ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: समर्थ ने लगाए कई आरोप, पूर्व जज गिरिबाला ने कोर्ट में रखी अनोखी मांग
समझें क्या है पूरा मामला...
- ट्विशा शर्मा के मामले में पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की CBI रिमांड पूरी हो गई है।
- कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
- आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने सीबीआई पर रिलीफ स्प्रे न देने का आरोप लगाया है।
- पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट से अपनी सुरक्षा की मांग की है।
- समर्थ सिंह ने वकील अनुराग श्रीवास्तव पर मारपीट का आरोप लगाया है।
ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। मंगलवार, 02 जून को पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की सीबीआई रिमांड पूरी हो गई है।
इसके बाद जांच एजेंसी ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
सीबीआई ने इस बार दोनों की और रिमांड नहीं मांगी। हालांकि जांच एजेंसी ने कोर्ट में यह साफ कर दिया कि अगर आगे जरूरत पड़ी, तो दोनों आरोपियों को फिर से रिमांड पर लिया जा सकता है।
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आरोपियों ने लगाए गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में काफी ड्रामा देखने को मिला। आरोपियों और उनके वकीलों की तरफ से सीबीआई की जांच और सुरक्षा को लेकर कई बातें कही गईं।
समर्थ के पैर में चोट और रिलीफ स्प्रे का विवाद
समर्थ के वकील एनॉश जॉर्ज कार्लो ने कोर्ट में सीबीआई पर आरोप लगाया। वकील ने कहा कि कि मंगलवार सुबह जब वे समर्थ से मिले तो उसके पैर में चोट थी। वकील का आरोप था कि सीबीआई उसे एक रिलीफ स्प्रे तक नहीं दे रही थी।
साथ ही मेडिकल में भी इस चोट को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था। इस पर समर्थ ने खुद बताया कि पिछली पेशी के दौरान एक मीडियाकर्मी का पैर उसके पैर पर पड़ गया था। इसकी वजह से उसे यह चोट लगी थी।
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पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने जताई नाराजगी
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में सीबीआई के रवैये पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि
मैं एक बुजुर्ग महिला हूं। सीन रीक्रिएशन के दौरान सीबीआई मुझे छत पर ले गई। वहां मुझसे बार-बार सवाल पूछती रही। एजेंसी ने जानबूझकर अपनी गाड़ी मेरे घर से तीन मकान दूर खड़ी की थी। इससे मुझे बहुतपरेशानी हुई। मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
वकील पर मारपीट का आरोप
सुनवाई के दौरान समर्थ सिंह ने एक और बड़ा दावा किया। समर्थ ने कहा कि जबलपुर में एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने उसके साथ मारपीट की और गालियां दीं। इस पर कोर्ट ने तुरंत पूछा कि अनुराग श्रीवास्तव कौन हैं और उन्हें सामने बुलाने को कहा।
एडवोकेट अंकुर पांडे ने कोर्ट को बताया कि अनुराग हाईकोर्ट में ट्विशा के पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे हैं। इसके बाद अनुराग श्रीवास्तव ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा।
अनुराग ने कहा कि मैं ट्विशा का वकील हूं। जबलपुर जिला कोर्ट नंबर 32 में समर्थ छिपा हुआ था। वहां की लाइट बंद थी, लेकिन एसी और पंखे चल रहे थे।
कमरे में दो जूनियर वकील और दो रीडर भी थे। मैंने 30 हजार रुपए के इनामी आरोपी को पकड़ा था। उसके साथ कोई मारपीट नहीं हुई है। कोर्ट चाहे तो वहां के सीसीटीवी फुटेज चेक कर सकती है।
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पूर्व जज गिरिबाला सिंह की मांगी
गिरिबाला सिंह ने कोर्ट के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और अपर सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं।
इस दौरान उन्होंने कई अपराधियों को कड़ी सजा सुनाई है। इनमें से कई लोग इस समय जेल में बंद होंगे। ऐसे में उनकी और समर्थ की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
इसलिए उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई कि उन्हें जेल में एक अलग सेल में रखा जाए।
गिरिबाला सिंह का करियर
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह का भोपाल की अदालतों में एक लंबा कार्यकाल रहा है। वे लगभग 19 महीने तक भोपाल की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहीं।
साथ ही फरवरी 2023 में रिटायर हुईं। इससे पहले सितंबर 2015 से नवंबर 2017 तक उन्होंने भोपाल जिला अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में काम किया था।
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जज के रूप में गिरिबाला सिंह के फैसलों का रिकॉर्ड
| पद | कुल मामले | निपटाए गए क्रिमिनल केस | दोषियों की संख्या | बरी हुए लोग | मुख्य फैसले |
| प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश | 1129 (अपील, ट्रांसफर याचिकाएं, क्लेम आदि) | 56 (सेशन ट्रायल) | 27 आरोपी | 29 आरोपी | 12 आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास |
| अपर सत्र न्यायाधीश | 190 मामले आए | 31 क्रिमिनल केस | 12 आरोपी | - | 1 को हत्या में उम्रकैद, पॉक्सो (POCSO) के 22 मामलों में 10 को सजा |
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
- दुष्कर्म (Rape): चार मामलों में फैसला सुनाया गया, जिनमें सभी आरोपी बरी हुए।
- अन्य मामले: मारपीट, धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने के एक-एक मामले में भी आरोपियों को बरी किया गया।
- छीनाझपटी: एक मामले में आरोपी को उतनी ही सजा सुनाई गई, जितनी अवधि उसने न्यायिक अभिरक्षा में पहले ही बिता ली थी।