जुडिशरी से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक पूर्व जज ने लगाया था सोर्स? गिरिबाला के 16 कॉल, CBI ने बताया जांच प्रभावित करने का खतरा
वकील ने पार्लर के सीसीटीवी फुटेज जुटाने का मुद्दा भी उठाया। इसे कथित तौर पर अलग से जांच करने की कोशिश बताया गया। वहीं सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को जमानत देने का विरोध किया।
हाईकोर्ट में सुबह से शाम तक चली जमानत पर बहस
ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में सोमवार 26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुबह 10:30 बजे बहस शुरू हुई। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने से लेकर खत्म होने तक बहस चलती रही।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। गिरिबाला सिंह और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। सीबीआई ने भी कोर्ट में अपनी बात रखी।
सुनवाई के दौरान गिरिबाला के फोन कॉल का मुद्दा उठा। अलग से कथित जांच करने और सीसीटीवी फुटेज जुटाने पर भी सवाल उठे। ट्विशा को मानसिक रूप से परेशान किए जाने के आरोपों पर भी बहस हुई। अब गिरिबाला की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन दायर की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि हाईकोर्ट गिरिबाला की जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकता है। उसे दो सप्ताह के भीतर फैसला देने का निर्देश भी दिया गया था।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई थी। उस समय आदेश अपलोड नहीं हुआ था। इसी कारण सुनवाई सोमवार सुबह 10:30 बजे तय की गई थी। सोमवार को सभी पक्षों ने इस मामले में विस्तार से अपना पक्ष रखा।
गिरिबाला के 16 कॉल की डिटेल्स
गिरिबाला सिंह की जमानत का विरोध करते हुए नवनिधि शर्मा के वकील ने कॉल रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया। उन्होंने कोर्ट में गिरिबाला के मोबाइल की कॉल डिटेल पेश की। वकील ने बताया कि गिरिबाला ने एक व्यक्ति को 12 बार कॉल किया था। दावा किया गया कि यह व्यक्ति न्यायपालिका को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा ब्यूरोक्रेसी से जुड़े एक व्यक्ति को भी चार कॉल किए गए थे।
वकील के मुताबिक गिरिबाला ने आखिरी तीन कॉल ऐसे लोगों को किए थे जो अब इस केस में गवाह हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन कॉल के जरिए जांच प्रभावित हो सकती है। जमानत का विरोध करते हुए वकील ने इन बातों को कोर्ट के सामने रखा।
क्या रिश्तेदारों को किए थे गिरिबाला ने फोन
फोन कॉल के मामले में गिरिबाला सिंह के वकील ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि गिरिबाला ने जिन लोगों को फोन किए थे वे उनके रिश्तेदार हैं। इनमें एक प्रिंसिपल और एक जिला जज के रिश्तेदार भी शामिल बताए गए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी पूछा कि आखिर ये कॉल क्यों किए गए थे।
वहीं नवनिधि शर्मा के वकील ने कहा कि जमानत भरोसे के आधार पर दी जाती है। किसी आरोपी पर जांच प्रभावित करने का आरोप हो तो उसका पिछला व्यवहार देखना जरूरी है। उन्होंने गिरिबाला के पूर्व न्यायिक पद और प्रभावशाली लोगों से उनके संपर्कों का भी मुद्दा उठाया। इसी आधार पर उन्होंने गिरिबाला को जमानत देने का विरोध किया।
पार्लर के CCTV फुटेज जुटाने को बताया कथित समानांतर जांच
सुनवाई के दौरान नवनिधि शर्मा के वकील ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह की ओर से मामले की अलग से जांच कराई जा रही थी। इसके लिए उस पार्लर की संचालिका के बयान का हवाला दिया गया। ट्विशा अपनी मौत से पहले इसी पार्लर में गई थी।
पार्लर संचालिका ने सीबीआई को बताया कि उसके पास दो वकील आए थे। उन्होंने गिरिबाला का नाम लेकर कहा कि मैडम का फोन आया होगा। इसके बाद वकीलों ने पार्लर के सीसीटीवी फुटेज मांगे। संचालिका ने कहा कि उसे सीसीटीवी सिस्टम चलाना नहीं आता था।
अगले दिन दोनों वकील एक सीसीटीवी टेक्नीशियन को लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने रिकॉर्डिंग की दो कॉपी बनवाईं। इसके बाद फुटेज पेन ड्राइव में लेकर चले गए थे।
नवनिधि शर्मा के वकील ने इसे जांच में दखल देने की कोशिश बताया। उन्होंने आशंका जताई कि गिरिबाला को जमानत मिलने पर सबूतों और गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने जमानत का विरोध किया।
घटना के तुरंत बाद प्रभावशाली लोगों को फोन करने का आरोप
नवनिधि शर्मा के वकील ने कहा कि घटना के तुरंत बाद गिरिबाला ने कई प्रभावशाली लोगों से संपर्क किया था। इनमें न्यायपालिका और प्रशासन से जुड़े लोग भी शामिल थे। वहीं गिरिबाला के वकील ने कहा कि ये कॉल रिश्तेदारों से सामान्य बातचीत के लिए किए गए थे।
नवनिधि शर्मा के वकील ने सवाल उठाया कि आखिर इन लोगों को फोन क्यों किए गए। उन्होंने कहा कि गिरिबाला पहले जिला जज रह चुकी हैं। उनके प्रभावशाली लोगों से संपर्क हैं। ऐसे में जांच प्रभावित होने की आशंका है।
वकील ने कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जमानत मिलने पर गवाहों को भी प्रभावित किया जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने गिरिबाला की जमानत खारिज करने की मांग की। हालांकि ये सभी बातें कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से रखी गई दलीलें हैं।
गिरिबाला की ओर से कहा गया, प्रताड़ना के आरोप समर्थ पर हैं
गिरिबाला सिंह के वकील ने ट्विशा को परेशान करने के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि गिरिबाला के खिलाफ क्रूरता के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। ज्यादातर आरोप उनके बेटे समर्थ सिंह से जुड़े हैं।
बचाव पक्ष ने ट्विशा के परिवार पर भी जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया। इसके लिए पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और जांच अधिकारी के बयानों का हवाला दिया गया।
गिरिबाला के वकील ने दावा किया कि ट्विशा के परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया था। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट हासिल करने और डॉक्टर को प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया। हालांकि ये सभी दावे बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में रखे गए हैं।
पोस्टमार्टम डॉक्टर और ट्विशा की भाभी को लेकर बचाव पक्ष की दलील
गिरिबाला सिंह के वकील ने कोर्ट में डॉक्टर आरके विदुआ के बयान का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि राशि अबरोल ने डॉक्टर से कई बार संपर्क किया था। राशि ने खुद को ट्विशा की भाभी बताया था।
बचाव पक्ष के मुताबिक राशि एक वर्दीधारी गनमैन के साथ डॉक्टर के कार्यालय पहुंची थीं। वहां उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी लेने की कोशिश की थी।
गिरिबाला के वकील ने कटारा हिल्स थाने के जांच अधिकारी सुनील दुबे के बयान का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक अस्पताल में ट्विशा के परिजन एफआईआर दर्ज कराने के लिए दबाव बना रहे थे।
बचाव पक्ष ने इन बातों को कोर्ट में अपनी दलीलों के समर्थन में रखा। हालांकि ये गिरिबाला की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनकी पुष्टि अदालत के अंतिम फैसले से नहीं हुई है।
बचाव पक्ष बोला, ट्विशा खुद बच्चा नहीं चाहती थी
गिरिबाला सिंह के वकील ने गर्भपात के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि ट्विशा दिल्ली में नौकरी करना चाहती थी। वह बच्चा नहीं चाहती थी। बचाव पक्ष के मुताबिक समर्थ गर्भपात के खिलाफ था। इसलिए गिरिबाला पर बच्चे को लेकर दबाव बनाने का आरोप सही नहीं है।
इस पर हाईकोर्ट ने ट्विशा के अपनी मां को भेजे मैसेज का जिक्र किया। ट्विशा ने लिखा था कि अम्मा ने उसकी जिंदगी में आग लगा दी है। उसने अपनी मां से भोपाल से ले जाने की बात भी कही थी।
कोर्ट ने गर्भपात को लेकर बचाव पक्ष से सवाल भी किए। कोर्ट ने पूछा कि डॉक्टर ने समर्थ के सामने गर्भपात की दवा लिखी थी। ऐसे में समर्थ के गर्भपात के खिलाफ होने की बात कैसे सही मानी जाए। इस मुद्दे पर भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सामने आईं।
मां से बातचीत और पूरी चैट को लेकर भी बहस
गिरिबाला सिंह के वकील ने ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्विशा कई बार अपनी मां से भी अपमानजनक तरीके से बात करती थी। बचाव पक्ष ने सीबीआई पर अधूरी चैट के आधार पर निष्कर्ष निकालने का आरोप लगाया।
वकील ने कहा कि कुछ चुनिंदा मैसेज को ही आधार बनाया जाए तो ट्विशा की मां पर भी उकसाने का मामला बन सकता है।
बचाव पक्ष के मुताबिक ट्विशा की प्रेग्नेंसी और गर्भपात को लेकर उसका परिवार भी पूरी तरह सहमत नहीं था। इस वजह से ट्विशा खुद को अकेला महसूस कर रही थी।
गिरिबाला के वकील ने मांग की कि ट्विशा की पूरी चैट देखी जाए। इसके बाद ही बातचीत का सही मतलब समझा जा सकता है। हालांकि ये सभी बातें बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में रखी गई दलीलें हैं।
मौत से पहले डिलीट वीडियो या फोटो पर कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान ट्विशा के मोबाइल डेटा का मुद्दा भी उठा। हाईकोर्ट ने पूछा कि मौत वाले दिन शाम करीब 7:30 बजे ट्विशा ने अपनी मां को कुछ फोटो या वीडियो भेजे थे। क्या उन्हें वापस हासिल किया गया है? कोर्ट को बताया गया कि ट्विशा के आईफोन की एफएसएल रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद ही मोबाइल डेटा की जांच पूरी हो सकेगी।
गिरिबाला सिंह के वकील ने कहा कि ट्विशा अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र थी। उसके पास मोबाइल और पैसे भी थे। उसने अपनी यात्रा के लिए टिकट भी बुक कर लिया था। ऐसे में आत्महत्या ही उसके पास आखिरी रास्ता नहीं था।
इस पर हाईकोर्ट ने 12 मई की चैट का जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि ट्विशा ने अपने माता-पिता से पैसे मांगे थे। ऐसे में उसके पास पैसे होने की दलील पर भी सवाल उठता है।
CBI ने पहले पोस्टमार्टम और शुरुआती जांच पर उठाए सवाल
सीबीआई ने भी गिरिबाला सिंह की जमानत का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि शुरुआती पोस्टमार्टम और राज्य की एसआईटी जांच में कई कमियां थीं। सीबीआई के मुताबिक इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि गिरिबाला के प्रभाव से जांच प्रभावित हुई हो।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि घटना के बाद मौके पर सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश हुई। घटनास्थल को भी प्रभावित किया गया। एजेंसी ने कहा कि गिरिबाला ने जांच टीम का पूरा सहयोग नहीं किया।
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि गिरिबाला की अग्रिम जमानत पहले खारिज हो चुकी थी। इसके बाद 28 मई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इन्हीं बातों को आधार बनाकर सीबीआई ने गिरिबाला को नियमित जमानत देने का विरोध किया।
CBI ने चैट के आधार पर लगातार मानसिक प्रताड़ना का दावा किया
सीबीआई ने कोर्ट में व्हाट्सएप चैट का भी जिक्र किया। एजेंसी ने कहा कि ट्विशा के चरित्र पर शक किया जा रहा था। सीबीआई के मुताबिक 17 अप्रैल को ट्विशा की प्रेग्नेंसी का पता चला था। इसके बाद परिवार में विवाद हुआ और ट्विशा नोएडा चली गई थी।
ट्विशा 30 अप्रैल को भोपाल वापस लौटी थी। इसके बाद उसने अपनी मां से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत की थी। सीबीआई का दावा है कि गर्भपात के बाद भी ट्विशा तनाव में थी।
एजेंसी ने बताया कि 12 मई को मौत वाले दिन भी ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया था। उसने पति के अपमानजनक व्यवहार के बारे में बताया था।
सीबीआई ने इन बातचीत को कोर्ट में अहम सबूत बताया। एजेंसी के मुताबिक इनसे ट्विशा की मौत से पहले के हालात समझने में मदद मिलती है।
वॉयस सैंपल और क्राइम सीन को लेकर CBI की दलील
सीबीआई ने आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह और समर्थ ने वॉयस सैंपल देने में सहयोग नहीं किया। एजेंसी ने भोपाल सेंट्रल जेल में दोनों के वॉयस सैंपल लेने की कोशिश की थी। इसके बाद निचली अदालत ने 14 जुलाई को आदेश दिया। तब जाकर दोनों के वॉयस सैंपल लिए जा सके।
सीबीआई ने कहा कि गिरिबाला ने घटनास्थल पर दोबारा जांच करने में भी सहयोग नहीं किया। एजेंसी के मुताबिक गिरिबाला पहले बड़े पद पर रह चुकी हैं। ऐसे में उनके प्रभाव से गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका है। सीबीआई ने इन्हीं आरोपों के आधार पर गिरिबाला को जमानत देने का विरोध किया।
CBI ने चार्जशीट दाखिल कर जमानत खारिज करने की मांग की
सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108 और 3(5) लगाई गई हैं। एजेंसी ने कहा कि दहेज मृत्यु और मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच अभी जारी है।
यह मामला भोपाल की अदालत में आरोप तय होने के चरण में था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से आगे की कार्यवाही रुकी हुई है।
सीबीआई ने हाईकोर्ट में गिरिबाला की जमानत का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि मामला गंभीर है। जमानत मिलने पर सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है। गवाहों पर भी दबाव बनाया जा सकता है। इन्हीं बातों को आधार बनाकर सीबीआई ने जमानत नहीं देने की मांग की।
अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
सोमवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई में गिरिबाला के फोन कॉल और कथित अलग जांच का मुद्दा उठा। पार्लर के सीसीटीवी फुटेज और ट्विशा की चैट पर भी बहस हुई।
गिरिबाला के वकील ने सभी आरोपों को गलत बताया। उन्होंने ट्विशा के परिवार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। वहीं नवनिधि शर्मा के वकील ने गिरिबाला की जमानत का विरोध किया। उन्होंने गिरिबाला के प्रभावशाली लोगों से संपर्क और जांच में कथित दखल का मुद्दा उठाया।
सीबीआई ने भी जमानत देने का विरोध किया। एजेंसी ने गवाहों और सबूतों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई। अब हाईकोर्ट तय करेगा कि गिरिबाला को जमानत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा।