ट्विशा की मौत से पहले 3 दिन की चैट, आखिरी कॉल और CCTV फुटेज ने खोली कहानी, HC ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत खारिज की

Neel Tiwari | Nov 04, 2026, 18:59 IST
पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।
Former District Judge Giribala Singh did not receive relief from the High Court in the Twisha Sharma case.
भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में हाईकोर्ट ने उनकी सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने ट्विशा की मौत से पहले की WhatsApp चैट, आखिरी फोन कॉल और CCTV फुटेज को अहम माना है। मामले की कुछ फोरेंसिक रिपोर्ट आना अभी बाकी हैं।

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज की। गिरिबाला सिंह 2 जून 2026 से जेल में बंद हैं। CBI ने उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें BNS की धारा 80(2), 85, 108 और 3(5) शामिल हैं। दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लगाई गई हैं।



सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ट्विशा की मौत से पहले के तीन दिनों की WhatsApp चैट देखी। परिवार के लोगों से हुई आखिरी फोन कॉल और घर के CCTV फुटेज पर भी गौर किया। इसके अलावा दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों को भी ध्यान में रखा।



कोर्ट ने माना कि इन सभी बातों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। मामले की जांच अभी जारी है। कई जरूरी फोरेंसिक रिपोर्ट भी आनी बाकी हैं।



डेटिंग ऐप से शुरू हुआ रिश्ता, दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी शादी

CBI के अभियोजन पक्ष के अनुसार, ट्विशा शर्मा फरवरी 2025 में एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के माध्यम से समर्थ सिंह के संपर्क में आई थीं। समर्थ सिंह भोपाल में वकालत करते थे। ट्विशा ने अपने परिवार को इस रिश्ते की जानकारी दी थी और समर्थ से शादी करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से 9 दिसंबर 2025 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दोनों का विवाह हुआ।



अभियोजन के मुताबिक, शादी से जुड़े सभी खर्च ट्विशा के परिवार ने उठाए थे। शादी के बाद कुछ ही समय में दोनों के बीच विवाद शुरू हो गए। आरोप है कि समर्थ सिंह ट्विशा के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। CBI का आरोप है कि गिरिबाला सिंह भी बेटे को समझाने के बजाय उसका पक्ष लेती थीं। जब ट्विशा अपने पति की शिकायत लेकर सास के पास जाती थीं, तब उनकी शिकायतों का समाधान करने के बजाय कथित तौर पर बेटे का बचाव किया जाता था।



CBI के अनुसार, मां-बेटे दोनों ने मिलकर ट्विशा को मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से परेशान किया। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि गिरिबाला सिंह की भूमिका को लेकर अभियोजन के पास ठोस साक्ष्य नहीं हैं।



गर्भावस्था की जानकारी के बाद बढ़े विवाद, MTP गोलियां लेने का भी मामला

हाई कोर्ट के आदेश में गर्भावस्था और उसके बाद हुए विवादों का भी विस्तार से उल्लेख है। अभियोजन के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 को ट्विशा ने घर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट किट से जांच की और गर्भवती होने की जानकारी मिली। अगले दिन 17 अप्रैल को वह समर्थ सिंह के साथ भोपाल के हेजेला अस्पताल गईं, जहां गर्भावस्था की पुष्टि कराई गई।



CBI का आरोप है कि समर्थ सिंह ड्रग्स का सेवन करते थे। ट्विशा को आशंका थी कि गर्भावस्था के दौरान उनके पति की कथित नशे की आदत का असर होने वाले बच्चे पर पड़ सकता है और बच्चे में विकृतियां आ सकती हैं। ट्विशा ने अपने माता-पिता को यह भी बताया था कि ससुराल में उन पर लगातार नजर रखी जाती है। इस निगरानी के कारण उन्हें मानसिक परेशानी होती थी और वह गर्भावस्था जारी रखने को लेकर भी अनिच्छुक थीं।



अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान ट्विशा ने गर्भावस्था समाप्त करने के इरादे से MTP की गोलियां लीं। इसके बाद घर में विवाद और बढ़ गए। बचाव पक्ष ने इस घटनाक्रम पर अलग दलील दी। उसका कहना था कि ट्विशा स्वयं गर्भावस्था समाप्त करना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें पति के कथित ड्रग्स सेवन के कारण बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर चिंता थी। डॉक्टरों के बयानों का हवाला देकर बचाव पक्ष ने कहा कि गर्भपात कराने का दबाव डालने या अजन्मे बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने के आरोप सही नहीं हैं।



20 लाख के शेयरों पर भी विवाद, संयुक्त खाते में पैसा ट्रांसफर कराने का आरोप

जमानत का विरोध करते हुए ट्विशा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने एक और महत्वपूर्ण आरोप कोर्ट के सामने रखा। उनके अनुसार, ट्विशा के पास एक डीमैट खाता था, जिसमें करीब 20 लाख रुपए के इक्विटी शेयरों में निवेश था। इस निवेश की जानकारी मिलने के बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने कथित तौर पर ट्विशा पर रकम संयुक्त बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया।



बताया गया कि इस उद्देश्य से 7 अप्रैल 2026 को भारतीय स्टेट बैंक की बागमुगलिया शाखा में ट्विशा और समर्थ सिंह का संयुक्त खाता खोला गया था। आरोप है कि दोनों चाहते थे कि ट्विशा अपने निवेश की रकम इस खाते में ट्रांसफर कर दे। ट्विशा ने यह कहते हुए रकम ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था कि यह पैसा उनके पिता का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस इनकार के बाद भी उन पर दबाव बनाया जाता रहा।



वहीं, बचाव पक्ष ने दहेज मांगने के आरोपों को चुनौती देते हुए बताया कि गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने स्वयं ट्विशा के बैंक खाते में 7.50 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। यह खाता ट्विशा संचालित करती थीं और वह अपनी जरूरत के अनुसार पैसे खर्च करती थीं। बचाव पक्ष ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि ट्विशा के माता-पिता ने आरोपियों के खातों में कोई रकम ट्रांसफर की हो। इसलिए दहेज मांगने के आरोपों की जांच जरूरी है।



मॉडलिंग और एक्टिंग करियर को लेकर भी ताने मारने का आरोप

ट्विशा के परिवार की ओर से कोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि गिरिबाला सिंह उनके पुराने मॉडलिंग और अभिनय के करियर को लेकर उनका मजाक उड़ाती थीं। मनोरंजन उद्योग में काम करने के दौरान अन्य लोगों के साथ उनके पेशेवर संबंधों और अंतरंगता को लेकर भी सवाल किए जाते थे।



परिवार के वकीलों ने बताया कि ट्विशा ने गुरुग्राम में अपने पूर्व नियोक्ता अमित दास से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने भोपाल में ससुराल वालों के व्यवहार की जानकारी दी थी। ट्विशा ने उनसे रोजगार दिलाने में मदद करने की जरूरत भी बताई थी। आरोप के अनुसार, उन्होंने अमित दास को बताया था कि उनकी सास अक्सर उनका मजाक उड़ाती हैं और पति हमेशा अपनी मां का पक्ष लेते हैं।



अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि ट्विशा अपने पति के साथ बंसल अस्पताल गई थीं। वहां उन्होंने डॉ. निधि नागर से परामर्श किया था और गर्भावस्था जारी रखने की अनिच्छा जताई थी। डॉक्टर ने कथित तौर पर उन्हें MTP की गोलियां लिखी थीं। परिवार की ओर से विशेष रूप से यह बात उठाई गई कि ट्विशा गर्भपात कराने अकेले अस्पताल नहीं गई थीं, बल्कि समर्थ सिंह भी उनके साथ थे।



7 मई का मैसेज: मां से कहा, मुझे यहां से ले जाओ

हाई कोर्ट के आदेश में 7 मई 2026 को ट्विशा और उनकी मां के बीच हुई WhatsApp बातचीत का विशेष उल्लेख है। इस बातचीत को अभियोजन पक्ष ने मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में पेश किया।



ट्विशा ने अपनी मां को संदेश भेजकर कहा था कि वे अगले दिन उन्हें ससुराल से लेने आ जाएं। उन्होंने लिखा था कि उन्हें नहीं लगता कि समर्थ अब उन्हें अपने साथ रखना चाहते हैं। उन्होंने अपनी मां से कहा था कि सुबह फोन करें और उपलब्ध ट्रेन टिकट देखकर आने की व्यवस्था करें। उन्होंने यह भी कहा था कि मां अकेले आएं और पिता को फिलहाल साथ न लाएं। वे चुपचाप वहां से निकल जाएंगी।



इस संदेश में ट्विशा ने यह भी बताया था कि समर्थ ने उनसे कहा है कि वह एक साल से उन्हें झेल रहे हैं। ट्विशा ने अपनी मां से अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब क्या करें।



8 मई को भी उन्होंने अपनी मां को एक और संदेश भेजा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पति के मन में बच्चे के अलावा उनकी कोई इज्जत नहीं है। उन्हें डर था कि बच्चे के जन्म के बाद उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित करके बच्चा उनसे छीन लिया जाएगा। हाई कोर्ट ने इन बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि घटना से पहले ट्विशा अपने वैवाहिक जीवन को लेकर गंभीर मानसिक परेशानी में थीं।



9 मई की चैट में पति पर बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने का आरोप

हाई कोर्ट के आदेश में 9 मई 2026 को ट्विशा और उनकी ननद राशि अरोड़ा के बीच हुई बातचीत को भी महत्वपूर्ण माना गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस बातचीत में ट्विशा ने बताया था कि समर्थ सिंह ने उनसे सवाल किया कि बच्चा उनका है या किसी और का। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इसी वजह से ट्विशा ने गर्भपात कराया था।



ट्विशा ने अपनी ननद से कहा था कि उनके पति ने सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी सास के सामने भी पति की इस बात का जिक्र किया, लेकिन समर्थ ने उनके सामने झूठ बोला और सास ने हमेशा की तरह बेटे की बात पर भरोसा किया।



इस बातचीत में ट्विशा ने अपनी मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर परेशानी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अब उनसे यह सब सहन नहीं हो रहा है। वह इस रिश्ते में घुटन महसूस कर रही हैं। बातचीत में उन्होंने खुद को खत्म करने और मरने जैसे विचार भी जाहिर किए थे।



कोर्ट ने इस चैट को केवल पति-पत्नी के सामान्य विवाद के रूप में नहीं देखा। आदेश में कहा गया कि इस बातचीत से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि ट्विशा कथित मानसिक उत्पीड़न और क्रूरता से परेशान थीं और उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के विचार भी व्यक्त किए थे।



11 मई को भी मां से लगातार शिकायतें, कहा- यहां मेरा दम घुट रहा है

ट्विशा की मौत से एक दिन पहले यानी 11 मई को भी उन्होंने अपनी मां को कई WhatsApp संदेश भेजे थे। हाई कोर्ट के आदेश में सुबह 11:21 बजे से 11:42 बजे के बीच हुई बातचीत का विशेष उल्लेख है।



इस बातचीत में ट्विशा ने अपनी मां को बताया था कि ससुराल में सभी लोग मानते हैं कि वह ड्रग्स लेती हैं और इसी वजह से उनका मूड खराब रहता है। उनका कहना था कि कोई यह समझने की कोशिश नहीं करता कि उनके पति ही उनसे बात नहीं कर रहे हैं और वह किन परिस्थितियों में रह रही हैं।



उन्होंने मां से कहा था कि उनका दम बहुत घुट रहा है। उन्हें न तो रोने दिया जाता है और न ही खुश रहने की कोई वजह मिलती है। उन्होंने खुद को बुरी तरह फंसा हुआ बताया। बातचीत में उन्होंने यह भी शिकायत की कि उनसे पूछा जाता है कि कहीं वह डार्क वेब से ड्रग्स तो नहीं मंगवाती हैं।



इसी दिन एक दूसरे संदेश में ट्विशा ने मां को बताया था कि उनकी सास और समर्थ आपस में ऐसे बात कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। न सास कुछ कह रही हैं और न पति। उन्होंने अपनी मां से कहा कि अब उनका किसी चीज में मन नहीं लगता और कुछ भी अच्छा नहीं लगता।



हाई कोर्ट ने इन संदेशों को घटना से पहले ट्विशा की मानसिक स्थिति और उनके द्वारा कथित रूप से झेले जा रहे मानसिक उत्पीड़न को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना।



12 मई की सुबह मायके जाने के लिए मां से मांगे थे 3 हजार रुपए

12 मई 2026 को ट्विशा ने अपनी मां को फोन करके खाते में 3 हजार रुपए भेजने के लिए कहा था। उन्हें राजस्थान के नसीराबाद जाने के लिए ट्रेन टिकट बुक करनी थी। उस दिन उन्हें समर्थ सिंह के साथ डॉ. काकोली रॉय के पास जाना था, जहां कपल काउंसलिंग होनी थी। हालांकि, अभियोजन के अनुसार समर्थ सिंह शुरू में काउंसलिंग के लिए जाने को तैयार नहीं थे।



ट्विशा ने अपनी मां और ननद को बताया था कि उन्होंने इस रिश्ते को बचाने के लिए पूरी कोशिश कर ली है। अब वह अपने माता-पिता के पास वापस आना चाहती हैं। इसके बाद उनके पिता ने खाते में 3 हजार रुपए ट्रांसफर किए और ट्विशा ने नसीराबाद जाने के लिए ट्रेन टिकट बुक कर ली।



कुछ समय बाद ट्विशा ने अपनी मां को बताया कि जब उन्होंने समर्थ को अपने मायके जाने के फैसले की जानकारी दी तो वह डॉक्टर के पास काउंसलिंग के लिए जाने को तैयार हो गए। यानी मायके जाने की तैयारी के बाद समर्थ ने काउंसलिंग के लिए सहमति जताई थी।



शाम 7:51 बजे ननद को बताया, पति निवेश की रकम ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे

12 मई को शाम करीब 7:51 बजे ट्विशा ने अपनी ननद राशि अरोड़ा से दोबारा फोन पर बात की। इस बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने वापस आने का फैसला कर लिया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि समर्थ सिंह उन पर अपने निवेश की रकम ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे हैं, ताकि उस पैसे को चीनी शेयर बाजार में निवेश किया जा सके।



यह आरोप उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें पहले भी करीब 20 लाख रुपए के शेयर और संयुक्त बैंक खाते का जिक्र सामने आया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ट्विशा अपनी निवेश की रकम ट्रांसफर नहीं करना चाहती थीं और इसे लेकर भी घर में विवाद था।



कोर्ट ने इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि मौत से कुछ घंटे पहले तक ट्विशा अपने मायके लौटने की योजना बना रही थीं और अपने परिवार तथा ननद से लगातार संपर्क में थीं।



रात 9:20 बजे ननद को फोन, रोते हुए बताई पति की आक्रामकता

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 12 मई की रात की घटनाएं हैं। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, रात करीब 9:20 बजे ट्विशा ने नसीराबाद में मौजूद अपनी ननद राशि अरोड़ा से फोन पर बात की थी।



ट्विशा लगातार रो रही थीं। उन्होंने अपनी ननद को बताया कि पीठ में दर्द होने के कारण उन्होंने समर्थ सिंह से बेडरूम में सोने देने का अनुरोध किया था। लेकिन इस बात पर समर्थ कथित तौर पर उनके प्रति आक्रामक और हिंसक हो गए। बातचीत के दौरान फोन कट गया।



इसके बाद रात करीब 9:29 बजे राशि अरोड़ा ने फिर फोन किया। ट्विशा ने कॉल उठाया, लेकिन वह लगातार रो रही थीं। उनकी स्थिति ऐसी थी कि कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकी और फोन फिर कट गया।



रात 9:36 बजे ट्विशा ने अपनी ननद को WhatsApp मैसेज भेजा। इसमें लिखा था, Ask him to collect left over of his wife. But tomorrow. Let me die in peace right now.



इस मैसेज का आशय था कि पति से कहें कि वह अगले दिन अपनी पत्नी का बचा हुआ सामान ले जाएं, लेकिन अभी उन्हें शांति से मरने दें। इस संदेश को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया है। यह मौत से कुछ मिनट पहले की परिस्थितियों को समझने वाला बेहद महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य माना गया।



रात 9:41 बजे पिता से आखिरी बातचीत, रोते हुए कहा- समर्थ हिंसक हो गए हैं

ट्विशा के परिवार के सदस्य लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्होंने कई कॉल का जवाब नहीं दिया। रात करीब 9:41 बजे ट्विशा ने अपने पिता को WhatsApp कॉल किया।



पिता ने उन्हें रोते हुए पाया। जब उन्होंने रोने की वजह पूछी तो ट्विशा ने कथित तौर पर बताया कि समर्थ सिंह उनके साथ बहुत आक्रामक और हिंसक व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने डर भी जाहिर किया और अपने माता-पिता से जल्द से जल्द उनके पास आने का अनुरोध किया।



इसके बाद रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया। मां ने भी उन्हें रोते हुए पाया। ट्विशा ने उन्हें दोबारा बताया कि समर्थ उनके प्रति आक्रामक और हिंसक हो गए हैं। बातचीत के दौरान फोन कट गया।



इसके बाद मां ने कई बार ट्विशा को फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया। उनकी मां ने समर्थ सिंह को भी फोन किया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला।



रात 10:23 बजे CCTV में सास और पति छत की ओर जाते दिखे

हाई कोर्ट के आदेश में घर के CCTV फुटेज का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। यह फुटेज इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।



अभियोजन पक्ष के अनुसार, रात करीब 10:23 बजे CCTV कैमरे में गिरिबाला सिंह पहली मंजिल से छत की ओर जाती दिखाई देती हैं। उनके पीछे समर्थ सिंह भी जाते हुए नजर आते हैं। इसके बाद गिरिबाला सिंह नीचे आती हैं और मुख्य गेट खोलती हैं।



फुटेज में आगे समर्थ सिंह, उनके चचेरे भाई स्वराज सिंह और घरेलू नौकर प्रमोद कुमार झा ट्विशा को भूतल की ओर ले जाने वाली सीढ़ियों से नीचे लाते दिखाई देते हैं।



इसके बाद ट्विशा को एम्स भोपाल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने रात करीब 10:55 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से अस्वाभाविक मौत की सूचना पुलिस को दी गई। इसी घटना के बाद गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।



कोर्ट ने CCTV फुटेज का उल्लेख करते हुए इसे अन्य परिस्थितियों के साथ देखने की जरूरत बताई है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फुटेज की प्रामाणिकता और उसमें दर्ज डेटा की निरंतरता की फोरेंसिक जांच अभी बाकी है।



दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी, दूसरी रिपोर्ट दिल्ली AIIMS के बोर्ड ने बनाई

ट्विशा की मौत के बाद पहला पोस्टमार्टम एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने किया था। रिपोर्ट में मौत का कारण लिगेचर यानी फंदे से एंटीमॉर्टम हैंगिंग के कारण हुई एस्फिक्सिया (दम घुटना) बताया गया था। इसका अर्थ है कि फांसी लगाए जाने के दौरान दम घुटने से मौत हुई।



ट्विशा के परिवार को पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर संदेह था। परिवार ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में प्रभाव के कारण हेरफेर की आशंका है। इसके बाद परिवार की मांग पर दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया हुई।



24 मई 2026 को नई दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दूसरा पोस्टमार्टम किया। इस रिपोर्ट में भी मौत का कारण फांसी के कारण हुई एस्फिक्सिया बताया गया। मेडिकल बोर्ड के अनुसार, ट्विशा की मौत एंटीमॉर्टम हैंगिंग से हुई थी। इसमें एक रिंग वाली जिमनास्टिक बेल्ट को फंदे के रूप में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख है।



दूसरी रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया कि शरीर पर ऐसी कोई अन्य चोट नहीं मिली, जो हमला या हाथापाई होने का संकेत देती हो। दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फंदे से लटकना बताया गया है। परिवार के वकीलों ने कोर्ट में इन रिपोर्टों का हवाला दिया और कहा कि मौत की परिस्थितियों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।



गिरिबाला सिंह के वकीलों ने कहा- सास के खिलाफ प्रताड़ना का ठोस आरोप नहीं

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता सहित अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि गिरिबाला सिंह निर्दोष हैं और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।



उनकी ओर से तर्क दिया गया कि WhatsApp चैट में अधिकांश आरोप समर्थ सिंह के खिलाफ हैं। गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को प्रताड़ित किया हो, ऐसा कोई स्पष्ट और ठोस आरोप नहीं है। बचाव पक्ष ने तस्वीरों और पत्रों का भी हवाला दिया, जिनमें ट्विशा ने अपनी सास के व्यवहार को देखभाल करने वाला बताया था।



बचाव पक्ष ने डॉ. सत्य कांत त्रिवेदी और डॉ. काकोली राय के बयानों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इन डॉक्टरों के बयान ट्विशा के अवसाद और ड्रग्स सेवन की बात सामने लाते हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, ट्विशा स्वयं गर्भावस्था समाप्त करना चाहती थीं क्योंकि उन्हें डर था कि ड्रग्स सेवन के कारण बच्चे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।



उन्होंने यह भी कहा कि अजन्मे बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने या गर्भपात के लिए दबाव डालने के आरोपों का समर्थन करने वाला कोई ठोस प्रमाण नहीं है।



7.50 लाख रुपए खाते में भेजने का दिया हवाला, दहेज मांगने के आरोपों को बताया गलत

गिरिबाला सिंह के वकीलों ने दहेज प्रताड़ना के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने ट्विशा के खाते में 7.50 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। खाते का संचालन ट्विशा स्वयं करती थीं और वह अपनी जरूरत के हिसाब से रकम खर्च करती थीं।



बचाव पक्ष ने कहा कि ट्विशा के माता-पिता की ओर से आरोपियों के खातों में कोई रकम ट्रांसफर किए जाने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में दहेज मांगने के आरोपों की पुष्टि नहीं होती।



वकीलों ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे साबित हो कि मौत से ठीक पहले गिरिबाला सिंह या समर्थ सिंह ने दहेज की मांग को लेकर ट्विशा को प्रताड़ित किया था। इसलिए BNS की धारा 80(2) के आवश्यक तत्व प्रथम दृष्टया पूरे नहीं होते।



आवाज का सैंपल देने से इनकार नहीं किया, पहले ही दे चुकी थीं सैंपल

CBI की ओर से यह आरोप भी लगाया गया था कि गिरिबाला सिंह ने जेल में जांच टीम के पहुंचने पर आवाज का नमूना देने से इनकार किया था। बचाव पक्ष ने इस आरोप को गलत बताया।



उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि गिरिबाला सिंह 9 जुलाई 2026 को पहले ही करीब तीन घंटे की अवधि के लिए अपना आवाज का नमूना दे चुकी थीं। उन्होंने रिमांड कोर्ट के सामने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर दोबारा सैंपल देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।



इसके बाद BNSS की धारा 349 के तहत 14 जुलाई को CBI की ओर से दिया गया आवेदन इस टिप्पणी के साथ निपटा दिया गया था कि इस पर किसी आदेश की जरूरत नहीं है।



बचाव पक्ष ने कहा कि जांच में असहयोग का आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि गिरिबाला सिंह की हिरासत में पूछताछ की अब जरूरत नहीं है। वह करीब 64 वर्ष की हैं और उच्च न्यायपालिका में भी सेवा दे चुकी हैं। ऐसे में उनकी लगातार हिरासत से जांच को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।



साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को बताया निराधार

बचाव पक्ष ने CBI की उस आशंका का भी विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि जमानत पर बाहर आने के बाद गिरिबाला सिंह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।



उनकी ओर से कहा गया कि शिकायतकर्ता परिवार दिल्ली में रहता है। ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि जमानत मिलने पर गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डालेंगी। गवाहों को प्रभावित करने की आशंका केवल सामान्य दावों पर आधारित है।



बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ट्विशा के परिवार के सदस्य गिरिबाला सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इससे जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को आत्महत्या के लिए उकसाया था।



CBI और ट्विशा के परिवार ने बताया, मां-बेटे की भूमिका की जांच जरूरी

CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और उप सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा। वहीं, ट्विशा के परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल सहित अन्य वकीलों ने जमानत का विरोध किया। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी उपस्थित रहे।



CBI और आपत्तिकर्ता पक्ष का कहना था कि शादी के बाद ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। समर्थ सिंह अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे और गिरिबाला सिंह भी कथित तौर पर बेटे को उकसाती थीं। जब ट्विशा शिकायत करती थीं तो उनकी बात सुनने के बजाय बेटे का बचाव किया जाता था।



परिवार की ओर से कहा गया कि ट्विशा को पति और सास के व्यवहार से इतनी परेशानी हुई कि उन्हें 17 अप्रैल को ससुराल छोड़ना पड़ा। उन्होंने अपने पूर्व नियोक्ता से भी मदद मांगी थी। उनके करियर को लेकर भी कथित तौर पर ताने दिए जाते थे।



अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि ट्विशा की मौत से पहले की चैट, उनके आखिरी फोन कॉल, घर का CCTV फुटेज और आरोपियों के घटना के बाद के व्यवहार को एक साथ देखने की जरूरत है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले गिरिबाला सिंह को जमानत देना उचित नहीं होगा।



घटना के बाद प्रभावशाली लोगों से संपर्क करने का भी आदेश में उल्लेख

जमानत का विरोध करते हुए ट्विशा के परिवार की ओर से एक और गंभीर पहलू कोर्ट के सामने रखा गया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि घटना के दिन गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर अपना बचाव करने का प्रयास किया और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क किया था।



हाई कोर्ट ने अपने आदेश में भी केस डायरी में उपलब्ध ऐसी सामग्री का उल्लेख किया है, जो घटना के बाद आवेदक द्वारा उच्च पदों पर बैठे कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क किए जाने की ओर संकेत करती है।



कोर्ट ने कहा कि इन संचारों के पीछे की परिस्थितियों की भी आगे की जांच में पड़ताल की जानी चाहिए। यह पहलू भी जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना गया।



iPhone का डेटा अभी नहीं मिला, CBI को फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में जांच के उन पहलुओं को भी गिनाया है, जिनके कारण अभी मामले की जांच पूरी नहीं मानी जा सकती।



सबसे महत्वपूर्ण है ट्विशा का प्राथमिक मोबाइल फोन यानी iPhone। जांच एजेंसी को अभी इस फोन से डेटा एक्सट्रैक्शन और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट मिलना बाकी है। कोर्ट के सामने बताया गया कि फोन से निकला डेटा आरोपियों के खिलाफ महत्वपूर्ण सामग्री सामने ला सकता है। इससे घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और नए गवाहों की जानकारी भी मिल सकती है।



दूसरा महत्वपूर्ण साक्ष्य गिरिबाला सिंह के निवास पर लगा CCTV सिस्टम है। इसके DVR से निकाले गए डेटा को केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL), फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय, नई दिल्ली भेजा गया है।



इस जांच का उद्देश्य CCTV फुटेज की निरंतरता और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना है। यानी यह पता लगाया जाना है कि रिकॉर्डिंग पूरी और वास्तविक है या उसमें किसी तरह का बदलाव किया गया है। यदि फुटेज के साथ छेड़छाड़ सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।



कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच जारी है। दहेज की मांग और दहेज हत्या से जुड़े आरोपों की भी आगे जांच होनी है।



आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मेंस रिया पर क्या बोला हाई कोर्ट?

इस जमानत याचिका में बचाव पक्ष ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सहारा लिया था। विशेष रूप से जयदीपसिंह प्रवीणसिंह चावड़ा एवं अन्य बनाम गुजरात राज्य के फैसले का हवाला दिया गया।



बचाव पक्ष ने कहा कि आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण साबित करने के लिए आरोपी का स्पष्ट आपराधिक इरादा यानी मेंस रिया (Mens Rea) होना जरूरी है। केवल मानसिक प्रताड़ना या वैवाहिक विवाद के आधार पर किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।



उनका तर्क था कि अभियोजन को यह दिखाना होगा कि आरोपी ने कोई ऐसा सक्रिय या प्रत्यक्ष कृत्य किया, जिससे पीड़िता को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया गया। केवल परिस्थितियों से आपराधिक इरादा मान लेना पर्याप्त नहीं है। ऐसे कृत्य आत्महत्या के समय के करीब होने चाहिए और उनके बीच स्पष्ट संबंध होना चाहिए।



बचाव पक्ष ने महेंद्र आवासे बनाम मध्य प्रदेश राज्य, अनेश कुमार बनाम बिहार राज्य और जयेश खन्ना बनाम सहायक कमिश्नर कानून एवं व्यवस्था सहित सुप्रीम कोर्ट के अन्य फैसलों का भी हवाला दिया।



कोर्ट ने कहा- मेंस रिया को बाकी परिस्थितियों से अलग करके नहीं देख सकते

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने बचाव पक्ष की इस दलील पर भी विस्तार से विचार किया। कोर्ट ने कहा कि केस डायरी के अवलोकन से पता चलता है कि ट्विशा द्वारा गर्भावस्था समाप्त करने के लिए MTP गोलियां लेने के बाद उनके और आवेदक के बीच विवाद हुए थे। आवेदक और ट्विशा के बीच रिकॉर्ड की गई बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट भी प्रथम दृष्टया गर्भावस्था समाप्त होने के बाद विवाद बढ़ने का संकेत देता है।



हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेंस रिया के सवाल की इस स्तर पर अलग से जांच नहीं की जा सकती। इस पर विचार करते समय जांच के दौरान सामने आई सभी परिस्थितियों को एक साथ देखना जरूरी है।



कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष ने जिस सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया है, उसके तथ्य मौजूदा मामले से अलग हैं। इसलिए उसमें बताए गए सिद्धांत सीधे तौर पर इस मामले पर लागू नहीं किए जा सकते।



कोर्ट ने विशेष रूप से 9 मई की WhatsApp चैट का उल्लेख किया, जिसमें ट्विशा ने पति द्वारा बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने की शिकायत की थी। इसी तरह 11 मई के संदेशों में उन्होंने लगातार मानसिक परेशानी और ससुराल में घुटन महसूस करने की बात कही थी।



इसके अलावा 12 मई की रात ननद, पिता और मां से हुई बातचीत में ट्विशा के रोने, पति के आक्रामक और हिंसक व्यवहार की शिकायत करने और जल्द परिवार को अपने पास बुलाने की बात भी कोर्ट ने दर्ज की।



कोर्ट का कहना था कि इन सभी बातों को CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना के बाद आरोपियों के आचरण से जुड़ी सामग्री के साथ देखकर ही उनकी भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इस स्तर पर मेंस रिया के अभाव की दलील को बाकी परिस्थितियों से अलग करके स्वीकार नहीं किया जा सकता।



कोर्ट ने किन-किन बातों को माना महत्वपूर्ण?

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले के कई पहलुओं को एक साथ देखा। इनमें मौत से पहले ट्विशा की WhatsApp चैट, उनके द्वारा परिवार से की गई आखिरी बातचीत, पति के कथित आक्रामक व्यवहार की शिकायत, ससुराल के CCTV फुटेज और दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट शामिल हैं।



कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि ट्विशा के iPhone का डेटा अभी निकालना बाकी है। घर के DVR की फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट नहीं आई है। जांच एजेंसी को CCTV फुटेज की निरंतरता और प्रामाणिकता की पुष्टि करनी है। घटना के बाद प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क किए जाने की परिस्थितियों की भी जांच होनी है।



इसके अलावा दहेज की मांग और दहेज हत्या के आरोपों पर आगे की जांच जारी है। BNSS की धारा 193(9) के तहत पूरक जांच भी चल रही है।



कोर्ट ने कहा कि आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, जांच में सामने आई सामग्री, ट्विशा की मौत से ठीक पहले की परिस्थितियों, CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लंबित फोरेंसिक जांच को देखते हुए इस स्तर पर आवेदक को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।



जमानत खारिज, लेकिन आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल में होगा

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि मामले में अभी कई महत्वपूर्ण जांच बाकी हैं और आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का परीक्षण आगे की जांच और ट्रायल के दौरान सावधानीपूर्वक करना होगा।



इस आदेश का अर्थ यह है कि फिलहाल गिरिबाला सिंह को जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। हालांकि, जमानत खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने उन्हें आरोपों में दोषी घोषित कर दिया है। आरोपों की अंतिम सत्यता और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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