल होने का मैसेज भेजे और बाद में वही ट्रेन दोबारा चला दे, तो इसके नुकसान की भरपाई यात्री की जेब से नहीं होगी। भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक बेहद अहम फैसले में रेलवे की रिफंड कटौती को पूरी तरह गलत माना है।



अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि यात्री ने रेलवे के आधिकारिक मैसेज पर भरोसा करके ही दूसरा टिकट बुक किया था। ऐसे में बाद में ट्रेन दोबारा शुरू होने का हवाला देकर टिकट के पैसे काटना बिल्कुल अनुचित है।



6 अगस्त 2026 को आए इस फैसले में आयोग ने रेलवे और आईआरसीटीसी (IRCTC) को निर्देश दिया कि वे यात्री का काटा गया पैसा 7% सालाना ब्याज के साथ वापस करें।



इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई परेशानी के बदले 15 हजार रुपए हर्जाना और 5 हजार रुपए केस लड़ने का खर्च देने का भी आदेश सुनाया गया।



मैसेज मिलते ही कराया दूसरा टिकट

दरअसल भोपाल निवासी भवानी शंकर उर्फ बीएस ठाकुर अपने पूरे परिवार के साथ आगरा घूमने गए थे। भोपाल वापस लौटने के लिए उन्होंने 24 सितंबर 2023 की शान-ए-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट बुक कराया था। इस टिकट के लिए उन्होंने कुल 4 हजार160 रुपए चुकाए थे।



यात्रा की तारीख से करीब 15 दिन पहले, यानी 9 सितंबर को रेलवे की तरफ से उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि ट्रेन कैंसिल कर दी गई है। परिवार के साथ सफर करना था, इसलिए वे ज्यादा जोखिम नहीं ले सकते थे।



इसके बाद भवानी शंकर ने तुरंत अगले ही दिन (10 सितंबर) केरला एक्सप्रेस में नए टिकट बुक कर लिए। उन्हें पूरा भरोसा था कि जब ट्रेन खुद रेलवे ने निरस्त की है, तो पहली टिकट का पूरा पैसा अपने आप वापस मिल जाएगा।



ट्रेन शुरू हुई पर यात्री को खबर नहीं दी

इस मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि रेलवे ने 11 सितंबर 2023 को पहली ट्रेन को दोबारा चलाने का फैसला ले लिया था। यात्री के वकील ललित कुमार गुप्ता ने फोरम को बताया कि ट्रेन रद्द होने की जानकारी तो यात्री को मैसेज से मिल गई थी, लेकिन ट्रेन के दोबारा शुरू होने की कोई भी सूचना रेलवे ने यात्री तक नहीं पहुंचाई।



चूंकि यात्री पहले ही दूसरी ट्रेन में बुकिंग करा चुका था, इसलिए उसने पहली टिकट के पूरे रिफंड के लिए डीआरएम ऑफिस और रेलवे के बड़े अफसरों से गुहार लगाई।



काफी चक्कर काटने के बाद रेलवे ने 4 हजार 160 रुपए में से केवल 2 हजार 50 रुपए ही लौटाए। 2 हजार110 रुपए कैंसिलेशन चार्ज के नाम पर काट लिए।



रेलवे की दलील और फोरम का सख्त रुख

रिफंड काटने के पीछे रेलवे ने यह तर्क दिया कि ट्रेन तो अपने तय समय पर चली थी। चूंकि यात्री ने ट्रेन बहाल होने के बाद टिकट कैंसिल करने का अनुरोध किया, इसलिए सिस्टम ने सामान्य नियमों के मुताबिक कैंसिलेशन चार्ज काट लिया।



वहीं IRCTC ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह सिर्फ टिकट बुक करने का जरिया है। रिफंड के नियम टीडीआर (TDR Process) के तहत लागू होते हैं।



वहीं उपभोक्ता आयोग ने रेलवे के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने साफ कहा कि यात्री ने अपनी मर्जी से टिकट नहीं छोड़ा था।



रेलवे के रद्द करने वाले मैसेज की वजह से ही यात्री को मजबूरी में दूसरी ट्रेन चुननी पड़ी थी। गलती रेलवे के सिस्टम की थी, इसलिए यात्री पर चार्ज थोपना पूरी तरह गलत है।



यात्री के वकील ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि यह फैसला देश के लाखों रेल यात्रियों के हक में है। इससे रेलवे की उस बड़ी नीतिगत खामी पर सवाल उठा है, जहां ट्रेन कैंसिल करने के बाद दोबारा चलाने पर रिफंड के साफ नियम तय नहीं थे।



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