पूर्व जज गिरिबाला की जमानत फिर अटकी! दहेज हत्या की धारा हटने के दावे पर CBI ने क्या कहा?
दहेज हत्या की धाराएं हटने की बात पर CBI ने जताई आपत्ति
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह (Giribala Singh ) की जमानत पर गुरुवार 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच के सामने CBI ने गिरिबाला के संशोधित जमानत आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराई। सुनवाई में सबसे अहम बात यह सामने आई कि गिरिबाला की ओर से आवेदन में दहेज हत्या की धारा 80(2) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 अलग किए जाने की जो बात कही गई थी, उसे CBI ने गलत बताया है।
CBI ने कहा, धारा 80(2) हटाई नहीं गई
CBI की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह कहना सही नहीं है कि गिरिबाला के खिलाफ दहेज हत्या की धारा 80(2) हटा दी गई है। CBI ने बताया कि जांच के दौरान आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी धारा 108 जरूर जोड़ी गई है। कोर्ट ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया और संशोधित जमानत आवेदन में फिलहाल केवल धारा 108 जोड़े जाने वाले हिस्से को स्वीकार किया। यानी गिरिबाला की ओर से दहेज हत्या की धाराएं अलग होने का दावा फिलहाल सही नहीं माना गया।
90 दिन की जांच पूरी होने का हवाला देकर मांगी जमानत
गिरिबाला की ओर से अधिवक्ता ने जमानत के लिए दलील देते हुए कहा कि जांच शुरू हुए 90 दिन से ज्यादा समय हो चुका है। उन्होंने संविधान के आर्टिकल 21 का हवाला देते हुए कहा कि जांच की अधिकतम सीमा 90 दिन तय है। कोर्ट को बताया गया कि गिरिबाला के सभी रिश्तेदारों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद वह अब तक जेल में हैं। दलील दी गई कि CBI की जांच अगले दो साल तक भी लंबित रहने की बात कही जा सकती है, इसलिए गिरिबाला को अब जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
CBI बोली, जांच अभी खत्म नहीं हुई
CBI ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। आरोपियों के मोबाइल फोन का डाटा एक्सट्रैक्ट करने की प्रक्रिया और CCTV के DVR की जांच से जुड़ी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। CBI ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के निर्देश के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और जरूरत पड़ने पर जांच में आगे और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। ऐसे में अभी जांच पूरी होने का दावा नहीं किया जा सकता।
1154 पन्नों के जवाब में CBI पहले ही जता चुकी है विरोध
इससे पहले CBI गिरिबाला की जमानत का विरोध करते हुए हाई कोर्ट में 1154 पन्नों का जवाब दाखिल कर चुकी है। इसमें 62 गवाहों के बयान, कॉल ट्रांसक्रिप्ट, बैंक रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। CBI ने गिरिबाला पर ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, बेटे समर्थ का पक्ष लेने और जांच प्रभावित करने की आशंका से जुड़े आरोप लगाए हैं। जांच में ट्विशा की मौत से पहले की बातचीत, मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज को भी शामिल किया गया है।
संशोधन के लिए दो दिन, फिर बुधवार को सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गिरिबाला की ओर से जमानत आवेदन को दोबारा संशोधित करने के लिए दो दिन का समय दिया है। ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma ) के पिता की ओर से जमानत का विरोध करते हुए दाखिल आवेदन में भी संशोधन किया जाना है। दोनों पक्षों के आवेदन में जरूरी बदलाव के बाद अब मामले की अगली सुनवाई बुधवार को दोपहर 2:30 बजे होगी। इस तरह गिरिबाला की जमानत पर फैसला एक बार फिर आगे बढ़ गया है और अगली सुनवाई में संशोधित आवेदनों के आधार पर बहस होगी।