ट्विशा शर्मा केस: हाईकोर्ट में बड़ी सुनवाई आज, रिटायर्ड जज गिरिबाला की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Sanjay Dhiman | May 27, 2026, 08:29 IST
Photograph: (the sootr)
ट्विशा शर्मा मौत मामले में आज जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। शासन ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। CBI अब कॉल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और केस डायरी की गहराई से जांच कर रही है।

ट्विशा शर्मा सुसाइड केस अब और ज्यादा गंभीर होता दिख रहा है। आज बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में इस केस पर अहम सुनवाई होगी। मामला रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश शासन और ट्विशा के पिता ने जमानत का विरोध किया है।



शासन की तरफ से कोर्ट में बड़ा दावा किया गया था। सरकार ने कहा कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। अब पूरे मामले पर हाईकोर्ट का रुख बेहद अहम माना जा रहा है। देश में हाईप्रोफाइल मामलों पर लोगों की नजर वैसे भी हमेशा रहती है।



पिछली सुनवाई में क्या हुआ था

इस मामले की पिछली सुनवाई 25 मई को हुई थी। तब गिरिबाला सिंह के वकील ने जवाब दाखिल करने का समय मांगा था। वकील मृगेंद्र सिंह ने कोर्ट में अपनी दलील रखी थी। उन्होंने कहा था कि जरूरी दस्तावेज अभी तक नहीं मिले हैं।



इसके बाद हाईकोर्ट ने दो दिन का समय दिया था। अब बुधवार को मामले पर फिर सुनवाई होने जा रही है। ट्विशा परिवार की तरफ से एडवोकेट पीयूष तिवारी पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।



जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित

इस केस में अब जांच एजेंसियां डिजिटल सबूतों पर फोकस कर रही हैं। पुलिस ने भोपाल कोर्ट में इस संबंध में जवाब पेश किया है। पुलिस ने बताया कि मोबाइल नंबरों की CDR सुरक्षित रखी जा रही है। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को आधिकारिक पत्र भेजे गए हैं।



परिवार की तरफ से कोर्ट में बड़ा दावा भी किया गया। आरोप लगाया गया कि मौत के बाद कई नंबरों पर कॉल हुए। बताया गया कि कुल 46 नंबरों पर बातचीत हुई थी।



कुछ नंबर जांच एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों से जुड़े बताए गए। अब जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा खंगाल रही हैं। आजकल हर बड़ा केस मोबाइल डेटा पर ही टिक जाता है।



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12 मई से शुरू हुआ पूरा विवाद

ट्विशा शर्मा का शव 12 मई को घर में मिला था। पुलिस को शव फंदे से लटका हुआ मिला था। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। परिवार ने कई गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद 15 मई को गिरिबाला सिंह ने कोर्ट का रुख किया। उन्होंने भोपाल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।



फिर 22 मई को मामले में एक और बड़ी कार्रवाई हुई। गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। जबलपुर कोर्ट से गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक और संवेदनशील बन गया।



CBI ने की गिरिबाला सिंह से पूछताछ

मामले की गंभीरता देखते हुए CBI ने जांच संभाल ली है। मंगलवार को CBI की टीम ने कई अहम बयान दर्ज किए। टीम ने गिरिबाला सिंह से पूछताछ भी की। उनका बयान आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड किया गया।



इसके बाद CBI टीम 3 EME सेंटर भी पहुंची। वहां ट्विशा के परिवार से जानकारी जुटाई गई। दूसरी टीम पुलिस कमिश्नर कार्यालय भी गई थी। CBI ने पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात की। जांच एजेंसी ने SIT से केस डायरी भी मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती डायरी अधूरी पाई गई थी। इसके बाद जरूरी जानकारी जोड़ने के निर्देश दिए गए। देर रात पूरी केस डायरी CBI को सौंप दी गई।



CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड पर भी सुनवाई

इस मामले में CCTV फुटेज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। भोपाल जिला कोर्ट में इस पर अलग आवेदन दायर किए गए हैं। ट्विशा परिवार ने CDR सुरक्षित रखने की मांग की थी। वहीं गिरिबाला सिंह ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की।



SIT ने कोर्ट में बताया कि जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित किए जा रहे हैं। 12 से 20 मई तक की CDR संरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी मिलने के बाद उसे केस डायरी में जोड़ा जाएगा। फिर यह रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किया जाएगा।



दहेज मांग के आरोप भी जुड़े

CBI ने सोमवार रात FIR दर्ज की थी। इस FIR में कई गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। FIR में दहेज मांगने का आरोप भी जोड़ा गया है। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। अब जांच एजेंसी हर पहलू को बारीकी से जांच रही है। मामले का सामाजिक और कानूनी असर दोनों बड़ा माना जा रहा है।



क्या बढ़ सकती हैं गिरिबाला सिंह की मुश्किलें?

कानूनी जानकार मानते हैं कि यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है। अगर कोर्ट जमानत पर सख्त रुख अपनाता है तो मुश्किल बढ़ सकती है। दूसरी तरफ बचाव पक्ष लगातार अपनी दलीलें पेश कर रहा है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हुई है। देश में हाईप्रोफाइल केस अक्सर राजनीतिक बहस भी बन जाते हैं। यह मामला भी अब वैसा ही रूप लेता दिखाई दे रहा है।



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