ट्विशा शर्मा मौत केस में बड़ा मोड़, गिरिबाला सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत खारिज होने को दी चुनौती

Neel Tiwari | Nov 07, 2026, 17:09 IST
ट्विशा मौत मामले में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई जमानत याचिका
Former judge Giribala Singh moves Supreme Court after bail rejection in Twisha death case
ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका डायरी नंबर 70695/2026 से दर्ज हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, याचिका 6 नवंबर को शाम 6:31 बजे रिकॉर्ड में आई। हालांकि, याचिका में कुछ तकनीकी खामियां (डिफॉल्ट) सामने आई हैं।

इसके चलते फिलहाल इसे किसी जज की कॉज लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। जरूरी सुधार होने के बाद जल्द सुनवाई होने की संभावना है।



ट्विशा के पिता भी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे कानूनी लड़ाई

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके हैं। उन्होंने डायरी नंबर 58446/2026 से ट्रांसफर पिटीशन दायर की है। इसमें भोपाल में चल रहा गिरिबाला सिंह का ट्रायल दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर भोपाल में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा चुका है। यानी फिलहाल गिरिबाला सिंह के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई भोपाल में रुकी हुई है। अब उनकी जमानत याचिका भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। ऐसे में दो अलग-अलग कानूनी लड़ाइयां एक साथ आगे बढ़ सकती हैं।



हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी गिरिबाला सिंह की जमानत?

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को फैसला सुनाया था। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। गिरिबाला सिंह 2 जून 2026 से जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते हुए जांच से जुड़े कई पहलुओं को देखा था। इनमें ट्विशा की WhatsApp चैट, फोन कॉल, CCTV फुटेज और दोनों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट शामिल थीं।



मौत से पहले की चैट और आखिरी फोन कॉल बनीं अहम

CBI जांच के मुताबिक, ट्विशा ने मौत से पहले परिवार और ननद रशी अबरोल को संदेश भेजे। इनमें पति समर्थ सिंह पर मानसिक प्रताड़ना, अपमान और पैसों के लिए दबाव बनाने के आरोप थे। 9 मई की चैट में पति द्वारा पितृत्व पर सवाल उठाने की बात सामने आई थी। 11 मई को ट्विशा ने मां को घर में घुटन महसूस होने की बात बताई थी। 12 मई की रात उसने ननद को भी संदेश भेजा था। इसमें लिखा था कि उसे अभी शांति से मरने दिया जाए। इसके बाद ट्विशा ने अपने पिता और मां से फोन पर बातचीत की थी। इन कॉल में वह रो रही थी और पति के आक्रामक व्यवहार की शिकायत कर रही थी।



CCTV में सास और पति छत की ओर जाते दिखे

जांच में सामने आए CCTV फुटेज में 12 मई की रात की गतिविधियां दर्ज हैं। रात करीब 10:23 बजे गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह छत की ओर जाते दिखाई दिए। दोनों पहली मंजिल से छत की ओर जा रहे थे। इसके बाद गिरिबाला नीचे आकर मुख्य दरवाजा खोलती दिखाई दीं। कुछ देर बाद समर्थ सिंह, चचेरे भाई स्वराज सिंह और घरेलू कर्मचारी प्रमोद कुमार झा दिखे। तीनों ट्विशा को सीढ़ियों से नीचे लाते दिखाई दिए। AIIMS भोपाल के डॉक्टरों ने रात 10:55 बजे ट्विशा को मृत घोषित किया था।



दोनों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फांसी से मौत की पुष्टि

ट्विशा का पहला पोस्टमॉर्टम AIIMS भोपाल में हुआ था। इसके बाद 24 मई को AIIMS दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने दूसरी रिपोर्ट तैयार की। दोनों रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी से दम घुटना बताया गया। दूसरी रिपोर्ट में जिम्नास्टिक बेल्ट के एक रिंग से फांसी लगाने की बात सामने आई। रिपोर्ट में संघर्ष या मारपीट के संकेत देने वाली अन्य चोटों का उल्लेख नहीं था। हालांकि, हाईकोर्ट ने जमानत के लिए केवल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को निर्णायक आधार नहीं माना। अदालत ने जांच से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी विचार किया।



iPhone और DVR की फोरेंसिक जांच अभी बाकी

हाईकोर्ट में CBI ने बताया था कि ट्विशा के iPhone से डेटा निकालना बाकी है। घर के DVR से मिला डेटा भी जांच के लिए नई दिल्ली भेजा गया है। इसे CFSL और DFSS में जांच के लिए भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। CBI ने डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ मिलने पर आगे जांच की संभावना भी जताई थी। इसके अलावा दहेज की मांग और दहेज हत्या से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।



सभी परिस्थितियों को एक साथ देखना जरूरी

जमानत पर सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें रखी थीं। बचाव पक्ष ने कहा था कि उनके खिलाफ बेटे के अलावा कोई स्वतंत्र और ठोस आरोप नहीं है। केवल मानसिक प्रताड़ना के आरोप से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित नहीं होता। वहीं CBI और आपत्तिकर्ता पक्ष ने ट्विशा की चैट और आखिरी फोन कॉल को अहम बताया।



CCTV फुटेज और घटना के बाद के आचरण को भी महत्वपूर्ण बताया गया था। हाईकोर्ट ने कथित मानसिक प्रताड़ना और मौत से पहले की परिस्थितियों पर विचार किया था। अदालत के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों को इन परिस्थितियों से अलग नहीं देख सकते। लंबित फोरेंसिक जांच और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया गया।



अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका फिलहाल तकनीकी खामियां दूर होने के इंतजार में है। सुधार के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, ट्विशा के पिता की ट्रांसफर पिटीशन पहले से लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भोपाल में ट्रायल पर रोक लगी हुई है। अब दोनों याचिकाओं की सुनवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट इन्हें अलग-अलग सुनेगा या साथ में, यह देखना अहम होगा। फिलहाल दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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